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हाईवे किनारे कूड़े के ढेरों में उठ रहे हैं धुएं के बादल

मुरादनगर। क्षेत्र के शिक्षा चिकित्सा संस्थान हाईवे पर ही कूड़े के अंबार लगा रहे हैं और कूड़े के ढेरों में लगाई गई आग से उठने वाले धुएं ने आसपास की कालोनियों के निवासियों को सांस संबंधी बीमारियों की जकड़ में कसना शुरू कर दिया है। इन संस्थाओं पर प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान जैसे आवाहन का कोई असर नहीं पड़ा है और न ही इन्हें एनजीटी के निर्देशों की परवाह है। मेरठ दिल्ली हाईवे पर गांव असालत नगर के निकट कई काइट आईटीएस आदि शिक्षण संस्थाएं हैं। वहीं चिकित्सा शिक्षा संस्थान का अस्पताल भी है। हाईवे किनारे खाली पड़ी जमीन को इन संस्थानों ने कूड़ा घर बना दिया है हर समय कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे रहते हैं उनसे उठती दुर्गंध यहां से गुजरने वालों को नाक बंद करने के लिए मजबूर कर देती है ।यही नहीं यहां सभी नियमों को ताक पर रख अस्पताल से निकलने वाला वेस्ट भी खुले में फेंक दिया जाता है जबकि उसके निस्तारण के लिए अलग से नियम व्यवस्था हैं। कूड़े में आग लगाकर ढेर को छोटा करने के प्रयास भी संस्थाओं के कर्मचारी करते हैं उठते धुएं के कारण यहां से गुजरते समय बादलों का एहसास होता है। वहीं आसपास में मौजूद कॉलोनियों के निवासियों को धुएं के कारण सांस संबंधित परेशानियां बढ़ने लगी हैं।
लंबे चौड़े संस्थान खड़े हैं लेकिन उन्होंने अपने यहां कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं की है। सफाई के लिए सरकार अनेकों प्रयास कर रही है शहरों गांवों में इधर उधर कूड़ा डालना बंद हो गया है निर्धारित स्थानों पर ही एकत्र कूड़ा डाला जाता है। एनजीटी ने आग लगाकर धुआं उठाने पर सख्त कार्रवाई के नियम बनाए हैं लेकिन यहां सभी नियम कायदे कानून धुआं धुआं हो रहे हैं। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि वह कई बार इन संस्थानों से यहां कूड़ा न डालने आग लगाने के बारे में शिकायत कर चुके हैं। लेकिन संस्थान संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं।

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