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मनुष्यों,पशुओं,और प्रकृति के सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयास करना समय की आवश्यकता — के.जे.अल्फांसे.

सामाजिक संस्था “समायु” द्वारा ‘हरित ग्रह (पृथ्वी) के लिए भोजन’ अभियान के अंतर्गत “पशु कृषि का,पशुओं,मनुष्यों और प्रकृति पर प्रभाव”विषय पर इंडिया हैबिटेट सेंटर नई दिल्ली,में सम्मेलन आयोजित किया गया.
सम्मेलन में मुख्य अतिथि,पूर्व सांसद एवम केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री के.जे.अलफांसे ने अपने वक्तव्य में नैतिक जीवन के महत्व और प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंधो को छूते हुए कहा कि हमारे ग्रह पृथ्वी की चुनौतियां सर्वविदित हैं.जिसके सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयास करना समय की आवश्यकता है. पशु कल्याण,मानव कल्याण और विश्व स्वास्थ्य परस्पर जुड़े मुद्दों का यह संदेश पूरे विश्व में जाना चाहिए.यह संदेश स्कूलों में भी जाना चाहिए कि हमें दीर्घ जीवन जीने की जरुरत है.
“समायु”संस्था की सह संस्थापक सुश्री वरदा मेहरोत्रा ने कहा कि जलवायु संकट,कुपोषण,पशुओं का शोषण और संक्रामक रोग अलग अलग मुद्दे नहीं हैं.भारत में कुपोषण लगातार फैल रहा है. परंतु भारत की एक तिहाई कृषि भूमि पर सिर्फ चारा उगाया जा रहा है,जो कि पशुओं को खिलाने के लिए होता है.
“समायु” एक सतत,न्यायपूर्ण और पक्षपात रहित,पर्यावरण प्रेमी,विश्व बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.जिसमें मनुष्य,पशु और प्रकृति इस उद्देश्य के अविभाज्य अंग हों.
हमारा विचार बिंदु है कि भारत में सभी पशु,मनुष्यों और प्रकृति का स्वास्थ्य अच्छा हो.
सम्मेलन में उपस्थित सुप्रसिद्ध विद्वानों डा.प्रशांत एन.श्रीनिवास, डा. विजय पाल सिंह,सुश्री पुर्वी व्यास,श्री आर.पी.सिंह,और श्री डी.पॉल ने भी अपने सारगर्भित वक्तव्य दिए.

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