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पीएम किसान मानधन योजना समेत किसानों, श्रमिकों और व्यापारियों के लिए शुरू हुई तीन पेंशन योजनाओं से काफी कम संख्या में लोग जुड़े

पीएम किसान मानधन योजना समेत किसानों, श्रमिकों और व्यापारियों के लिए शुरू हुई तीन पेंशन योजनाओं से काफी कम संख्या में लोग जुड़े

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बीते साल मोदी सरकार की ओर से तीन पेंशन योजनाएं एक साथ लॉन्च की गई थीं। एक स्कीम श्रमिकों के लिए थी, एक किसानों के लिए और एक देश के छोटे कारोबारियों के लिए लॉन्च की गई थी। श्रमयोगी मानधन योजना के तहत मजदूरों को रिटायरमेंट की उम्र के बाद 3,000 रुपये की पेंशन दी जाती है। इसी तरह से पीएम किसान मानधन योजना और पीएम व्यापारी मानधन योजना के तहत भी 60 वर्ष की आयु के बाद 3,000 रुपये मासिक पेंशन का ऑफर मिलता है। हालांकि इन तीनों ही स्कीमों में श्रमिकों, किसानों और व्यापारियों का कोई उत्साह देखने को नहीं मिला है।

देश के सबसे निचले तबके श्रमिकों के लिए शुरू हुई श्रम योगी मानधन योजना के तहत अब तक 43.88 हजार पंजीकरण हो चुके हैं। इस स्कीम से 10 करोड़ मजदूरों को अगले 5 साल में जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। टारगेट को देखते हुए सिर्फ इतने ही लोगों का जुड़ना बताता है कि योजना को श्रमिकों के बीच भाव नहीं मिल रहा है। सबसे खराब स्थिति कर्मयोगी मानधन योजना की है, जिससे अब तक महज 39,072 कारोबारी ही जुड़े हैं। सरकार के टारगेट को देखते हुए स्कीम के लिए 40,000 से भी कम पंजीकरण होना यह साबित करता है कि योजना को व्यापारियों के बीच भाव नहीं मिल रहा है। सरकार ने इस स्कीम से देश के 3 करोड़ रिटेल कारोबारियों और दुकानदारों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया था।

केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में श्रम योगी मानधन योजना के लिए 500 करोड़ रुपये के बजट का आवंटन किया था, जबकि कर्म योगी मानधन योजना के तहत 180 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। व्यापारियों के लिए शुरू हुई इस स्कीम के तहत ऐसे लोगों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गय़ा था, जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से कम हो। इन दोनों ही स्कीमों के तहत कारोबारियों और मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद 3,000 रुपये की पेंशन का ऑफर मिलता है। 18 से 40 वर्ष की आयु के मजदूर और कारोबारी इन योजनाओं को ले सकते हैं।

पीएम किसान मानधन योजना से अब तक महज 20 लाख किसान ही जुड़े हैं। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 9 करोड़ से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं। उस आंकड़े की इससे तुलना करें तो यह पता चलता है कि सरकार की इस पेंशन स्कीम से किसानों को बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं है।

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