Breaking Newsराष्ट्रीयरेवाड़ी (हरियाणा)

शराब मांस के सेवन की वजह से काँवड़, पूजा-पाठ, जप तप यज्ञ का फल नहीं मिलता

जानवरों को मारने काटने व सड़ने की बदबू से हवा जहरीली होने से मनुष्य का धरती पर जी पाना होगा मुश्किल

संसार में सन्त और धरती जितना बर्दाश्त करने वाली कोई शक्ति नहीं

रेवाड़ी (हरियाणा): मेहनत करने के बाद भी फल न मिलने के कारण और उपाय बताने वाले, देवताओं को खुश करने का सही तरीका बताने वाले, सभी तरह की निंदा अपमान श कर भी दिन-रात परोपकार में लगे रहने वाले, इस काल के देश में दुःख के संसार में आकर जीवों को दुःख तकलीफ से बचा कर अपने निज घर सतलोक जयगुरुदेव धाम ले चलने वाले, वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के प्रति माह कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाए जाने वाले मासिक भंडारा पर्व के शुभ अवसर पर 26 जुलाई 2022 प्रातः कालीन बेला में बावल आश्रम, रेवाड़ी (हरियाणा) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि कर्मों का फल भोगना पड़ता है, इससे आज तक कोई बच पाया ही नहीं। इसलिए इस शरीर को आप बुरे कर्मों से बचाओ, साफ सुथरा रखो, इसके अंदर गंदगी (मांस, शराब आदि) मत लाओ। देखो इधर अभी थोड़ी देर में सुनोगे, बाजा गाजा बजाते हुए, आवाज लगाते हुए कांवड़िये जाएंगे। कुछ लोग गाड़ियों से, कुछ पैदल चलते हैं, मेहनत करते हैं। लोग जप तप यज्ञ कथा भागवत अनुष्ठान आदि करते हैं लेकिन सच पूछो तो फल उसका नहीं मिलता है। कैसा फल? जिसकी पूजा करते हैं, जो फल दे सकते हैं, वो भी नहीं देते हैं।

ये जितने भी देवी-देवता हैं, मनुष्य को सुख पहुंचाने के लिए काल भगवान ने बनाए

किसकी पूजा करते हैं ये? जिनको काल भगवान कहा गया, जिनके देश में रहते हो, उनके बनाए हुए देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। देवी-देवताओं को उन्होंने किस लिए बनाया? मनुष्य को सुख पहुँचाने के लिए उन्होंने बनाया। जैसे हवा को पवन देवता कहते हैं, अग्नि देवता, सूर्य देवता, पृथ्वी देवता। इनकी पूजा बहुत से लोग कराते हैं कि देवता खुश हो जाएं। इस पृथ्वी के ऊपर फूल चढ़ा देने से, पृथ्वी देवाय नमः बोल देने से पृथ्वी खुश नहीं होती। पृथ्वी कैसे खुश होती हैं? जब इनको पवित्र रखो, साफ सुथरा रखो तब यह खुश होती हैं।

दुनिया संसार मे सन्त और धरती जितना बर्दाश्त करने कोई शक्ति नहीं

पृथ्वी धरती जितना कोई दुनिया संसार में बर्दाश्त करने वाली चीज ही नहीं है और सन्तों जितना बर्दाश्त करने वाला कोई भी ऐसा जीव नहीं है, चेतन शक्ति नहीं है। पृथ्वी तो जड़ है, एक जगह स्थिर है। ऐसे तो पृथ्वी चलती रहती हैं, दुनिया संसार देवी-देवता सब चलते रहते हैं लेकिन देखने में स्थिर लगती है। पेड़ पौधे एक जगह पर रुके हुए हैं, एक तरह से स्थिर है, स्थावर हैं। यह धरती बर्दाश्त बहुत करती है। कहते हैं-

खोद खाद धरती सहै है, काट कूट वनराय।
कुटिल वचन साधु सहै, औरों सहा न जाय।।

बर्दाश्त की शक्ति बहुत होती है सन्तों में, साधकों में बर्दाश्त की शक्ति होती है और धरती में होती है। लेकिन धरती देवता ऐसे खुश नहीं होते हैं कि फूल पत्ती चढ़ा दो खुश हो जाएंगे। इनके ऊपर पाप नहीं होना चाहिए, किसी जीव का खून नहीं बहना चाहिए, जीव हत्या इस पर नहीं होना चाहिए तब यह देवता खुश होते हैं, पृथ्वी देवता तब खुश होते हैं।

पृथ्वी पर जानवरों को मारने काटने व सड़ने की बदबू से हवा जहरीली होती जा रही हैं

पृथ्वी पर जानवरों को काटोगे, उनका मांस सड़ेगा, हड्डी से उनके बदबू आएगी तो वह बदबू कहां फैलेगी? कोई जानवर मरा हुआ हो उसकी बदबू आपको महसूस होती हो, कैसे महसूस होती है? वह हवा जो आती है, हवा का झोंका जो चलता रहता है उससे बदबू आती है नाक में। यह हवा जहरीली होती चली जा रही है, पवन देवता खुश नहीं हो रहे हैं। इससे जीव हत्या से बचने की जरूरत है।

Show More

Related Articles

Close