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मुख्यमंत्री के आदेशों को जीडीए के ऐई, जेई और सुपरवाईजर दिखा रहें हैं ठेंगा

लाइनपार एरिया में जीडीए अफसरों की मिलीभगत से हो रहा है अवैध निर्माण जीडीए वीसी और सचिव भी नही कर रहे, प्रताप विहार, सिद्धार्थ विहार का निरीक्षण

गाजियाबाद। मुख्यमंत्री के साफ साफ आदेश है कि भूमाफियाओं की संपत्ति और अवैध निर्माण पर बाबा का बुलडोजर चलता रहना चाहिए, मगर सीएम के आदेश को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में तैनात ऐई एवं जोन 4 प्रभारी आर.बी सिंह, जेई अनूप श्रीवास्तव, सुपरवाइजर राजकुमार बिल्ड़रों को लाभ पहुंचा रहे हैं। जोन चार के प्रवर्तन प्रभारी की अनदेखी के कारण बिल्डर लीक से हटकर निर्माण कार्य करने से बाज नही आ रहे है। लाइनपार क्षेत्र के प्रताप विहार और सिद्धार्थ विहार में बिल्डरों द्वारा एकल यूनिट में बड़ी बड़ी इमारते खड़ी कर शहर की आबोहवा को खराब करने का कार्य किया जा रहा है। यह सब वीसी व सचिव की सख्ती के बावजूद हो रहा है। क्योंकि इनके विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही जीडीए द्वारा नही की जा रही है। सिद्धार्थ विहार में दस दस मंजिला टावर बनकर अवैध रुप से खड़े हो गए है मगर नोटो की चकाचौंध में अधिकारियों की आंखे चुंधिया गई है। जब शासन से कोई फरमान जारी होगा तो फिर अवैध निर्माण होने से अभिज्ञता जताएंगे। यही नहीं इस बात का प्रवर्तन प्रभारी व प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों को न पता हो। उसके बावजूद कोई भी अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहा है। विश्वसीय सूत्रों का दावा है कि जोन 4 के ऐई, जेई और सुपरवाईजर बिल्डरों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। पूरे प्रताप विहार में धड़ल्ले से अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। और पार्किंग की जगह में दुकान/आॅफिस बनाए जा रहे हैं, जो लीक से हटकर किया जा रहा है। खानापूर्ति के लिए जीडीए द्वारा सीलिंग की कार्यवाही और एफआइआर दर्ज करा दी जाती है किंतु एक दो दिन बाद ही नोटो की चमक के सामने फिर जोरो से काम शुरू हो जाता है। लाइनपार का रुख करें तो बिल्डर प्रताप विहार के सैक्टर 11, 12 में अवैध निर्माण कर रहे हैं, प्रताप विहार के केए ब्लॉक के आलावा बहुत ब्लॉक जे, के, एल, एम, एन, आर, पी, एच में अवैध निर्माण जारी है। इसके अलावा के में कार्मिशियल भूखंडों पर लीक से हटकर कार्य किया जा रहा है। यही नहीं प्रताप विहार के दो बिल्डर अपने आपको प्राधिकरण की पूर्व उपाध्यक्ष व नोएडा की सीईओ रितु माहेश्वरी का रिश्तेदार बता रहे हैं और धमकी देते हैं कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। जीडीए वीसी जहां लगातार अवैध निर्माण रोकने के लिए प्रयासरत हैं वहीं स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी भ्रष्टाचार की निशानी है। आरोप है कि जीडीए के कुछ अधिकारियों की बिल्डरों के साथ मिलीभगत है।

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