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आखिर कब्जे में आ ही गया पुलिसकर्मियों की शहादत का जिम्मेदार विकास दुबे

आखिर कब्जे में आ ही गया पुलिसकर्मियों की शहादत का जिम्मेदार विकास दुबे

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय राजनीति की जड़ें कितनी गहरी हैं यह बात आज फिर एक बार साबित हो गई जब आठ पुलिसकर्मियों की शहादत के जिम्मेदार माने जाने वाले विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बाबा महाकालेश्वर मंदिर से कथित तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया। विकास दुबे की गिरफ्तारी चीख चीख कर बता रही है कि यह गिरफ्तारी नहीं है बल्कि सुनियोजित ढंग से लिखी गई पटकथा के अनुसार कुख्यात विकास दुबे को बचाकर पुलिस के ही सुरक्षित हाथों में पहुंचा दिया गया है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में ब्राह्मण राजनीति का लंबे समय से दबदबा रहा है। जिस नेता ने भी ब्राह्मण राजनीति से टकराने का प्रयास किया है उसे मुंह की खानी पड़ी है। विकास दुबे के मामले में भी मुठभेड़ की रात के बाद से ही यह बात राजनीतिक क्षेत्रों में चल रही थी कि आठ पुलिसकर्मियों की शहादत पर जातीय राजनीति एक बार फिर भारी पड़ सकती है। ऐसा ही हुआ भी। कोरोना काल में जब 8:00 बजे ही पूरे देश में रात्रि कर्फ्यू लागू हो जाता है तब 500000 का इनामी विकास दुबे किस तरह खुले तौर पर दनदनाता रहा। उत्तर प्रदेश पुलिस का पूरा अमला विकास दुबे को गिरफ्तार करने के लिए लगा हुआ था। जहां भी विकास दुबे द्वारा सरेंडर करने या उसके छिपे होने की थोड़ी भी संभावना थी उस सब जगह को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। उत्तर प्रदेश पुलिस की सारी कवायद तब बेकार साबित हुई जब विकास दुबे ने फिल्मी अंदाज में महाकालेश्वर मंदिर में जाकर अपने आप को गिरफ्तार करा दिया। विकास दुबे को पुलिस मुठभेड़ में ना मार सके इस बात का पूरा प्रबंध पहले ही कर दिया गया था। कथित गिरफ्तारी के तुरंत बाद मीडिया को सारी बात बताया जाना इस बात का बड़ा सबूत है। मध्य प्रदेश पुलिस न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद विकास दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले करेगी। न्यायिक प्रक्रिया के बीच में आने के बाद किसी भी तरह की मुठभेड़ से बचने का पूरा प्रबंध विकास दुबे और उसके हमदर्द लोगों द्वारा कर दिया गया है। विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद खादी और खाकी का असली खेल शुरू होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली तैयारी इस बात की की जा रही है कि यह साबित कर दिया जाए कि मुठभेड़ की रात विकास दुबे मुठभेड़ स्थल पर था ही नहीं। ऐसा हो जाता है तो यह उत्तर प्रदेश पुलिस की बड़ी हार और प्रदेश में गहरे तक पैठी जातीय राजनीति की जीत होगी। विकास दुबे की कथित गिरफ्तारी से पूर्व अब तक उसके 5 साथी उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। यह सभी लोग वे थे जो किसी भी दबाव में आकर विकास दुबे के खिलाफ मुंह खोल सकते थे। मुठभेड़ में मार कर इन सभी का मुंह बंद कर दिया गया है। विकास दुबे के करीबी साथियों के खत्म होने के बाद ही वह सामने आया। आने वाले कुछ दिन प्रदेश की राजनीति और अफसरशाही में काफी गर्माहट वाले होंगे। असली परीक्षा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की है जिन्होंने प्रदेश की सत्ता संभालने के साथ कहा था कि उनका उद्देश्य प्रदेश को अपराधी मुक्त करना है। अपराधी प्रदेश छोड़ कर भाग जाएंगे वरना उन्हें खत्म कर दिया जाएगा। विकास दुबे का क्या होगा यह मुख्यमंत्री योगी के लिए परीक्षा की घड़ी है। आने वाले समय में राजनीति का पहिया तेजी के साथ घूमेगा जो तय करेगा कि विकास दुबे का भविष्य क्या होना है।

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