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युनुस शैख साहेब की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि

युनुस शैख साहेब की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि

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आज ही के दिन मुस्लिम महासभा के संस्थापक जनाब युनुस शैख साहेब का इन्तकाल हुआ था। युनुश शैख, ये वो नाम है जिनके नाममात्र से ही दिलों मे कौमी जज्बात जगते है,युनुस साहेब वो शख्स थे जो अपनी कौम और देश के लिए पूर्ण समर्पित थे। मरहूम युनुश शैख अपनी जिन्दगी के अन्तिम क्षणों मे भी कौम के लिए फ्रिकमंद थे। मुस्लिम महासभा मेवाड से शुरू हुआ उनका सफर मुस्लिम महासभा भारत तक पहुंचा। राजस्थान के उदयपुर से मुस्लिम महासभा मेवाड की स्थापना से उनकी कौमी खिदमत का कारवां शुरू हुआ। धीरे धीरे कारवां बढता गया और उदयपुर से शुरु हुआ उनका कौमी खिदमात का काम पुरे राजस्थान में फैल गया। काफी कम समय में राजस्थान के बाहर उत्तरप्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में शैख साहेब ने कौम के खिदमतगारों की फौज तैयार कर दी।
मेवाड मुस्लिम महासभा,मुस्लिम महासभा राजस्थान ,मुस्लिम महासभा
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मरहूम युनुश शैख ने मुस्लिम महासभा की स्थापना 5 जनवरी 2008 को मेवाड मुस्लिम महासभा संस्थान नाम से कई थी। मुस्लिम महासभा फोर टी के फार्मुले पर काम करती है यानि तालीम,तंजीम,तिजारत,तरक्की ! साम्प्रदायिक सौहार्द, भाईचारा एवं कौम की तरक्की मुस्लिम महासभा का मुख्य उद्देश्य है।
मुस्लिम महासभा गैर सियासी संगठन है, कोई भी व्यक्ति जो कौम की खिदमत का जज्बा रखता हो वह मुस्लिम महासभा से जुड सकता है, अक्सर ये देखा जाता है राजनैतिक पार्टियों मे शामिल नेता कौम की बजाय पार्टियों के वफादार होते है,मुस्लिम युवा समय समय पर उनको आइना भी देखाते है,उदाहरण के तौर पर राजस्थान मे तकरीबन सत्तर (70)लाख से ज्यादा मुसलमान है लेकिन राजस्थान विधानसभा मे सिर्फ गीने चुने मुस्लिम विधायक है। पिछली सरकार में सीर्फ दो मुस्लिम विधायक थे। वो भी मुस्लिम मुद्दों पर बोलते हुये नही देखे गए, पिछली बार ऐसा नही था कि मुस्लिम नेताओं को टिकट नही मिली हो लेकिन कौम के युवाओं ने उन्हें विधानसभा नही भेजा क्युकिं मुस्लिम मुद्दो पर उनकी चुप्पी थी ,गोपालगढ (भरतपुर) केस उसका उदाहरण था।पिछली सरकार के समय में भी मुस्लिम विधायक मॉब लींचीग, मदरसा पैराटिचर, ऊर्दू शिक्षक भर्ती सहित मुस्लिम समुदाय से जुड़े हर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे थे। कौम के युवाओं ने उन्हें भी सबक सिखाने का काम किया है। मुस्लिम महासभा का हर सिपाही पार्टीपरस्ति की बजाय कौमपरस्ति,देश परस्ति पहले निभाता है। मरहूम युनुश शैख द्वारा मेवाड मुस्लिम महासभा बनाने के बाद समय-समय पर मुस्लिम मुद्दों पर आन्दोलन किए गए !16 नम्बर 2008 को मेवाड (उदयपुऱ) मे महापंचायत आयोजित की गई जिसमे हजारों की सख्या मे मेवाड के मुसलमानों ने शामिल होकर एकता-अखंडता की बेमिसाल नजीर पेश की! महासभा की कामयाबी देखते हुये राजस्थान के दुसरे इलाकों के मुसलमानों ने भी जुडने की इच्छा जाहिर की और मेवाड मुस्लिम महासभा ,अब राजस्थान मुस्लिम महासभा बन चुकी थी! 2014 में मरहूम युनुश शैख ने अपने सबसे विश्वस्त सिपाही ईमरान खान गाजियाबाद के साथ मिलकर राजस्थान के बाहर मुस्लिम महासभा के कौमी खिदमतकारों की फौज तैयार की। 2014 मे मुस्लिम महासभा ने राजस्थान के बाहर कदम रखा। जल्द ही महासभा ने हरियाणा,दिल्ली,उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र ,गुजरात मे अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली में महासभा ने हर जिले मे अपना मजबुत संगठन खडा किया।
2008 से 2014 के बीच काफी बार आन्दोलन,महापंचायत,महासम्मेलन हुये। मॉब लींचिग, मुस्लिम आरक्षण, शराबबंदी, शरियत बचाओ, तीन तलाक, मदरसा पैराटिचर, ऊर्दू शिक्षक भर्ती सहित कई मुद्दों पर सैकड़ों बार धरने-प्रदर्शन हुए। महासभा कई बार सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हुई।
मरहूम युनुस साहेब का सबसे बडा उद्देश्य मुसलमानों को एक जाजम पर लाना और मुसलमानों को आरक्षण दिलवाना रहा ,उन्होने राजस्थान के हर जिले ,कस्बे,मुस्लिम बहुल्य गॉवों में आरक्षण जनचेतना यात्रा की ! कौम के लिए अपना घर ,कारोबर सब दॉव पर लगाया ,खुद किराये के मकान मे रहे लेकिन कौम के लिए लडते रहे,
उनके संघर्ष को देखकर किसी ने युनुस भाई के लिए कहा था-
मेरी हिम्मत को सराहो मेरे हमराह चलो,
मेने एक शम्मा जलाई है आँधियों के खिलाफ.

युनुस भाई फिर से आरक्षण के मुद्दे पर राजस्थान की यात्रा पर निकलने वाले थे,
उनको कौमी जज्बात और खिदमत को अगर मे दो लाईन मे कहूँ तो-
अभी ना पूछो हमसे मंजिल कहा हैं,,
अभी तो हमने चलने का इरादा किया है!
ना हारे हैं ना हारेंगे कभी,
ये किसी और से नही खुद से वादा किया है !
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मरहूम युनुश साहेब ने हमेशा शिक्षा पर जोर दिया,तालीम को वो सबसे बडा हथियार मानते थे,महासभा बनने के बादहरवर्ष राजस्थान भर से प्रतिभावन छात्रों और समाजसेवी लोगों को प्रोत्साहित हेतु पुरस्कार समोराह आयोजित किया जाता था, जिसका सिलसिला निरन्तर जारी है।
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दुआ करो सलामत रहे मेरी हिम्मत,
ये एक चिराग कई आधिंयों पर भारी हैै.।
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ये लाइनें मुस्लिम महासभा के हरेक सिपाही ने युनुस भाई के लिए कही,लेकिन होनी को कौन टाल सकता है ,खुदा को कुछ और मंजुर था,
22 जनवरी 2017 को खुदा ने उन्हें अपने पास बुला लिया..
शैख साहेब के इंतकाल के बाद अपने पति के गंगा-जमुनी तहजीब के सपने को आगे बढ़ाने के लिए महोतरमा फहरीन युनुश शैख ने संगठन की कमान संभाल ली।आज महासभा प्रमुख महोतरमा फहरीन युनुश शैख, मरहूम युनुश शैख के सबसे विश्वश्त और महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद के साथ कंधे से कंधा मिलाकर एकता के पैगाम को आगे बढ़ाकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रही हैं। मरहूम युनुश शैख के इंतकाल के बाद महासभा प्रमुख महोतरमा फहरीन युनुश शैख और राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद के सानिध्य में करीब आधा दर्जन सामूहिक विवाह सम्मेलन किए जा चुके है। जिसमें सैकड़ों जोडो का निकाह सम्पन्न करवाया जा चुका है। महासभा प्रमुख महोतरमा फहरीन युनुश शैख के सानिध्य में दसवें और ग्यारहवें प्रदेश स्तरीय मुस्लिम प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। अपने पति के नक्शेकदम पर चलते हुए महोतरमा फहरीन युनुश शैख ने देश में कौमी एकता, सौहार्द और भाइचारे के लिए अपने आप को पूर्णतः समर्पित कर रखा है। महोतरमा फहरीन युनुश शैख कहती है कि कौमी खिदमत के लिए मेरे प्रेरणास्रोत मेरे शोहर मरहूम युनूश शैख है।मैं एक घरेलू महिला थी वैसे आज भी घरेलू महिला हूँ।मैनें मेरे शोहर को समाज और कौम के लिए लडते हुए देखा है। उनके अधुरे सपनों को पूरा करना मेरा लक्ष्य है।वो बताती है कि मेरे शोहर मरहूम मोहम्मद युनुश शैख से मैंने काफी कुछ सीखा है।मेरे शोहर अपनी अंतिम सांस तक महासभा के लिए फ्रिकमंद थे। मेरे शोहर से मेरा भी वादा था कि मैं अपनी अंतिम सांस तक अपनी कौम, समाज और महासभा के लिए काम करूंगी। जब उनसे पूछा गया कि कुछ लोग फर्जी तौर पर महासभा का नाम इस्तेमाल करते है तो उन्होंने बताया कि मेरे शोहर के वक्त भी इन लोगों ने महासभा को तोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास किये। मेरे शोहर पर झूठे मुकदमे दर्ज करवाए गए। उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा, उनकी तबियत खराब रहने लग गई। आज भी ये लोग अपनी हर कोशिश कर रहे है। इन लोगों के इतिहास से मेरा पूरा उदयपुर शहर वाफिक है। मेरे शोहर ने मुझे असत्य, बुराई और हिंसा से लडना सिखाया है। आज भी मेरे शोहर शैख साहेब को चाहने वाले हजारों लोगों की फौज मेरे साथ है, वैसै भी मैनैं अपने शोहर को इन विवादों से लडते देखते हुए खुद को तैयार कर लिया है। मुस्लिम महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद के नेतृत्व में देशभर में कौमी खिदमात को अंजाम दे रही है।

मरहूम युनूश शैख का मात्र 43 वर्ष की उम्र में 22 जनवरी 2017 को इंतकाल हो गया। उन्हें लीवर की गंभीर समस्या थी। मरहूम युनुश शैख महासभा की कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद को सौंप कर गए थे।शैख साहेब ने कौमपरस्तों की एक बड़ी फौज तैयार की। महासभा के वफादारों की एक कौर कमेटी का भी निर्माण किया और महासभा और कौर कमेटी की कमान ईमरान खान गाजियाबाद को सौंपी। आज महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान के नेतृत्व में देश में अमन – चैन, भाईचारा एवं कौमी एकता को मजबूत कर रही है।
महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष ईमरान खान गाजियाबाद बताते है मरहूम युनुश शैख से उनका दिल का रिश्ता था। उनके अधुरे सपनों को पुरा करना और महासभा का पुरे देश में प्रचम लहराना ही उनकी जिंदगी का लक्ष्य है।

किसी ने कहा है –
आँसुओं की कीमत जान गएं हैं हम,
जबतक थे साथ ना कोई गम था।
उनके करबट बदलते ही आज एहसास हों गया हैं,
एक अनमोल खजाना आज हाथों से छूट गया है।महोतरम ईमरान खान गाजियाबाद कहते है कि
युनुस साहेब हर शख्श से मुहब्बत करते थे,उन्होने युवाओं मे कौमी जज्बे को भरा,वो इतिहासपुरूष थे,आने वाली नस्लों को उनकी मिसाल दी जायेगी,आने वाली पीढियॉ उनसे सिखेंगी। वो अपने पीछे एक बडा परिवार और सैकडो युनुस साहेब बनाकर छोड गये। ईमरान खान कहते है हमारा लक्ष्य हमारे साहेब के अधुरे सपनों को पूरा करना है। मुस्लिम समाज को एक जाजम पर लाना, आरक्षण की लडाई लड़ना और युवाओं मे कौमी जज्बा भरना है। ईमरान खान कहते है महासभा कि कोशिश है हर गॉव,हर मोहल्ले ,हर कस्बें से युनुश साहेब जैसे कौमपरस्त पैदा हो।
हर घर मे युनुस साहेब पैदा हो..

मुस्लिम महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शरीफ मोहम्मद खिलजी द्वारा युनुश साहेब को समर्पित कुछ लाइनें-

जब कभी धूप की शिद्दत ने सताया मुझको,
याद आया बहुत एक पेड़ का साया मुझको,
अब भी रौशन है तेरी याद से घर के कमरे,
रोशनी देता है अब तक तेरा साया मुझको,
मेरी ख़्वाहिश थी कि मैं रौशनी बांटू सबको,
ज़िन्दगी तूने बहुत जल्द बुझाया मुझको,
चाहने वालों ने कोशिश तो बहुत की लेकिन,
खो गया मैं तो कोई ढूँढ न पाया मुझको,
सख़्त हैरत में पड़ी मौत ये जुमला सुनकर,
आ, अदा करना है साँसों का किराया मुझको,
शुक्रिया तेरा अदा करता हूँ जाते-जाते,
ज़िन्दगी तूने बहुत रोज़ बचाया मुझको ।।
मरहुम युनुस शेख साहाब जिंदाबाद, मुस्लिम महासभा जिंदाबाद।।

आज उनकी तीसरी बरसी पर खेराज-ए-अकी़दत पेश करते है।
आप सभी लोग शैख साहेब के मग़फिरत के लिए दुआ करे।
इन्नालिलाही इन्नाउलेही व राजेउन
खुन का हर कतरा कतरा कुर्बान,
मुस्लिम महासभा के नाम!!
इन्नाहलिलाही व इन्नाउलेही राजेउन।।

शरीफ मोहम्मद खिलजी
(राष्ट्रीय प्रवक्ता – मुस्लिम महासभा)

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