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आम आदमी की पकड़ से दूर शिक्षा व चिकित्सा

अब से दो दशक पूर्व तक शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था का माहौल यह था कि आम आदमी की पकड़ दोनों बुनियादी आवश्यकता देश में इस हद तक सरकारी हाथों में थी कि आम आदमी को प्राइवेट चिकित्सक या प्राइवेट स्कूल की तरफ झांकने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। वर्ष 2014 में भाजपा द्वारा केन्द्र की सत्ता संभालने के साथ ही शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में ऐसा दौर शुरू हुआ कि आज स्थिति यह है कि आम आदमी के बच्चे की पकड़ से शिक्षा और आम आदमी की पकड़ से चिकित्सा दूर होती जा रही है। शिक्षा और चिकित्सा दोनों ही क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। ऐसा नहीं था कि सरकारी व्यवस्था में अच्छे स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय, अच्छे अस्पताल नहीं थे।सरकारी क्षेत्र में शिक्षा और चिकित्सा के लिए अनेक प्रसिद्ध और अच्छी सुविधा प्रदान करने वाले संस्थान होते हुए भी एक एक कर दोनों क्षेत्रों में निजीकरण की ऐसी आंधी चलाई गई कि आज आम आदमी की. पहुंच से शिक्षा और चिकित्सा दूर होते जा रहे हैं। दिल्ली में केजरीवाल सरकार का नाम इसीलिए हो रहा है कि वहाँ उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं जिससे वहां आम आदमी के बीच उनकी लोकप्रियता बढी है, इसी बात का परिणाम है आम आदमी पार्टी को पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली सफलता।यह बात किसी से छिपी नहीं है कि निजी क्षेत्र में खुल रहे स्कूल और अस्पताल लूट के अड्डे बन गये हैं। उच्च शिक्षा धीरे धीरे निजी क्षेत्र में चली गई है जहाँ गरीब कि बच्चा झांक भी नहीं सकता, पढना तो बहुत दूर की बात है। यही हालत निजी क्षेत्र में खुल रहे अस्पतालों की है, कोई गरीब आदमी इन अस्पतालों में इलाज का खर्च एक दिन का भी नहीं उठा सकता।

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