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जातिगत जनगणना पर बवाल

अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय व अनुसूचित जाति जनजाति की जातिगत जनगणना को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति बड़ी करवट लेने जा रही है। देश के कई सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने इस मुद्दे पर आज भारत बंद का आह्वान किया है। जातिगत जनगणना की मांग को लेकर बुलाई गई भारत बंद का असर कम से कम उत्तर प्रदेश में नहीं होगा यह तय है लेकिन बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड आदि राज्यों में बंद काफी सफल रह सकता है। केंद्र सरकार कई संगठनों की मांग के बावजूद जातिगत जनगणना कराने के लिए पूरी तरह मना कर चुकी है। जातिगत जनगणना के पक्षधर लोगों का कहना है कि इससे यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि देश में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी कितनी है, अल्पसंख्यक वर्ग और अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी कितनी है। जातिगत जनगणना के बाद यह बात भी स्पष्ट हो जाएगी कि देश में सामान्य जातियों की आबादी कितनी और कितना प्रतिशत है। बिहार राज्य जहां कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी साझीदार है वहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना की मांग को लेकर इस समय नई राजनीतिक करवट लेने की तैयारी में हैं। नीतीश कुमार जातिगत जनगणना की आवाज उठा कर बिहार में नई राजनीतिक हलचल पैदा करने में सफल रहे हैं। बिहार में किसी भी दिन नई राजनीतिक उठापटक हो सकती है। उत्तर प्रदेश में भीम आर्मी और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली आजाद समाज पार्टी भी जातिगत जनगणना की मांग करती रही है। प्रत्येक 10 वर्ष के बाद होने वाली सामान्य जनगणना वर्ष 2021 में होनी थी जो कोरोना काल के कारण नहीं हो सकी है। अब सामान्य जनगणना कराने के आदेश दिए गए हैं। यही कारण है कि इसी के साथ जातिगत जनगणना कराने की मांग बलवती हो रही है। जातिगत जनगणना की मांग को लेकर राजनीतिक टकराव होना निश्चित है। इसका परिणाम क्या होगा यह अभी तय नहीं है।

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