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वाह रे पैसे तेरी कैसी माया,

प्रॉपर्टी के लिए झूठा गैंगरेप दिखाया

 

गाजियाबाद। धन दौलत के लालच में दुनिया इतनी मतलबी हो गई है कि उसको समाज से कोई लेना-देना नहीं है। धन दौलत के लालची लोगों को सिर्फ और सिर्फ नोटों से ही प्यार होता है, यह बिल्कुल साफ कर दिखाया है झूठा गैंगरेप का आरोप लगाने वाली नर्स ने। गैंग रेप के आरोप में प्रॉपर्टी विवाद को उलझाकर समाज को कलंकित करने वाली महिला पर पुलिस प्रशासन क्या शिकंजा कसता है यह तो वही जाने, किंतु गैंग रेप का झूठा केस दर्ज कराने वाली पूरी गैंग पर पुलिस ने हकीकत का शिकंजा कसा है। अब तो यह भी सोचना पड़ेगा कि प्रॉपर्टी खरीदनी है तो पूरी जांच-पड़ताल के साथ साथ और वह प्रॉपर्टी महिला के नाम ना हो। कहीं धोखे में महिला उक्त मामले की तरह अपने जाल में ना फसा दे। मनगढ़ंत तरीके से सामूहिक दुष्कर्म की पटकथा लिखने वाली नर्स और उसके साथी आजाद लाखों रुपए की प्रॉपर्टी हड़पने की फिराक में थे। किंतु गाजियाबाद पुलिस ने सच का आईना दिखाते हुए आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। यदि हम यह कहे कि वाह रे पैसे तेरी कैसी माया प्रॉपर्टी के लालच में झूठा गैंगरेप दिखाया, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। बहरहाल गाजियाबाद के एसएसपी मुनिराज, एसपी क्राइम दीक्षा शर्मा, सीओ आलो की दुबे, एसपी सिटी निपुण अग्रवाल और नंदग्राम थाना प्रभारी निरीक्षक रमेश सिंह सिद्धू के अलावा उनकी टीम ने निर्दोषों को कलंकित होने से बचाते हुए एक सराहनीय कार्य किया है। ज्ञात हो कि नंद नगरी दिल्ली में रहने वाली एक अधेड़ नर्स ने 5 लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया था। महिला का कहना था कि वह गाजियाबाद के नंद ग्राम में रहने वाले अपने भाई के यहां जन्मदिन मनाने 16 अक्टूबर को आई थी। वापस लौटते समय कार सवारों ने उसका अपहरण कर लिया था और फिर सामूहिक दुष्कर्म कर प्राइवेट पार्ट में रॉड डाल दी थी। जबकि पुलिस ने खुलासा किया कि वह 2 दिन तक अंडर ग्राउंड रही। उसके बाद मैं हॉस्पिटल में एडमिट हो गई। यह मामला तब चर्चा में आया जब दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने 18 अक्टूबर की सुबह ट्वीट के माध्यम से गाजियाबाद के एसएसपी को घटना से अवगत कराते हुए नोटिस ईशु किया था। आनन-फानन में पुलिस ने केस तो दर्ज किया ही साथ ही उसका 2 दिन के अंदर ही पटाक्षेप कर दिया। भाई जी प्रवीण कुमार ने प्रेस वार्ता के माध्यम से बताया कि आजाद नर्स का साथी है गौरव की गाड़ी का इस्तेमाल किया गया और अब जाल भी उनके प्रॉपर्टी से जुड़े मामले में इनका सहयोग कर रहा है। 56 लाख रुपए की प्रॉपर्टी को लेकर आपसी विवाद चल रहा है जो कोर्ट में विचाराधीन है। गाजियाबाद के एसएसपी मुनिराज और उनकी टीम ने दूध का दूध और पानी का पानी अलग कर यह साबित कर दिया है कि निर्दोष को कहीं आंच नहीं है।

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