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झारखंड : अपने कर्मचारियों को भी वेतन देने में सरकार के छूट रहे पसीने

झारखंड : अपने कर्मचारियों को भी वेतन देने में सरकार के छूट रहे पसीने

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हेमंत की केंद्र को धमकी और लाचारी शायद अब तक प्रदेश की जनता यह भलीभांति समझ चुकी होगी कि राज्य की वित्तीय खस्ताहाल है। जिस तरह नवनिर्वाचित हेमंत सोरेन सरकार ने पूर्व की सभी बड़ी परियोजनाओं के टेंडर रद किए हैं और स्पष्ट किया है कि तमाम गैर जरूरी योजनाएं बंद की जाएंगी, उससे यह स्पष्ट हो चुका है कि आने वाला समय चुनौतीपूर्ण होगा। खजाने की स्थिति यह है कि कर्मचारियों को वेतन देने में भी सरकार को पसीना छूट रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा, गठबंधन सरकार अपनी चुनावी घोषणाओं को अमल में कैसे लाएगी? क्योंकि झामुमो, कांग्रेस और राजद ने गरीबों, बेरोजगार युवाओं-युवतियों, मजदूरों और किसानों के लिए भारी-भरकम घोषणाएं कर रखी हैं।

नई सरकार अपने एजेंडे पर आगे बढ़ेगी और उसे इसका पूर्ण अधिकार भी है, क्योंकि जनता ने उसे इसके लिए जनादेश दिया है, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना भी सरकार की ही जिम्मेदारी है। हेमंत सोरेन कह रहे हैं कि वह जल्द ही वित्तीय स्थिति को दुरुस्त कर लेंगे, लेकिन अभी तक कोई रोडमैप सामने नहीं आया है।

पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के समय में कई बड़ी परियोजनाओं को गैर जरूरी बताकर उनके टेंडर रद कर दिए गए हैं। तमाम कांट्रेक्टर असमंजस में हैं, आगे क्या होगा? काम ठप होेने से रोजगार छिन रहे हैं। सरकार कह रही है कि जल्द ही हालात सुधरेंगे। नई योजनाएं आएंगी जो राज्य की जनता के जीवन स्तर को सुधारने के लिए ज्यादा कारगर होंगी। रोजगार भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री लगातार कह रहे हैं कि वह राज्य के लोगों को राज्य में ही रोजगार मुहैया कराएंगे। इसके लिए उनके पास तमाम नवोन्मेषी विचार हैं। जनता उम्मीद लगाए है।

इस बीच हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को धमकी दी है कि अगर खनन के लिए एक डिसमिल भी जमीन अधिग्रहित की जाती है तो किसान को नौकरी और मुआवजा हर हाल में देना होगा अन्यथा वह कोयला उत्पादन नहीं होने देंगे। वैसे यह नियम पहले से है और कोयला कंपनियां ऐसा दावा करती हैं कि वह मुआवजा व नौकरी देते हैं, लेकिन बाद में तमाम लोग फिर खनन क्षेत्र में बस जाते हैं। इससे विवाद पैदा होते हैं। सरकार इनसे कैसे निपटती है यह भी पता चलेगा। बेहतर होता, सरकार के पास अगर ऐसा कोई आंकड़ा है तो वह कोयला कंपनियों को देती और उन पर दबाव बनाती कि वे इन मामलों का निपटारा करें।

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