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मोदी सरकार 2 का पहला वर्ष निराशाजनक, घातक और त्राहि त्राहि वाला था।

मोदी सरकार 2 का पहला वर्ष निराशाजनक, घातक और त्राहि त्राहि वाला था।

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वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सैयद क़ासिम रसूल इलियास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि मोदी सरकार2 का पहला साल बहुत ही निराशाजनक, समस्याओं, अव्यवस्थाओं, अत्याचार, हिंसा, शोषण, अराजकता और तानाशाही पर आधारित रहा।
मोदी जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए पहले सत्र में जहां न्यायालय, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, सीबीआई, सेंट्रल विजिलेंस कमीशन और केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता को खत्म कर दिया ।
वहीं दूसरे सत्र का आरंभ भी बड़े ढिठाई और अहंकार के साथ मुस्लिम समाज के विरुद्ध अपने सांप्रदायिक एजेंडे की शुरुआत से किया जिसमें संवैधानिक मर्यादा को तार तार कर दिया।
इस सत्र में संसद से जो भी कानून पास हुए वह तानाशाही और अहंकार की जीती जागती मिसाल हैं।
तीन तलाक़ क़ानून के द्वारा मुस्लिम महिलाओं के साथ एक भद्दा और अमानवीय मज़ाक कर पारिवारिक सामंजस्य पर हमला और शरीयत के क़ानून से छेड़छाड़ की गई।
फिर धारा 370 को रद्द कर जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीन कर उसे केंद्र शासित राज्य बना दिया गया और फिर राज्य के निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को बंदी बना कर कश्मीर की जनता के साथ धोखा किया और ऊपर से एक लंबे समय तक कश्मीरियों को टेलीफोन, इंटरनेट की सुविधाओं से भी दूर रखकर उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया गया।
इसके बाद सरकार ने आतंकवाद से संबंधित क़ानून यूएपीए में संशोधन करके उसे और क्रूर बना दिया इसी के साथ सरकार ने आरटीआई कानून को भी कमज़ोर कर दिया।
न्यायिक मामलों में बार-बार हस्तक्षेप करके उसकी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को प्रभावित किया गया। इसी प्रकार प्रशासन और संसद को गरिमा रहित कर दिया गया। बड़े से बड़े फैसले बिना किसी बहस और वार्तालाप के केवल संसद में बहुमत होने के बलबूते पर ले लिए गए।
दूसरी ओर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया सरकार की कठपुतली बन गया है।
यही कारण है कि संस्थानों के लोकतांत्रिक अधिकार की अवहेलना पर न कोई प्रश्न कर सकता है और ना ही कोई हिसाब ले सकता है।
वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुसार अयोध्या मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सरकार के आंतरिक हस्तक्षेप का शिकार रहा वरना फ़ैसला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होता।
डॉक्टर इलियास ने आगे कहा कि मोदी सरकार के द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम में भी धर्म के आधार पर भेद-भाव किया गया ताकि समाज को बांट कर अपने सांप्रदायिक एजेंडे को पूरा किया जा सके जिस पर देशव्यापी आंदोलनों ने जब सरकार की नींद हराम कर दी तो लोगों का ध्यान हटाने और आतंक पैदा करने के लिए पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे करा कर खूनी खेल खेला गया । पूरे इलाक़े को आग के हवाले कर दिया गया जिसमें 53 बेगुनाह मारे गए और सैकड़ों करोड़ की संपत्ति तबाह हो गई।
दिल्ली पुलिस के द्वारा बीजेपी के वह दंगाई जो दंगा भड़का रहे थे उन पर अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई इसके विपरीत नागरिक संशोधन क़ानून के विरुद्ध शान्ति पूर्ण प्रदर्शन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस की ओर से निशाना बनाया जा रहा है जबकि इस दंगे में लूटने पिटने और बर्बाद होने वालों में बड़ी संख्या मुसलमानों की ही है।
डॉक्टर इलियास के अनुसार केंद्र सरकार कोरोना वायरस की महामारी से निपटने और जनता को सुविधाएं पहुंचाने में भी पूरी तरह असफल रही है बिना सोचे समझे और बिना किसी तैयारीे के लगाए गए लाक डाउन ने प्रवासी मजदूरों और ग़रीबों को बड़ी मुश्किल में डाल दिया । ग़रीब मज़दूरों की समस्याएं उस समय बहुत बढ़ गई जब भूख और ग़रीबी से मजबूर होकर उन्होंने अपने घर वापस जाने का फ़ैसला किया । बहुत सारे लोगों ने भूख और प्यास से रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
डॉ इल्यास ने आगे कहा कि पहले ही से प्रभावित देश की अर्थव्यवस्था लंबे लाक डाउन को सहन न कर सकी और देश का जीडीपी पूरी तरह लड़खड़ा गया । जिसने महंगाई और बेरोज़गारी में वृद्धि कर दी । बाज़ार में एक ओर वस्तुओं की मांग घट गई तो दूसरी ओर जनता की जेब भी ख़ाली है और सरकार के पास जुमलों और लफ्फ़ाज़ियों के अलावा कुछ और नहीं है।
डॉक्टर इलियास के अनुसार मोदी सरकार2 हर मोर्चे पर विफल रही और उसने पूरे देश को तबाही, बेरोज़गारी, भुखमरी, ग़रीबी और बेबसी के हवाले कर के भारत की असहिष्णुता वाली तस्वीर दुनिया के सामने पेश की है।

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