Breaking Newsउत्तर प्रदेशराष्ट्रीयहमारा गाजियाबाद

अंबानी के खिलाफ लड़ी गई वो भयंकर लडाई

जयपुर (सीरीज) रिलायंस पॉवर प्रोजेक्ट के लिये अंबानी ने बझेडा खुर्द और देहरा सहित 7 गावो की करीब 5700 हेक्टेयर जमीन अधिगृहित करने के लिये केन्द्र और उप्र सरकार को कहा। उप्र में मुलायम सिंह के नेतृत्व में सरकार थी, मुलायम सिंह ने तत्काल गाजियाबाद प्रशासन को आदेश जारी किये और भूमि अधिग्रहण शुरु हो गया। बझेडा खुर्द के लोगो को जब कौड़ी के भाव अपनी जमीन जाने की भनक लगी तो उन लोगो ने एक कमैटी गठित करके इसके खिलाफ धरना शुरु कर दिया। मँगू सिंह, राकेश शिशोदिया, युधिष्ठिर आदि साथियों ने देहात मोर्चा से समर्थन मांगा। सतीश विधुडी, आनन्द नागर, मनमोहन शर्मा, मा मनोज नागर आदि साथी देहात मोर्चा की और से आन्दोलन में शामिल हो गए। आन्दोलन को कुचलने के लिये प्रशासन सक्रिय हुआ तो सत्यपाल चौधरी के नेतृत्व में जिलाधिकारी को यह सोचकर ज्ञापन दिया गया कि उप्र में मुलायम सिंह मुख्यमंत्री हैं और वे किसान हितैषी होंगे, लिहाजा बात सुनी जायेगी लेकिन हफ्ते दस दिन बाद ही अनिल अंबानी की पॉवर प्रोजेक्ट के भूमि पूजन में आने पर मुलायम सिंह द्वारा अगुवाई करने से ये भ्रम टूट गया। हद तो तब हो गई भाईसाहब जब मुख्यमन्त्री मुलायम सिंह यादव ने मसूरी कस्बे में बने हैली पैड पर अंबानी का तीन घन्टे इंतजार किया। चौधरी और उनकी टीम अंबानी की ताकत और मुलायम सिंह यादव की नीयत जान गई थी कि जमीन बचाने की ये लडाई इतनी आसान नही है। मिटिंग बुलाई गई, राजकुमार भाटी, अजित दौला,बाबू सिंह आर्य, मा मन्त राम नागर, ओंकार त्यागी,चो केसरी सिंह गुर्जर सहित सभी लोग मिटिंग में आए और रिलायंस पॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ निर्णायक लडाई का एलान किया गया। बझेडा खुर्द में पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह की सभा कराने और उन्हे इस लडाई का नेतृत्व करने के लिये आमंत्रित किया गया। रिलायंस पॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ लडाई को हल्के में ले रहा प्रशासन एकाएक चौकन्ना हो गया।सभा आयोजित हुई, वी पी सिंह आए और रिलायंस पॉवर प्रोजेक्ट के लिये अधिगृहित जमीन के बाजार मूल्य पर भाव देने की अपील करते हुए चेतावनी देते हुए चले गए कि मांग ना मानी तो किसान अपनी जमीन वापिस ले लेंगे। इस बीच आन्दोलन खड़ा होता रहा,संघर्ष चलता रहा और अंबानी ने अधिगृहित जमीन की ना केवल बौन्ड्री करानी शुरु कर दी वरन मुलायम सिंह सरकार से जमीन का नेचर बदलवाकर जमीन को कृषि के बजाय औधोगिक और व्यवसायिक में दर्ज करा लिया साथ ही बैंक से प्रोजेक्ट के लिये भारी ऋण भी ले लिया। मुलायम सरकार से मिलकर अंबानी की किसानो की जमीन पर बढती ग्रिप को देखते हुए चौधरी साहब ने सभी साथियों की वी पी सिंह जी के दिल्ली आवास पर बैठक बुलाने और आन्दोलन को मजबूती से चलाने का सुझाव रखा। वी पी के आवास पर रिलायंस के खिलाफ आन्दोलन की ठोस रणनीति बनाई गई, इस रणनीति से देश के सबसे ताकतवर उध्योगपति के खिलाफ गाजियाबाद की धरती पर भयंकर आन्दोलन खड़ा हो गया।

Show More

Related Articles

Close