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वह अस्पताल भी बन जाएगा बूचड़खाना!

बूचड़खाना शब्द कुछ लोगों को बड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह कड़वी सच्चाई है कि सरकारी निजाम के हाथों में चल रहे जिले के अस्पतालों की हालत बूचड़खाने से कम नहीं है। पिछले 5 वर्ष गाजियाबाद शहर के विधायक अतुल गर्ग चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए भी गाजियाबाद के स्वास्थ्य संबंधी ढांचे में कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं कर पाए। अब एक और अस्पताल जिले के स्वास्थ्य विभाग को सौंपने की तैयारी की जा रही है जो एक ऐसा फैसला है जो बहुत लोगों को पच नहीं पा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अधीन मुरादनगर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में 50 बेड का अस्पताल संचालित होता है जिसमें अधिकांशतः आर्मी के मेजर रैंक के अधिकारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के तौर पर कार्य करते रहे हैं। बाकी नर्सिंग स्टाफ भी इस अस्पताल में आर्मी द्वारा भर्ती किया गया ही तैनात होता रहा है। पिछले दिनो कर्मचारियों के भारी विरोध के बावजूद भारत सरकार ने सभी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को निगम में विभाजित कर दिया। मुरादनगर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में 20,000 से अधिक लोग काम करते थे आज वहां लगभग ढाई हजार कर्मचारी ही कार्यरत हैं। एक समय मुरादनगर क्षेत्र के लोगों के रोजगार का यह फैक्ट्री बड़ा साधन थी। इस फैक्ट्री में संचालित अस्पताल में बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध होती थी। जो स्वास्थ्य विभाग वर्तमान अस्पतालों में अच्छी सुविधा नहीं दे पा रहा है उसी स्वास्थ्य विभाग को ऑर्डिनेंस फैक्ट्री स्थित अस्पताल भी सौंपा जा रहा है।
वर्तमान अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक और बाकी स्टाफ नहीं है। चिकित्सा से संबंधित आधुनिक मशीनों का भी अस्पतालों में भारी अभाव है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि एक अच्छे ढंग से संचालित अस्पताल की हालत भी ऐसी ही हो जाएगी जैसी बाकी अस्पतालों की है।

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