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ऊंचाइयों पर बने रहने की चुनौती

आज से बयालीस वर्ष पूर्व छह अप्रैल 1980 को जनता पार्टी से बाहर होकर पूर्ववर्ती जनसंघ के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी का गठन किया था। बयालीस वर्ष से अब तक के सफर का परिणाम यह है कि आज भाजपा केन्द्र में बहुत मजबूती के साथ सत्तारूढ है। भाजपा पहली बार राज्यसभा में भी सौ सदस्यों से ऊपर निकल गई है। इसके बावजूद राज्यों में भाजपा को क्षेत्रीय दलों द्वारा कड़ी चुनौती मिल रही है।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और. दिल्ली के बाद अब पंजाब में आम आदमी पार्टी ने जिस तरह भाजपा का रास्ता रोका है उससे अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अपनी सफलता के शिखर पर पहुंची भाजपा के सामने अब उन ऊंचाइयों पर टिके रहने की चुनौती है जिस ऊंचाई पर वह पहुंच गई है। दूसरा पहलू यह है कि भाजपा के सामने राष्ट्रीय स्तर की पार्टी केवल कांग्रेस है जो लगातार सिमटती जा रही है। ऐसी स्थिति में भाजपा के सामने अलग -अलग राज्यों में क्षेत्रीय दलों से निपटने के लिए रणनीति बनाने होगी। फिलहाल भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सफलता के उस शीर्ष पर बने रहने की है जहाँ वह आज पहुंच चुकी है। एक साधारण सिद्धांत है कि कोई भी व्यक्ति या संगठन के पास ऊंचाइयों तक पहुंचने की एक सीमा होती है, उसके बाद वहाँ रुके रहने की चुनौती होती है जो अत्यंत कठिन काम है। भाजपा आज उसी स्थिति में है और उसके सामने ऊंचाइयों पर टिके रहने की कठिन चुनौती है।भाजपा नेतृत्व इस समय वह नहीं है जो भाजपा के स्थापना के दौरान था। भाजपा नेतृत्व आज बहुत मजबूत है, वहाँ नेतृत्व के फैसले के खिलाफ कोई भी आवाज उठाने वाला नहीं है। इसके बावजूद इस समय जो आर्थिक संकट वैश्विक स्तर पर बनता जा रहा है वह एक बड़ा संकट है। इस संकट की घड़ी में सबसे बड़ी चुनौती के दौर से गुजरना पड़ेगा भाजपा को।

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