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सरकार के खोकले दावों की पोल खोलती ये घटना

सरकार के खोकले दावों की पोल खोलती ये घटना

इन दिनों भारत सहित देश भर में कोरोना जैसी महामारी की मार है ऐसे में सरकार रोज़ नए पैंतरे का हवाला देकर इस बीमारी से बचने और रोकने का तरीका बता रही है उसके बावजूद अभी तक इस बीमारी पर किसी भी तरह का कंट्रोल नही हो पाया है बढ़ते दिनों के साथ रोज़ इस बीमारी से ग्रसित लोगो की संख्या में इज़ाफ़ा देखने को मिल रहा है।
इस बीमारी के चलते जहाँ डॉक्टर्स को कोरोना योद्धा कहा जा रहा है वही दूसरी और इनका दूसरा चेहरा भी है जो प्रशासन और आलाधिकारियों के मुँह पर तमाचा है क्योंकि आज की ये खबर आपकी आँखों को नम करने की ताकत रखती है
एनसीआर में आने वाले प्रमुख शहरों में से एक नोएडा से एक बड़ी खबर सामने आई है जिसे पढ़ या सुनकर आपकी रूह काँप जाएगी यहां एक 8 महीने की गर्भवती महिला ब्‍लड प्रेशर बढ़ने के चलते सांस लेने में कठिनाई की शिकायत हुई, इसके बाद उनको इलाज के लिए अस्‍पताल ले जाया गया, एक या दो नहीं बल्कि 8 अस्‍पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया, परिजनों के अनुसार, जब नीलम की तबीयत बिगड़ी तो उनके पति सुबह 6 बजे उन्‍‍हें लेकर अस्पताल के लिए घर से निकल गए. इस दौरान उन्होंने 12 घंटे तक कई अस्पतालों का चक्कर काटा पर किसी ने नीलम को एडमिट नहीं किया, पीड़ित परिवार के मुताबिक, वे लोग 12 घंटे के अंदर नीलम को लेकर नोएडा के शारदा हॉस्पिटल, ईएसआई हॉस्पिटल, जिला अस्पताल, जिम्स, नोएडा फोर्टिस अस्पताल, वैशाली मैक्स हॉस्पिटल और शिवालिक हॉस्पिटल में इलाज के लिए गए लेकिन, इन सभी अस्पतालों ने महिला को एडमिट करने से मना कर दिया ऐसे में समय पर इलाज न मिलने पर शाम को महिला की एम्बुलेंस में ही मौत हो गई.

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