Breaking Newsउत्तर प्रदेशखरी खोटीराष्ट्रीयहमारा गाजियाबाद

कमिश्नर प्रणाली से कितने रुक पायेंगे अपराध ?

 

जानकारी मिल रही है कि पड़ौसी जनपद गौतमबुद्ध नगर के बाद अब गाजियाबाद में भी पुलिस की कमिश्नर प्रणाली लागू हो जायेगी। वैसे तो यह कवायद लम्बे समय से चल रही थी लेकिन अब शासन ने इस पर अंतिम फैसला ले लिया है। कमिश्नर प्रणाली में पुलिस अधिकारियों को कुछ अतिरिक्त संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। कई ऐसे कार्य जो अब प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में हैं वे पुलिस अधिकारियों को मिल जाते हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद अपराध और अपराधियों पर लगाम लग जायेगी। क्या पुलिसकर्मियों और अधिकारियों में आम आदमी के प्रति जो हिकारत भरा रवैया गन दिनों रहता है उसमें कोई बदलाव आयेगा। प्रश्न यह भी कि पुलिसकर्मी और अधिकारी तो जो आज हैं तब भी वही रहेंगे। आम आदमी के साथ पुलिसकर्मी जो अपमान जनक व्यवहार आज रखते हैं क्या कमिश्नर प्रणाली में वह बदल जायेगा। शहर की सड़कें, गलियां और उन पर दनदनाते वाहन वही रहेंगे। कानून वही रहेगा लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या कानून व्यवस्था में सुधार होगा। पुलिस द्वारा रोज ही मुठभेड़ के नाम पर अपराधियों को गोली मारी जा रही है लेकिन फिर भी न अपराधिक वारदात रुक रही हैं और न ही अपराधियों में कमी आ रही है। ऐसा लगता है मानो रोज किसी गोदाम का दरवाजा खुलता है और वहाँ से नये – नये अपराधी बाहर आ रहे हैं। न चेन स्नैचिंग रुक पा रही और न ही रातों में होने वाली चोरियां। सवाल यही है कि क्या कमिश्नर प्रणाली के बाद इन वारदातों पर रोक लग सकेगी। पड़ौसी जनपद गौतमबुद्ध नगर और यहां तक कि देश की राजधानी दिल्ली में भी कुछ नहीं बदला है। बदल जायेंगे अधिकारियों के पदनाम और हो जायेगी उनके अधिकारों में कुछ बढोतरी। आखिर बढते अपराधों का कारण क्या है। आखिर अपराधियों और सफेदपोशों के गठजोड़ पर लगाम क्यों नहीं लग पाती। पुलिस सुधार को लेकर गठित किये गये आयोगों की रिपोर्ट धूल क्यों फांक रही हैं । यह बात सामाजिक कार्यकर्ताओं से लेकर अधिकारी और नेता पुलिस सुधार की जरूरत पर बल देते हैं लेकिन पुलिस सुधार लागू नहीं किये जाते। क्योंकि ऐसा करने पर पुलिस के ऊपर कसे रहने वाला नेताओं का शिकंजा टूट जायेगा। पुलिस का ढांचा वर्तमान रहे या कमिश्नर प्रणाली लागू हो पुलिस प्रणाली में सुधार के बिना हालात वही रहेंगे जो आज हैं।

Show More

Related Articles

Close