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जब मौत देखकर जीवन के लिए गिड़गिड़ाया ,मौत का सौदागर

जब मौत देखकर जीवन के लिए गिड़गिड़ाया ,मौत का सौदागर

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जिस युवक ने अपराध की दुनिया का सिरमौर बनने के लिए एक दबंग नेता की सैकड़ों लोगों के सामने सरेआम नेशंस हत्या कर दी हो। जिसने विधानसभा से मात्र 200 मीटर दूर AK47 का इस्तेमाल कर 100 से ज्यादा गोलियां चलाई हो। जिस अपराधी ने 90 के दशक में दो करोड़ की फिरौती वसूल ली हो। जिसने तथाकथित रूप से एक मुख्यमंत्री की 5 करोड़ मे सुपारी ले ली हो। जिस के खात्मे के लिए उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाता हो। क्या आप मान सकते हैं कि ऐसा अपराधी अपनी जान की भीख मांगने के लिए घुटनों पर बैठ जाए और रहम की भीख मांगे….

शायद आप कहेंगे ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन यह सत्य है। मुख्यमंत्री की सुपारी लेने की बात सुनकर आप समझ गए होंगे कि हम बात कर रहे हैं 90 के दशक के सबसे बड़े अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ल की। 22 सितंबर वर्ष 1998 को गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र में स्पेशल टास्क फोर्स और श्रीप्रकाश शुक्ला के बीच मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ का नेतृत्व एसटीएफ प्रभारी अरुण कुमार कर रहे थे इसमें राजेश पांडे भी अपनी टीम के साथ शामिल थे। बीबीसी दिल्ली पर रेहान फजल ने श्रीप्रकाश शुक्ला को लेकर एक स्टोरी की जिसमें तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अजय राज शर्मा अरुण कुमार और राजेश पांडे ने श्रीप्रकाश शुक्ला के अपराधिक जीवन की शुरुआत से लेकर उसकी मौत तक की सच्चाई सामने रखी थी। राजेश पांडे बताते हैं एनकाउंटर के दौरान श्रीप्रकाश शुक्ला गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम क्षेत्र में कौशांबी के पास एक जंगल में गिरने के बाद अपनी नीले रंग की सिएलो कार से निकलकर भागने लगा। भागते समय वह लगातार गोली चला रहा था पीछे से पुलिस भी गोली चला रही थी। उस दिन एक ही बात अच्छी थी कि शुक्ला के पास एके-47 नहीं थी। राजेश पांडे बताते हैं कि जब गोली लगने के बाद वह गिर गया तो पुलिस के सामने गिड़गिड़ा ने लगा रहम की भीख मांगने लगा और बार-बार कह रहा था कि उसे ना मारे। पुलिस भी उसको जिंदा पकड़ना चाहती थी लेकिन गाड़ी रुकने से बाहर निकलने तक और फिर भागने तक उसको कई गोली लग चुकी थी जिससे उसकी मौत हो गई थी।

अगले भाग में हम बताएंगे कि कैसे एक पहलवान यूपी का सबसे बड़ा अपराधी बन गया

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