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21 वीं सदी में सोशल मीडिया हम सब की आवयश्कता बन गया है। covid के बाद से स्त्रियों का सोशल मीडिया उपयोग और भी ज़्यादा बढ़ गया है।

21 वीं सदी में सोशल मीडिया हम सब की आवयश्कता बन गया है। covid के बाद से स्त्रियों का सोशल मीडिया उपयोग और भी ज़्यादा बढ़ गया है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या व्यवसाय, मनोरंजन, नौकरी, बैंकिंग, एक्टिविज्म का..सोशल मीडिया से दूर रहना सम्भव नहीं है।
फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, कू, यूट्यूब आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं की उपस्थिति बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया पर जैसे-जैसे स्त्रियों की उपस्थिति बढ़ रही है, वैसे ही उनकी अस्मिता पर ख़तरे भी बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन classes के चलते छात्राओं- शिक्षिकाओं तक को कई बार अभद्र टिप्पणी का सामना करना पड़ता है।

सोशल मीडिया एक मज़बूत मंच के रूप में उभर रहा है, लेकिन इस मंच पर महिलाओं को आये दिन न जाने कितने ही आघात झेलने पड़ते हैं। आजकल Social Media स्त्री शोषण का प्रमुख माध्यम बन चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर स्त्री विरोधी गतिविधियां बढ़ने के कारण इस विषय पर गहन चिंतन की आवश्यकता महसूस करते हुए, पावन चिंतन धारा आश्रम के स्त्री प्रकल्प सनातन वीमेन द्वारा इंटरनेशनल वीमेंस डे के उपलक्ष्य में 6 मार्च, 2022 (रविवार) को एक Webinar का आयोजन किया गया, जिसका विषय था, “सोशल मीडिया और स्त्री अस्मिता पर मंडराते ख़तरे”।

टीम सनातन वीमेन द्वारा स्त्री अधिकारों के लिए समय-समय पर सेमिनार, कांफ्रेंस, हेल्थ चेक आप कैम्प्स आदि आयोजित किये जाते हैं। कल का वेबिनार भी उसी श्रंखला का एक हिस्सा है।
इस वेबिनार में डॉ. शैलजा निगम जी (इंस्पेक्टर, यू.पी.पी.) एवं डॉ. ज्योति त्रिपाठी जी (आई.टी. एक्सपर्ट) वक्तागण के रूप में उपस्थित रहे तथा इस विषय के कारण एवं समाधान पर विस्तार से प्रकाश डाला। सोशल मीडिया पर स्त्री के साथ कौन से अपराध होते हैं? उनकी रोकथाम के लिए कौनसे क़ानूनी प्रावधान हैं और टेक्नोलॉजी के तहत कौन से ऐसे तरीक़े हैं जिनके माध्यम से हम सोशल मीडिया पर होने वाले स्त्री विरुद्ध अपराधों को कम कर सकते हैं आदि महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।
स्त्री को सोशल मीडिया पर किस प्रकार सतर्कता बरतते हुए काम करना चाहिए, इसके बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
UP पुलिस में इंस्पेक्टर ,डॉ शैलजा निगम जी ने बताया कि सोशल मीडिया पर साइबर क्राइम के जो केसेस आ रहे हैं उनमे अपराध मुख्यतः फेक I’d से किये जाते हैं। उन्होंने बताया कि cyber crime करना बहुत आसान है क्योंकि यहाँ क्रिमिनल बिना सामने आए, क्राइम कर सकता हैं। शैलजा निगम जी ने साइबर क्राइम की शिकायत के बारें में बताया कि उत्तर प्रदेश में 18 थाने खोले गए हैं और भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने भी NCCR तथा CERT portal बनाये गयें हैं। इन portal से महिला helpline number भी जारी किए गए हैं। शैलजा जी ने IT act की महत्वपूर्ण धाराएं भी बताई।

वेबिनार की दूसरी स्पीकर डॉ. ज्योति त्रिपाठी जी (आई.टी. एक्सपर्ट) का कहना है कि हमें सिर्फ ये नही देखना है कि महिलाओं के साथ कौन से सोशल मीडिया पर अपराध हो रहे है बल्कि ये भी जानना चाहिए कि इन अपराधियो की fundings कौन कर रहे है, इन्हें हथियार कौन दे रहा है। क्यों, हमें इतने Apps ,इतना data free दिया जा रहा है। हम filtration लगाए, जागरूक़ता से किसी app का प्रयोग करें। अपनी सरकार से भी कहें कि हमे हमारे देश के apps ही दिए जाएं, विदेशी नहीं।
अंत में भारतीय शोध एवं ज्ञान संस्थान की डायरेक्टर एवं सनातन वीमेन टीम की मार्गदर्शिका गुरुमां डॉ. कविता अस्थाना जी ने कार्यक्रम के विषय की सारगर्भिता के बारे में बताया।
कविता जी ने आश्रम व्यवस्था के बारे में भी बताया, की किस प्रकार आश्रम ऐसे युवाओं का निर्माण करते हैं जो अपने संस्कृति और देश से प्यार करने वाले हों। गुरुमां ने महिलाओं से भी आवाहन किया कि वो अपने देश और संस्कृति की रक्षा हेतु आगे आएं और इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का प्रयोग करें।

अंत में वेबिनार से जुड़े ऑडियंस ने वक्ताओं से प्रश्न पूछे और संतोषजनक उत्तर भी प्राप्त किये। देश-विदेश से बड़ी संख्या में स्त्री-पुरुषों ने इस वेबिनार में सम्मिलित हो, इसे सफ़ल बनाया। अमेरिका, सिंगापुर से भी महिलाओं ने कार्यक्रम में पार्टिसिपेट किया। आइए हम इस इंटरनेशनल वीमेन डे पर संकल्प लेते हैं कि सोशल मीडिया को स्त्रियों के लिए सुरक्षित बनाएंगे।

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