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‘दुनिया में कितना गम है… मेरा गम उतना कम है’

'दुनिया में कितना गम है... मेरा गम उतना कम है'

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ज़ब से कोरोना ने भारत में दस्तक दी, ज़ब पूरा देश थम गया था, ज़ब से हर सड़क सुनसान हो गयी थी तभी से हम रोज़ाना दफ़्तर पहुंच कर कोरोना से जुड़ी खबरें आप तक पहुंचाते रहे। ज़ब गाड़ी से दफ़्तर के लिए निकलता था तो सोसाइटी के गार्ड पहचानने लगे थे मुस्कुरा जाते थे देख कर कि मीडिया वाले हैं काम से जा रहे हैं। पर आज कुछ अलग था 108 से कॉल आया कहा कुछ कपड़े रख लीजिये और चार्जर, आधार कार्ड याद से गेट no. 2 पर आ जाइये। टेस्ट कराने के बाद 2 दिन वैसे ही तनाव में बीतते हैं। फिर ज़ब आपको फ़ोन पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जानकारी दी जाती है कि आप पॉजिटिव हैं तो दिमाग में बहुत कुछ चलने लगता है। फिर एम्बुलेंस ज़ब सोसाइटी में आती है और  आस-पास के लोग और गार्ड्स जिस तरह से आपको देखते हैं वो रोज़ वाला नहीं होता। कुछ सहानुभूति के साथ तो कुछ ऐसे देखते हैं जैसे खूंखार अपराधी हो। मोबाइल निकाल कर वीडियो बनाए जाते हैं। खैर एम्बुलेंस का दरवाजा बन्द होता है और सायरन बजाते हुए वो हॉस्पिटल के लिए निकल पड़ती है सफ़र के दौरान भी दिमाग़ में काफ़ी कुछ चलता है। पर यकीन मानिये अस्पताल पहुंचते ही मुझे एक गाना याद आता है।

दुनिया में कितना गम है मेरा गम उतना कम है’

वाकई यहां डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ को देखकर में हैरान हो गया। हम लोग AC में बैठ कर आराम से काम कर रहे हैं और मेडिकल  के यह लोग यहाँ पी पी ई  किट पहन कर घंटों काम करते हैं। मेरे सामने ही कुछ लोगों को चक्कर आते हैं पर 2 मिनट दीवार से टिक कर लम्बी सांस लेने के बाद फिर मरीज़ों की सेवा में लग जाते हैं। हॉस्पिटल की टैग लाइन एकदम सटीक है ‘मधुर व्यवहार कुशल उपचार’। बाकि साथ में कुछ मस्त हम उम्र दोस्त भी बन गए हैं। महफ़िल जमती हैं हंसी ठहाके लगते हैं जिस में डॉक्टर्स और वार्ड बॉय भी शामिल होते हैं। सच कहूं तो मस्त माहौल जमा है बिल्कुल बोले तो फन्नेखां ।

कोरोना  ने  हमारे  देश  से   गलत पंगा ले लिया

मगर आप घर पर रहिये.

सुरक्षित रहिये  जरूरी काम हो तभी निकले  और दो ग़ज़ की दूरी बना कर रहे मुँह पर मास्क लगा कर रखे । हाथों को बार बार साबुन से धोये ।

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