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जीडीए के नक्शा विभाग में कभी थमने वाला नहीं खेल

गजियाबाद। जीडीए के नियोजन विभाग के अधिकारी इतने अधिक शातिर है कि साथी अवर अभियंता की पत्नी के द्वारा मेरठ मंडलायुक्त के सामने उठाए जाने वाले गड़बड़झाले के प्रकरणों को ठंडे बस्ते में डलवा दिया जाता है। जानकार बताते है कि मंडलायुक्त तक उठे प्रकरण को यदि जांच के दायरे में लाया जाता है तो निश्चित तौर से नियोजन विभाग के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज पड़ना तय है। जीडीए के सूत्रों से उजागर हुआ कि एक लंबे समय तक जीडीए के मास्टर प्लान विभाग में तैनात रहे अवर अभियंता वीके पुंडिर को एक बडी साजिश के तहत मुख्य अभियंता कार्यालय से अटैच करा दिया गया था। उस वक्त श्री पुंडिर की पत्नी के द्वारा लिखित में मेरठ मंडलायुक्त एवं जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों के सामने नियोजन विभाग में चल रहे गडबड झाले के प्रकरण को उठाया था। लेटर के माध्यम से उजागर किया था कि तत्कालीन जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा के द्वारा वीवीआईपी समूह पर बकाया डबलप मेंट शुल्क के मददेनजर लिखित आदेश दिए थे कि समूह से जुडे किसी भी भूखंड के नक्शे उस वक्त तक मंजूर नहीं किए जाए,जब तक कि पूरा डबलपमेंट शुल्क जीडीए कोष में जमा न कर दिया जाए। इसके बावजूद कुछ साथियों के द्वारा नक्शे मंजूर कर दिए गए। इसके साथ साथ जीडीए के प्लानिंग विभाग में प्राविधान है कि किसी बडे बिल्डर के नक्शे रिवाइज मंजूर करने से पहले लिखित में राष्टीय अखबार के माध्यम से आपत्ति प्राप्त कर ली जाए,बताते है कि इंदिरापुरम में बडे बिल्डर निहो समूह के नक्शे बगैर किसी तरह की आपत्ति प्राप्त किए स्वीकृत करने का विरोध किए जाने की स्थिति में उनके पति को बलि का बकरा बना दिया गया। बताते है कि देखा जाए तो सबसे बडा खेल जीडीए के नक्शा विभाग में है। नक्शे में खेल से जुडा मामला शासन में उठने के बाद तत्कालीन अधिकारियों के द्वारा अवर अभियंता कुशवाह को हटा दिया गया था,लेकिन श्री कुशवाह फिर से नक्शा विभाग में तैनाती कराने में कामयाब हो गए।

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