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पांच राज्यों ने लॉकडाउन बढ़ाने के दिए सुझाव, कंटेनमेंट जोन को छोड़ बाकी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां होंगी तेज

पांच राज्यों ने लॉकडाउन बढ़ाने के दिए सुझाव, कंटेनमेंट जोन को छोड़ बाकी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां होंगी तेज

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कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन को हटाने के लिए जितनी आवाजें उठ रही हैं, उतनी ही आवाजें इसे एकमुश्त न हटाने को लेकर भी उठ रही हैं। बल्कि विपक्ष शासित कुछ राज्यों की ओर से तो इसे बढ़ाने का सुझाव दिया जा रहा है। आगे की राह को लेकर प्रधानमंत्री और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक में जिस तरह के विचार आए, उसे देखते हुए माना जा सकता है कि फिलहाल लॉकडाउन में राहत जरूर बढ़ाई जाएगी, लेकिन शर्तोँ के साथ।

ग्रीन के साथ साथ आरेंज और रेड जोन में भी थोड़ी और नरमी हो सकती है। यानी कंटेनमेंट क्षेत्र को छोड़कर बाकी में गतिविधि को थोड़ा और सामान्य बनाया जाएगा। औद्योगिक गतिविधि को तेज करने के लिए जरूर अतिरिक्त नरमी बरती जाए लेकिन जीवन अभी सामान्य नहीं होंगे। आवागमन, मनोरंजन, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में इंतजार करना पड़ेगा। लॉकडाउन 3 रविवार तक लागू है।

पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार की ओर से लगातार राहत बढाई जा रही है। दरअसल यह विचार अब हावी हो रहा है कि लंबे समय तक लॉकडाउन नहीं रखा जा सकता है। और इसीलिए आगामी सोमवार से बड़ी राहत देने का मन था, लेकिन सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सभी मुख्यमंत्रियों की लंबी चर्चा में बिहार, पंजाब, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने खुलकर लॉकडाउन बढ़ाने का सुझाव दिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि इसके बिना नहीं चल सकता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजनीति का भी सवाल उठाया लेकिन लॉकडाउन बढ़ाने की बात कही। तमिलनाडु ने भी रेल और हवाई सेवा से साफ मना कर दिया। राजस्थान की ओर से रेड जोन में पूरी पाबंदी का सुझाव आया।

वहीं प्रधानमंत्री ने अपने शुरूआती संबोधन में टीम वर्क पर जोर देते हुए कहा कि अब कोरोना के विस्तार का आकलन हो गया है। इसे एकजुट होकर ही हराना होगा। वहीं धीरे धीरे शुरू हो रही आर्थिक गतिविधियों को तेज भी करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सफलता के साथ नियंत्रित किया है और वैश्विक स्तर पर इसे सराहा भी जा रहा है। आगे की राह पर बढ़ते हुए भी इसका ध्यान रखना होगा कि कोरोना का विस्तार न हो। हमें जरूरी सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना ही होगा। दो सत्रों में चली बैठक में सभी मुख्यमंत्रियों को बोलने का अवसर दिया गया। अब तक ऐसी चार बैठकों में हर बार अलग-अलग सात आठ मुख्यमंत्रियों को ही बोलने का अवसर मिलता था।

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