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आगरा में इलाज का ‘लॉकडाउन’, 54 दिनों में 145 टीबी मरीजों ने दम तोड़ा

आगरा में इलाज का 'लॉकडाउन', 54 दिनों में 145 टीबी मरीजों ने दम तोड़ा

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ताजनगरी में 20 मार्च से 12 मई तक 54 दिनों में क्षय रोग (टीबी) के मरीजों में से 145 ने दम तोड़ दिया। इसकी वजह सही उपचार, परामर्श व समय पर दवाएं नहीं मिलना मानी जा रही है। लॉकडाउन से पहले 1 जनवरी से 19 मार्च तक आगरा में सिर्फ 27 टीबी रोगियों ने दम तोड़ा था। टीबी रोगियों के लिए बने राष्ट्रीय निश्चय पोर्टल की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है।

इस साल एक जनवरी से 12 मई तक इस पोर्टल पर आगरा में 5,817 टीबी मरीज पंजीकृत हुए। पांच माह बाद भी इनमें से 290 मरीजों का उपचार शुरू नहीं हो सका है। जिनका उपचार शुरू हुआ उनमें से 12 मई तक 507 मरीजों के परिणाम सामने आए हैं।

सिर्फ सात मरीज पूर्ण रूप से ठीक हुए। 507 में कुल 172 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 145 मरीज ऐसे हैं, जिनकी मौत लॉकडाउन के दौरान हुई। 27 मरीजों ने लॉकडाउन लागू होने से पहले 80 दिनों में दम तोड़ा। 123 मरीजों पर प्रथम श्रेणी टीबी दवाएं बेअसर हो गईं। अब इनका उपचार बदलकर बिगड़ी टीबी की दवाओं से किया जा रहा है।

वर्ष 2019 में आगरा में 21,577 टीबी रोगी पंजीकृत हुए। इनमें 4,325 मरीजों का इलाज चल रहा है। अभी तक 17,244 मरीजों के परिणाम आए हैं। 17,244 में से 841 की मौत हुई। 1909 पूर्ण रूप से ठीक हो गए। 12,335 मरीजों ने टीबी का कोर्स पूरा किया और 670 मरीजों पर दवाएं बेअसर होने के बाद इनके उपचार की श्रेणी बदली गई। 74 मरीजों पर उपचार कारगर नहीं रहा, 870 ने इलाज छोड़ दिया जबकि अन्य मरीजों के बारे में पूर्ण रिपोर्ट नहीं आई।

जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि इतनी मौतें होना गंभीर है। टीबी रोगियों को उपचार मिलेगा। दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। एडीएम सिटी से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।

जिला टीबी अधिकारी डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि टीबी रोगियों की इम्यूनिटी कम होती है। कोविड में पूरे स्टाफ की ड्यूटी लगी है। दवाएं तो पहुंचा रहे हैं लेकिन ओपीडी बंद हैं, इस कारण मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं।

 

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