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दिल्ली हार्ट एंड लंग्स हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही से मरीज व तीमारदार परेशान

दिल्ली हार्ट एंड लंग्स हॉस्पिटल में मरीजों को बेवजह ही परेशान किए जाने का मामला सामने आया है। हॉस्पिटल में एडमिट एक पेशेंट की माने तो उनको चेकअप कराना था। चेकअप करने के बाद डॉक्टर ने उन्हें एडमिट करने की बात कही। बताया जा रहा है कि मीना नामक पेशेंट को रूम नंबर 118 मैं भर्ती किया गया था जिसमें चार पेशेंट थे। बीती रात करीब 8:30 बजे रूम नंबर 118 से सभी को एक-एक कर अलग-अलग कमरों में शिफ्ट कर दिया। किसी को बताया कि रूम नंबर 118 में मच्छर भगाने के लिए कंट्रोल पेस्ट कराना है। किसी से बोला कि स्टाफ की कमी है और किसी को कोई बहाना बनाकर अलग-अलग रूप में शिफ्ट कर दिया, जबकि डॉक्टर ने कोई भी पेशेंट शिफ्ट करने के लिए नहीं कहा था। पेशेंट को अलग रूम में शिफ्ट करने की बाबत आप अभी तक डिजिटल चैनल की संपादक कृष्णा सिंह अपनी एक महिला मित्र मीना से हॉस्टल में हाल-चाल जानने के लिए गई थी। वहां का वृतांत उन्होंने देखा तो वह दंग रह गई। संपादक कृष्णा सिंह ने जानकारी की तो सिक्योरिटी इंचार्ज ने कहा कि हम इस बिल्डिंग के मालिक हैं और मरीज को कहीं भी शिफ्ट कर सकते हैं, हालांकि बाद में उसने आकर माफी मांगी और कहा कि हड़बड़ाहट में मैं ऐसा बोल गया। आप जो कहोगे मैं आपकी हेल्प करने के लिए तैयार हूं। कृष्णा सिंह का कहना है कि एक तो मरीज पहले से ही तनाव में रहता है दूसरा यहां का स्टाफ मरीज को परेशान कर रहा है।दिल्ली हार्ट एंड लंग्स हॉस्पिटल की यह लापरवाही कि उनके पास स्टॉक नहीं है तो मरीज को क्यों भर्ती कर रहे हैं। इतना ही नहीं मरीज के साथ मौजूद तीमारदार के लिए बैठने तथा सोने का भी कोई उचित प्रबंध नहीं है, जबकि अस्पताल में तीमारदार के लिए भी सुविधाएं होती है और उसका भी सुविधा शुल्क अस्पताल द्वारा वसूला जाता है। हैरत की बात तो यह है कि जब डॉक्टर ने किसी भी मरीज को अलग रूम में शिफ्ट करने के लिए नहीं कहा तो अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने मरीज को कैसे शिफ्ट कर दिया। इस दौरान यदि कोई हादसा हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता, या यूं कहे कि दिल्ली हार्ट एंड लंग्स हॉस्पिटल का स्टाफ लापरवाह है और यहां कोई उपचार कराने ना आए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

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