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भारत बंद : सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध

भारत बंद : सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध

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ऑल इंडिया ट्रेड यूनियंस ने आज भारत बंद का ऐलान किया है। इसका असर देश के कुछ हिस्सों में देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक बंद कर दिया, जबकि सिलीगुड़ी में उत्तर बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के बस ड्राइवरों ने हेलमेट पहनकर गाड़ी चलाई। मुंबई में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कर्मचारियों ने भारत पेट्रोलियम में विनिवेश के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहीं, चेन्नई में माउंट रोड पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
हड़ताल में 25 करोड़ कर्मचारियों के शामिल होने का अनुमान है। पंजाब में किसानों ने दूध, सब्जी, फल आदि की सप्लाई रोकने की घोषणा की है तो मध्य प्रदेश में सेंट्रल बैंक ने एसएमएस भेज कर ग्राहकों को हड़ताल की जानकारी दी। उत्तर प्रदेश में बुधवार को होने वाली जेईई मेन 2020, यूपी टीईटी 2019 और आईसीएआर नेट 2020 प्रवेश परीक्षाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

वही शिवसेना ने ट्रेड यूनियन के भारत बंद को समर्थन दिया। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’के मुताबिक, भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल ने उद्योग और कर्मचारी वर्ग को खासा नुकसान पहुंचाया है। इसका कारण सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले रहे हैं

राहुल गांधी का ट्वीट कर मोदी-शाह सरकार की जन-विरोधी नीतियों ने विनाशकारी बेरोजगारी को बढ़ावा देकर हमारे सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर किया है। आज 25 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मैं उन सभी को सलाम करता हूं।

किसानों का दावा है कि देशभर में 249 किसान संगठन और 80 विद्यार्थी संगठन इस बंद को समर्थन दे रहे हैं। सीटू से जुड़ी ट्रेड यूनियन के साथ-साथ ऑल इंडिया संघर्ष कमेटी की घोषणा के मुताबिक गांवों से दूध, सब्जी-फल के साथ-साथ हरा चारा की शहर में सप्लाई प्रभावित होगी। पंजाब में आंगनबाड़ी मुलाजिम यूनियन की ओर से भी तमाम आंगनबाड़ी सेंटर बंद रखकर हड़ताल का समर्थन किया।

भारत बंद में ये संगठन शामिल भारतीय व्यापार संघ ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), स्व-रोजगार महिला संघ, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन शामिल हैं। इसके अलावा (एलपीएफ), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी) और ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर ने समर्थन दिया है।

  • सभी के लिए न्यूनतम वेतन 21 हजार प्रति माह से कम न हो और इसे मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाए
  • स्थायी/ बाहर मासी कामों के लिए ठेका प्रथा बंद हो। ठेका / संविदा / आउटसोर्सिंग कर्मचारी, जो नियमित कर्मचारी का कार्य कर रहे हैं उन्हें नियमित किया जाए। जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन भत्ता दिया जाए।
  • बोनस और और प्रोविडेंट फंड की अदायगी पर से सभी बाध्‍यता सीमा हटायी जाए। ग्रेच्‍युटी का भुगतान 45 दिन प्रतिवर्ष के हिसाब से किया जाए।
  • सबके लिए पेंशन सुनिश्चित किया जाए। ईपीएफओ द्वारा सभी को एक हजार की जगह कम से कम दस हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाए।
  • केंद्रिय राज्‍य सरकार के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति को बहाल किया जाए। केंद्र व राज्‍य कर्मचारियों को एक समान वेतन व भत्‍ते दिए जाए।
  • रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाया जाए। केंद्र व राज्‍य सरकार के रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती किया जाए। नियमित प्रकृति के कार्यों में कार्यरत सभी उद्योग के संविदा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित किया जाए और कार्य के आधार पर आवश्यकतानुसार नई भर्ती की जाए, ताकि बेरोजगारी दूर हो। स्थाई प्रकृति के काम पर स्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
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