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गाजियाबाद में 42वें ‘कुल हिन्द मुशायरे’ का आयोजन

गाजियाबाद में 42वें 'कुल हिन्द मुशायरे' का आयोजन

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गाजियाबाद : बृहस्पतिवार की रात रामलीला मैदान, घण्टाघर में ‘अदबी संगम’ के तत्वावधान में गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में 42वें ‘कुल हिन्द मुशायरे’ का आयोजन किया गया। इस मुशायरे में करीब दो दर्जन प्रख्यात शायरों ने देशभक्ति, कौमी एकता और मौहब्बत से संबंधित गजलें सुनकर श्रोताओं को सुबह तीन बजे तक बाँधे रखा।

वारिस वारसी ने कौमी एकता और वतन परस्ती की मिसाल देते हुए अपनी गजल यूँ पेश की-
‘हजारों रंग के फूल हैं जिसे गुलदान कहते हैं,
मौहब्बत और प्यार की इसे पहचान कहते हैं,
ये मंदिर है, ये मस्जिद, ये गिरजा, ये गुरुद्वारा,
जहाँ वाले इसी मंजर की हिन्दोस्तान कहते हैं..’

खुर्शीद हैदर ने सुनाया-
‘किसने सोचा अपने घर ऐसे भी मंजर होंगे,
होंठों पर शमशीर बगावत हाथों में खंजर होंगे,
गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक,
अम्बर तक तो वही उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे..’

पहली बार मुशायरा पढ़ रहे नौजवान शायर उस्मान सिद्दीकी ने सुनाया-
‘किसने कहा चुरा के गजल पढ़ रहा हूँ मैं,
हाँ उस्ताद से लिखा के गजल पढ़ रहा हूँ मैं,
जिस का कोई जवाब नहीं हिंदोस्तान में,
ईरान से मँगा के गजल पढ़ रहा हूँ मैं,
सबने गजल सुनाई है राहत के शहर में,
राहत के घर पे जा के गजल पढ़ रहा हूँ मैं,
हिन्दौस्ताँ में धूम मचाने के बाद आज,
गाजिÞयाबाद में आ के गजल पढ़ रहा हूँ मैं..’

अजय ‘फलक’ ने अपनी देशभक्ति इन शब्दों में व्यक्त की-
चैन बेहद जरूरी वतन के लिए,
भाईचारा निभाओ अमन के लिए।
फूल भगवा सही, पत्तियां हैं हरी,
रंग दोनों जरुरी चमन के लिए।
अहमद अफजल ने दीवानों को सावधान करते हुए कहा- शहजादी से अगर प्यार किया जाएगा, कत्ल आशिक सरे दरबार किया जाएगा।

कवियत्री तूलिका सेठ ने अपनी मनोभाव व्यक्त करते हुए पढ़ा-
इस तरह वे ख्बाब में आने लगे,
हम रोज ही नाचने गाने लगे।

शरफ नानपारवी के इस शेर को जमकर दाद मिली:-
शीशे की क्या बिसात है पत्थर के सामने,
चलती नही किसी की मुकद्दर के सामने।

बिलाल सहारनपुरी ने गंगा जमुना तहजीब को प्रस्तुत करते हुए पढ़ा –
जो बजुर्गो ने कहा था, हुबहू करते रहे,
अमन और शांति की गुफ्तगू करते रहे।
जिससे तुमने जल चढ़ाया शिव के चरणों मे जल,
हम उसी गंगा के जल से बजु करते रहे।
मुशायरे में वशीर चिराग, राज कौशिक, खुर्शीद हैदर, शरफ नानपारवी, उस्मान सिद्दीकी, अहमद अजीम, सुरेन्द्र शर्मा, विजया अहसास, मासूम गाजियाबादी, अहमद अफजल, मनु भारद्वाज ‘मनु’,जमशेद माहिर, अहमद अजीम, अशोक पंकज, अमिनेश शर्मा, शालिद जमील, अरुण साहिबाबादी, राही निजामी, राजीव रियाज, मंसूर फरीदाबादी, गोविंद गुलशन, आरिफ देहलवी आदि ने अपनी रचनायें सुनायीं।

इससे पूर्व मुशायरे का आगाज शमा रोशन करके किया गया। अदबी संगम के अध्यक्ष डॉ. जकी तारिक, संयोजक सुशील शर्मा, सचिव अशोक कौशिक,लालचंद शर्मा, बाल किशन शर्मा, स्व.पं. हरप्रसाद शास्त्री के अमेरिका से पधारे सुपुत्र जितेन्द्र शर्मा, पत्रकार सलामत मियां, इकबाल कुरैशी, राकेश शर्मा, उदित मोहन गर्ग, गौरव गर्ग, आशीष गर्ग, रविन्द्र गुप्ता, मौ. इकबाल, ललित गर्ग, अतुल मित्तल, कुलदीप सोनी, अजय कुमार शर्मा, विपिन सिंघल, सीए अजय गोयल, सुनील यादव, महेश आहूजा, आफाक खान समीर, राकेश शर्मा, मनोज शर्मा, विरेन्द्र कंडेरे, प्रवीन बतरा, अमरदीप शास्त्री, के.पी. यादव, देवेन्द्र तोमर, कमलेश पाण्डेय, पं. विनोद त्रिपाठी, वीरेश नागर, प्रशान्त गुप्ता, अमन अग्रवाल, सुनील प्रताप सिंह, अतिम जिन्दल, नरेश स्वामी, सन्दीप कुमार, भीष्म जादौन, कमल शर्मा, केशव गौर, रचित दूबे, राहुल सिंघल, अभय गुप्ता, रिषभ जैन, प्रयांशु गर्ग, हरेन्द्र चौधरी, अशोक भारतीय, सिकन्दर यादव, यूपीएसआईडीसी की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती स्मिता सिंह, मकरन्द सिंह, मनोज गोयल, मुनीन्द्र आर्य, कुलदीप छायाकार, सुदामा पाल, रिचा सूद, श्रीमती अर्चना शर्मा, श्रीमती पूजा कौशिक, दीपा गर्ग, मोनिका गुप्ता, वात्सी वत्स, नेहा, अदिति,संजय , सचिन शर्मा सीमा शर्मा,एड.विनोदकुमार शर्मा,राज कुमार पंसारी,मंजु पंसारी,वीरेन्द्र कुमार ‘वीरो’, शमशेर राणा, एड.भारतेन्दु शर्मा आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. जकी तारिक व हाशिम रजा जलालपुरी ने किया।

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