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कुछ पुलिस वालों की वजह से ईमानदार पुलिस वाले भी देखे जाते है गलत नजरों से

मधुर शर्मा आरटीआई कार्यकर्ता, वायु सेना द्वारा सम्मानित

गाजियाबाद।सामाजिक संपन्नता का अर्थ है कि मनुष्य सुखी हो, नागरिक स्वतंत्र हो और राष्ट्र महान हो! हमारा जीवन कैसा होना चाहिए आए दिन समाज मे बहुत सारी ऐसी घटनाएं होती हैं जिसे सुनना और दूसरों को बताना भी हमारे लिए दुर्लभ हो जाता है! समाज शांति से अपनी जिंदगी जिए इसके लिए कई सारे नियम बनाए गए कई सारी सजाओं का भी प्रावधान किया गया!साथ ही मुजरिम या समाज को नुकसान पहुचाने वालों को पकड़ने के लिए पुलिस महकमे भी बनाए गए! लेकिन जरा सोच कर देखिए कि अगर रक्षक ही भक्षक हो जाए तो कैसी स्थिति होगी और कैसे समाज का निर्माण होगा! आज कई जगह लोग पुलिस के पास जाने से डरते हैं और अपनी समस्याओं को सहते रहते हैं और अपनी जिंदगी अपने ही हाथों नर्क बना लेते हैं!कई बार कुछ लोग शिकायत करते हैं लेकिन परिणामस्वरूप यह होता है कि उन्हें ही परेशान किया जाता है डराया जाता है मानसिक रूप से दबाव डाला जाता हैं और जो शिकायत करने आते हैं उनकी मदद करने के बजाय उनसे बहुत सारे पैसे लिए जाते हैं! समाज में ऐसे कुछ पुलिस वालों की वजह से ईमानदार पुलिस वाले भी आज गलत नजरों से देखे जाते हैं!इसमें सुधार की जरूरत है और जो पुलिस वाले भक्षक बनकर बैठे हैं! उन पर सख्त कारवाई की भी जरूरत है और साथ ही लोगों को विश्वास दिलाने की भी जरूरत है कि पुलिस उनके लिए ही है उनकी सुरक्षा के लिए चौबीस घंटे उपस्थित है! तब जाकर हमारे समाज में नागरिक स्वतंत्र रह पाएंगे और बिना किसी डर के अपनी जिंदगी जी पाएंगे।

 

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