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हिंदी पत्रकारिता दिवस पर भूली बिसरी यादें

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर भूली बिसरी यादें

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मेरा मानना है बुराई और विषमताओं के विरूद्ध जिनमें हौसला हो , वही कलम की ताकत का सही हकदार है।  हमारे जमाने में पत्रकारिता आज की तरह से आसान नहीं थी। अपना साप्ताहिक अखबार था।दिन भर जो देखा और सुना, रात में बैठकर लिखते थे, फिर छपने देते थे। जी टी रोड स्थित डाक बंगले में पत्रकार वार्ता होती थी।  गाजियाबाद जिला बन गया उसके बाद भी मंत्रियों की प्रेस वार्ता वहीं  होती रही। जिला प्रशासन की पत्रकार वार्ता पहले गांधी नगर के सिविल डिफेंस कार्यालय में हुई। फिर जब कविनगर की जीडीए मार्किट में डीएम  कार्यालय  बना तो  वहां होती थी।  राजनगर में वर्तमान कलक्टे्ट बन गयी तब से वहां होती है। मेरे पत्रकारिता समय की शुरुआत में राष्ट्रीय दैनिक के संवाददाता  खबर लिख कर डाक से भेजते थे। प्रमुख ख़बरें  किसी बड़े नेता या मंत्री की पत्रकार वार्ता या कवरेज तार से संक्षिप्त शब्दों में भेज सकते थे।तब फोन गिने-चुने सम्पन्न परिवारों में थे। परन्तु फोन से  या दिल्ली समीप है तो अखबार के दफ्तर में जाकर खबर देने की इजाजत नहीं थी। संवाददाता के भेजने के कई दिन बाद खबर छपती थी,वह भी छोटी सी। कारण तब राष्ट्रीय दैनिक के मात्र दो ही संस्करण होते थे।दूसरा संस्करण डाक संस्करण होता था जो पूरे देश की खबरों के साथ एकसा होता था।
राष्ट्रीय समाचार पत्र के संवाददाता अधिकतर अपना साप्ताहिक निकालते थे। टीवी था नहीं। पहली बार प्रगति मैदान में लगे एशिया-72 मेले में पिताजी के साथ देखा।  रेडियो पर आकाशवाणी और बीबीसी  ही खबरों के माध्यम थे।मैं बहुत भाग्यशाली रहा कि मुझे इस महानगर के पहले पत्रकार  स्व. चन्द्र भान गर्ग का सानिध्य मिला। जब तक वह रहे उनका और मेरा नाम एक ही विजिटिंग कार्ड पर होता था। गाज़ियाबाद जिला बनने के बाद सबसे पहले जिले स्तर की पत्रकार संघ  बनी तो वह अध्यक्ष और मैं महामंत्री बना।जिला बनने से पहले ही उनके साथ ‘मेरठ मंडलीय पत्रकार संघ ‘ के आयोजनों में मेरठ , मुजफ्फरनगर, बिजनौर,सहारनपुर,  हरिद्वार तक जाना रहा।  वहां वरिष्ठ पत्रकारों को सुनने और पत्रकारिता के कर्तव्यों और आदर्शो को समझने का मौका मिला। वरिष्ठ पत्रकार चिरंजी लाल पाराशर , योगेन्द्र पाल बागी, हापुड़ से वरिष्ठ पत्रकार मधु सुदन दयाल सम्पादक व कैलाश आजाद,मोदीनगर से  वरिष्ठ पत्रकार ब्रह्मानंद पंत  हमारे साथ होते थे।मेरे पिताजी श्रद्धेय श्याम सुन्दर वैद्य (1911-1984) जो तडक वैद्य के नाम से मशहूर थे।जब मेरा जन्म ( 1951) हुआ तब वैद्यक करते थे। घर पर ही दवायें व आसव बना कर अपना बैग तैयार कर गांव दर गांव पैदल जाया करते थे।इसी दरम्यान वह दवा व आसव बनाने के लिए जड़ी-बूटी इकट्ठा करते थे।तब यातायात के साधन भी नहीं थे। इक्का-दुक्का  टे्न होती थी उनकी छत भी भरी रहती थी। बसें भी बहुत बाद में चली वह भी ऐसी ही स्थिति में थी। बैल-ठेला या तांगा होते थे । जिनकी सवारी सम्पन्न लोग कर पाते थे। पिता जी स्वतंत्रता आन्दोलन में कई बार जेल गए।अनेक भूख हड़ताल भी की ।लेकिन स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी पेंशन नहीं ली।
एक बार गम्भीर बीमार पड़ गये।जब ठीक हुए तो  कमजोरी की वजह से दवायें बनाना और फिर पैदल गांव दर गांव जाना सम्भव नहीं था।उनके मित्र वकील शिवराज सिंह त्यागी ने उन्हें अखबार निकालने की सलाह दी।1961 में उन्होंने ‘युग करवट’ साप्ताहिक अखबार  की शुरुआत की ।तब राष्ट्रीय दैनिक अखबार भी गिने चुने  थे। तब गाजियाबाद मेरठ जिले की तहसील थी।स्थानिय दैनिक  अखबार जिला मेरठ में तो थे। दैनिक प्रभात  व दैनिक हिन्दू के सम्पादक सुबोध विनोद व महावीर शशि से मैं भी मिला हूं।उस जमाने में अखबार का नाम शिमला (हिमाचल प्रदेश) से मिलता था। आवेदन और आदेश पोस्ट कार्ड पर ही होते थे।
छपाई की प्रेस गिनती की वह भी घरों में थीं। एक- एक अक्षर जोड़ कर पेज बनता था और उसे ऐसे ही खानों में डिस्ट्रिब्यूट कर फिर पेज बन पाता था। यदि छपाई के दौरान पेज टूट गया तो  वह टाइप पाई(दुबारा गलाकर नया टाइप बनाने के काम का) हो जाता था। कागज की कोई दुकान तो मेरी पत्रकारिता की शुरुआत (1973) में भी नहीं थी। प्रेस की मशीन का हेल्पर साईकिल से  दिल्ली से  कागज लाने का काम करते थे। मैं पिताजी के साथ अखबार का कागज लेने रेल से दिल्ली जाता था।चावड़ी बाजार और नई सड़क बहुत बार गया हूं ,वहां से पैदल-पैदल कंधे पर रखकर  दिल्ली स्टेशन तक और इसी तरह गाजियाबाद स्टेशन पर उतर कर कंधे पर डाल कर कागज का बंडल लाते थे। मुझे आज भी याद है तब न्यूज़ प्रिंट का रिम मात्र 26/- का था। अखबार की छपाई भी10/– से 15/- पेज होती थी। वह भी  नियमित नहीं हो पाती थी। गणतंत्र दिवस,  होली,स्वाधीनता दिवस, गांधी जयंती व दीपावली पर जो विशेषांक होते थे, उनसे भरपाई हो पाती थी।  2 नये पैसे के टिकट से पूरे हिंदुस्तान में  अखबार चला जाता था।नई बस्ती में दिल्ली पेपर मार्ट के नाम से पहली दुकान एक दिल्ली के ही व्यापारी ने खोली थी। कोई फोटो छापने के लिए पहले दिल्ली ब्लाक बनाने देने जाना पड़ता था फिर बन जाने पर लेने जाना पड़ता था। गाजियाबाद जिला बनने के कई वर्ष बाद अम्बेडकर रोड पर एक ब्लाक बनाने वाले ‘हिंद ब्लाक वर्क्स’ खुली थी। जब रेलवे रोड के सामने पालिका बाजार बन गया तो कम्पोजिंग का टाइप भी गाजियाबाद में मिलने लगा था। गाजियाबाद से  विजय सेखरी का अंग्रेजी साप्ताहिक हिंट और तेलूराम कांबोज का हिंदी साप्ताहिक प्रलयंकर भी एक-दो वर्ष के अंतराल में शुरू हो गये थे। यही तीनों अखबार नियमित रहे। जब 1976 में गाजियाबाद जिला बना तो  उस समय हमारा अखबार जनपद का (जिसमें तब हापुड़ व नोएडा भी शामिल था) शासकीय विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त एकमात्र अखबार था जो केन्द्र और प्रदेश दोनों से स्वीकृत था। जब हिंडन हवाई अड्डा बना तो सीपीडब्ल्यूडी के टेंडर  राष्ट्रीय दैनिक के साथ हमारे अखबार में भी  छपते थे। इस जिले के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की वरियता सूची में भी सर्व प्रथम मेरा नाम था। सू वि की संतोष यादव के जिलाधिकारी काल में प्रकाशित पुस्तक में यह दर्ज है। उसके बाद सू वि की पुस्तिका प्रकाशित होनी ही  बंद हो गयी है।गाजियाबाद जनपद के युवा पत्रकारों को  शायद यह भी मालूम न हो कि इस जनपद के पहले पत्रकार कौन थे। 1936 में  गाजियाबाद के  पहले पत्रकार चन्द्र भान गर्ग (सर्राफ) थे। वह उस समय  दैनिक समाचार-पत्र हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स व उर्दू के मिलाप, प्रताप व तेज के भी संवाददाता थे। उनके भाई सूरज भान गर्ग ( जो सुल्लामल रामलीला कमेटी के संस्थापक उस्तादों में थे) भी अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स सहित सात अन्य अंग्रेजी अखबारों के संवाददाता रहे। चन्द्र भान गर्ग जी के सुपुत्र विधान चन्द्र गर्ग भी अपने पिता के निधन के बाद  1981से1995 तक दैनिक हिन्दुस्तान के संवाददाता रहे। इसी परिवार की तीसरी पीढ़ी संदीप गर्ग  भी दैनिक पंजाब केसरी के ब्यूरो चीफ रहे। गाजियाबाद का पेज बनाकर भेजने की उन्होंने ही शुरूआत की। युवावस्था में ही इस प्रतिभावान पत्रकार का निधन हो गया।एक और पत्रकार परिवार की गाजियाबाद में उल्लेखनिय भूमिका रही है। दैनिक नवभारत टाइम्स के ब्यूरो चीफ रहे राकेश पाराशर 1971 से पत्रकारिता में हैं। उनके चाचा फतह चन्द्र आराधक  नवभारत टाइम्स में समाचार सम्पादक रहे। राकेश पाराशर जी के पिता वरिष्ठ पत्रकार चिरंजी लाल पाराशर जी भी पत्रकारिता में चन्द्र भान गर्ग जी के समकालीन थे । वह भी दैनिक नवभारत टाइम्स के दिल्ली आफिस में रहें थे। राकेश पाराशर जी के छोटे भाई राजेंद्र पाराशर भी दैनिक नवभारत टाइम्स के दिल्ली आफिस  में रहे। योगेन्द्र पाल बागी  भी चन्द्र भान गर्ग जी के समय में ही उर्दू का मिलाप और प्रताप देखने लगे थे। मेजर इकबाल सिंह अंग्रेजी इवनिंग न्यूज़ के संवाददाता थे। पिलखुवा के राधे श्याम शर्मा दैनिक हिन्दुस्तान के छायाकार थे। पिलखुवा के शिव कुमार गोयल दैनिक वीर अर्जुन के वरिष्ठ पत्रकार थे तथा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेई के साथ का दैनिक वीर अर्जुन में काम किया।बाद में वह हिंदुस्तान समाचार एजेंसी के समाचार सम्पादक पद पर रहे।दिग्गज पत्रकारों में शुमार कुलदीप तलवार एफसीआई में अधिकारी रहते हुए ब्लिट्ज के जमाने से पत्रकारिता कर रहे हैं। देश के मशहूर फिल्मी शायरो और बड़े-बडे हिंदी उर्दू साहित्यकारों  के अनेक संस्करण उन्हें आज भी याद हैं। पाकिस्तान के अंदरुनी हालात पर उनके लेख देश के अनेक हिंदी और उर्दू के राष्ट्रीय अखबारों में छपते रहते हैं। पत्रकार विनय संकोची दैनिक वीर अर्जुन में पत्रकारिता करते थे जब तेलूराम कांबोज जी ने अपना अखबार दैनिक किया तो शिव कुमार गोयल जी उन्हें गाजियाबाद लेकर आए और उन्होंने ही अखबार के समाचार सम्पादक का दायित्व संभाला।वह आज भी अपना चर्चित स्तंभ ‘कह संकोची सकुचाय’ लिख रहे हैं। यूएनआई के पहले संवाददाता सुभाष निगम थे,पीटीआई के हरि शंकर शर्मा थे। दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स के एम के मित्तल, दैनिक  टाइम्स आफ इंडिया के ललित कुमार, अंग्रेजी दैनिक पायनियर के एस पी सिंह तथा दैनिक जन सत्ता के पहले रिपोर्टर महादेव चौहान थे। जब गाजियाबाद में दैनिक जागरण, दैनिक अमर उजाला और दैनिक राष्ट्रीय सहारा के ब्यूरो कार्यालय खुले और इनमें पत्रकारों  की भर्ती हुई । इन अखबारों में गाजियाबाद का परिशिष्ट छपने लगा अब तो इन अखबारों के संस्करण आ रहे हैं। अब हिंडन पार भी  सभी अखबारों के ब्यूरो कार्यालय हैं, वहां के संस्करण अलग है।राज कौशिक दैनिक अमर उजाला के पहले ब्यूरो प्रमुख रहे। वह दैनिक जागरण में भी ब्यूरो चीफ रहे। दैनिक जागरण में अरूण कानपुरी ब्यूरो चीफ थे।इस अखबार का सर्कुलेशन सर्वाधिक हो गया था। जो अभी तक बरकरार है। दैनिक जागरण में रहें गगन सेठी आजतक चैनल में वरिष्ठ पद पर हैं। संजय श्रीवास्तव वर्तमान में दैनिक नवभारत टाइम्स के ब्यूरो चीफ हैं। गाजियाबाद के पार्षद राजीव शर्मा भी दैनिक जागरण के संवाददाता रहे हैं। दैनिक राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ रहे विध्या शंकर तिवारी, प्रमोद शर्मा राष्ट्रीय चैनलों में वरिष्ठ पदों पर हैं। अशोक निर्वाण पहले दैनिक भास्कर और अब दैनिक पायनियर में वरिष्ठ पद पर हैं। दैनिक हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ रहे रवि अरोड़ा दैनिक टि्ब्यून सहित कई अखबारों के वरिष्ठ पदों पर रहे। विभू मिश्रा दैनिक पायनियर हिंदी के संवाददाता हैं। कभी गाजियाबाद में  प्रमुख पत्रकारो में शुमार रहे  शोभा राम भाटी (दैनिक वर्तमान सत्ता)और राम पाल रघुवंशी (दैनिकचेतना मंच)अब जिला गौतमबुद्धनगर के वरिष्ठ पत्रकार हैं। हेमन्त त्यागी, राकेश शर्मा,मनोज शर्मा,अजय औदिच्य, अशोक ओझा , एस पी चौहान,अरविंद मोहन शर्मा,हरीश चावला आदि पुराने साथी आज भी सक्रिय पत्रकरिता में है।वर्तमान में गाजियाबाद से दैनिक युग करवट, दैनिक करंट क्राइम, दैनिक हिंद आत्मा, दैनिक आप अभीतक, दैनिक मनस्वी वाणी, दैनिक एकता ज्योति, दैनिक जन सागर टुडे, दैनिक वेलकम टाइम्स आदि अखबार नियमित निकल रहे हैं।

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