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दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे के प्रभावित किसानो की लडाई में कूद कर नई राजनीती की पट कथा लिख दी रावण ने!

दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे के प्रभावित किसानो की लडाई में कूद कर नई राजनीती की पट कथा लिख दी रावण ने!

11 जून को दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे के किसानो की मांग के समर्थन में आए भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद रावण हालांकि मेरठ के शोलाना और मोदीनगर क्षेत्र के मुरादाबाद गाव में पुलिस और शासन की बन्दिशो की वजह से पहुंच नही पाए लेकिन जिस जूनून के साथ उन्होने देश भर के किसानो और मजदूरों का मुद्दा उठाया उससे किसानो,मजदूरों और नौजवानो में एक नई चेतना, जोश और क्रांती का आगाज हुआ है। महज दो घन्टे की हुकुमत के इशारे पर हुई पुलिसिया बन्दिश ने चौराहे पर खडी किसानो,गरीबो और नौजवानो की सियासत को नई दिशा दे दी। हालांकि दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे नाम का हाई वे वैस्ट यूपी, उत्तराखंड और हरियाणा के कुछ हिस्सों का दिल्ली पहुंचने वालो के लिये लाइफ लाईन सरीखा है लेकिन फ़िर भी देश में और भी गम्भीर मसले हैं। यूं चन्द्रशेखर हर मसले पर ट्वीट,बयान और खुद को हाजिर करके मुखर रहते हैं लेकिन दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे के महज 26 गावों के किसानों और भूमिहीन एस सी,एस टी और मुस्लिम लोगो के अधिकारों को लेकर जो मुखरता उन्होने दिखाई वह काबिले गौर है। कोरोना महामारी के दौर में किसानो और मजदूरों के हक के लिये वो जिस जोश खरोश के साथ निकले और मेरठ गाजियाबाद के 26 गावों के लोगों की आवाज को राष्ट्रीय पटल पर दस्तक दिलाई उससे चौराहे पर खडी किसानो और मजदूरों की आवाज को नई चेतना मिली है।
ना जाने इस आन्दोलन में कूदने की चन्द्रशेखर ने क्या सोच कर प्लानिंग की लेकिन उनके नए सिपहसलार बने किसान राजनीती के लडाकू बसपा छोडकर शेखर के साथ आए सत्यपाल चौधरी की सलाह पर यकीनन उन्होने भरोसा किया। तभी वैस्ट यूपी का ये हाई लाईट मुद्दा उन्होने भुना डाला। अनियमितता को लेकर सी बी आई केस बन चुका दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे ना जाने क्यूं किसान संगठनो, वैस्ट यूपी के प्रमुख दल रालोद, राजनितिक जगह तलाश रही यूपी कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी की नजर में अनदेखा रह गया। उत्तर प्रदेश सरकार के दो आई ए एस अफ़सर, एक पीसीएस अधिकारी और बाबू इस हाई वे में नप चुके हैं। जमीनी राजनीती की नब्ज यही है कि नेता मौलिक समस्याओ की समझ रखे। रावण ने 11 जून को बारास्ते दिल्ली मुराद नगर की गंग नहर पर पुलिसिया बन्दिश में जो इस मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर उठाया, अच्छे अच्छे राजनीतिक विश्लेषक उस पर माथा पच्ची कर रहे हैं। किसान राजनीती और सर छोटूराम के मंडी फंडि वाले नारे को जिस अंदाज में इस नौजवान नेता ने उठाया उसकी चर्चा गाव के गली,मोहल्ले और चौपाल पर हो रही है। मुद्दों पर समर्थन का बयान और ट्वीट करने के राजनीतिक फेशन के दौर मे सडक पर उतर कर चन्द्रशेखर ने जो कवायद की है पूरे वैस्ट यूपी मे तो उस कवायद की चर्चा गर्म है। इस रिपोर्टर ने गावों में किसानो,गरीबो और नौजवानो को ये कहता सुना है कि अजी रावण हटने वाला थोडी है, जहाँ जाता है हाई अलर्ट खुद हो जाता है। इन चर्चाओ से लगता है चन्द्रशेखर भविष्य की राजनीती की पट कथा लिखने की और है। उसकी उपस्थिति से लोगो मे खासकर नौजवानो में जोश उमडता है, संघर्ष में भिड्ने, पीछे ना हटने और जेल मुकदमो का खौफ ना होने ने शेखर को राजनीती को नई दिशा देने का हीरो बना दिया है।

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