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अमानवीयता व संवेदनहीनता की हद!

युद्ध कहीं भी हो उसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम बच्चों और महिलाओं को भुगतना होता है। इस समय हमारे पड़ोस के 2 देशों में जो घटनाएं घट रही हैं उसका सबसे बुरा असर महिलाओं और बच्चों पर ही पड़ेगा। श्रीलंका इस समय पूरी तरह बर्बादी के कगार पर हैं जबकि पाकिस्तान भी अराजकता के रास्ते पर अड़ा है जहां किसी भी समय किसी भी घटना घट सकती है। यूक्रेन पूरी तरह युद्ध के शिकंजे में फंसा हुआ है जहां से अनेक दिल दहलाने वाली कहानियां बाहर आ रही है। श्रीलंका जिस स्थिति में आज है वहां बच्चों के लिए कहीं भी दूध उपलब्ध नहीं है। दूध की बात बहुत बड़ी है श्रीलंका इस समय भुखमरी के कगार पर है और महिलाएं व बच्चे अत्यन्त विपन्न स्थिति में हैं। वहां यदि एक या 2 दिन में हालात नहीं सुधरे तो सड़कों पर गृह युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी ही स्थिति हमारे दूसरे पड़ोसी पाकिस्तान में बनी हुई है जहां सरकारी अस्थिरता के कारण अराजकता के हालात बनते जा रहे हैं। पाकिस्तान में भी महिलाओं और बच्चों के ऊपर जिस तरह के जुल्म हो रहे हैं वे छन छन कर अक्सर ही बाहर आते रहते हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं के साथ जबरन विवाह करने की वारदात लगातार हो रही है। अफगानिस्तान में और कोई अधिकार नहीं है

वहां तालिबान ने पूरी तरह तानाशाही शासन कायम कर लिया है। रूस और उसकी सेना के द्वारा दावे कुछ भी किए जाएं लेकिन वहां उन शहरों में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं हुई है जहां जहां रूसी सैनिक पहुंचे हैं। कहने के लिए तो लगभग हर देश में महिला आयोग है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महिला आयोग है लेकिन आज भी अनेक स्थानों पर हमारा समाज 18वीं सदी जैसे व्यवहार करता है जिसमें सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। जिन देशों में अस्थिर सरकारें हैं या जहां युद्ध हो रहा है वहां अंतर्राष्ट्रीय महिला आयोग और यूएनओ को इस तरह के कदम उठाने चाहिए जिससे महिलाओं के ही सुरक्षित रह सकें।

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