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देश पर भारी पड़ेगी यह घृणा

कोरोना की मार और इसके बाद रूस – यूक्रेन युद्ध का पड़ता वैश्विक प्रभाव देश की आर्थिक स्थिति पर काफी भारी पड़ रहा है, ऐसे में देश में चौतरफा पैदा हो रहा घृणा का माहौल हालात को लगातार पेचीदा बना रहा है। हनुमान जयंती पर देश में कई हिस्सों में हुई हिंसा चिंताजनक है। इस हिंसा के लिए अकेले किसी एक समुदाय विशेष को दोषी ठहराना उचित नहीं है। मिल रही खबरों से पता चल रहा है कि दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई घटना की जड़ में वे भड़काऊ नारे थे जिन्हें जुलूस में शामिल कुछ लोग लगा रहे थे। जुलूस जिस समय मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र से गुजर रहा था तब रमजान की इफ्तार का भी समय था। अच्छा होता यदि जुलूस सी ब्लॉक से न निकाला जाता। अब हालात नियन्त्रण में हैं लेकिन सभी समुदायों की जिम्मेदारी है कि घृणा का माहौल पैदा करने से बचा जाये। सबसे अधिक और बड़ी जिम्मेदारी पुलिस और सत्तारूढ़ दल पर आती है । पुलिस को भारी दबाव के कारण ऐसे भी कदम उठाने पड़ जाते है जिससे एक समुदाय में नाराजगी बन जाती है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। अच्छा होगा दोनों पक्ष शान्ति बनाये रखें ताकि वहां शान्ति बनाकर रखी जा सके।

इसके अलावा डासना देवी मन्दिर के महन्त यति नरसिंहानंद एक समुदाय के खिलाफ लगातार हेट स्पीच दे रहे हैं। ताजा मामला हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के मुबारिकपुर की है जहाँ इस समय धर्म संसद का आयोजन हो रहा है।वहाँ उन्होंने एक समुदाय के खिलाफ कल काफी भड़काऊ भाषण दिया है। नरसिंहानंद जैसे लोग सुनियोजित ढंग से एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं जो समाज में आपसी सद्भाव बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। इस तरह के लोग ऐसा ही काम करते रहे तो रह समाज के लिए काफी घातक होगा।

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