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सरस मेले में शनिवार को रही चहल-पहल

तेलंगाना तमिलनाडु तथा आंध्रप्रदेश के उत्पाद बने आकर्षण का केंद्र

नोएडा :- केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा सेक्टर 33 ए स्थित नोएडा हाट मैं आयोजित सरस मेले में शनिवार को खासी चहल-पहल रही। यहां नोएडा वासियों ने परिवार के साथ जमकर खरीदारी की और विभिन्न प्रदेश के उत्पादों को सराहा भी। वही तेलंगाना, तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश के उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने रहे। मेले में सभी राज्यों के स्टॉल का प्रबंधन राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के सुरेश प्रसाद ने संभाला है।
सरस मेले में तेलंगाना राज्य के नलगोटा से संभावना संगम स्वयं सहायता समूह ने स्टॉल लगाया है। समूह का संचालन रानी करती है। इनके हस्त निर्मित उत्पादों में पर्स, हैंगिंग मैटेरियल, डेकोरेशन मैटेरियल, जर्मन मेटल की ज्वेलरी नोएडावासियों को अधिक पसंद आ रही हैं। जबकि अन्य उत्पादों में दुपट्टे, गले का पेचेस, स्कर्ट, शाल तथा बेडशीट शामिल है। तेलंगाना के ही नलगुंडा के झांसी लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह के उत्पादों में ऑटम वैली बेडशीट, रनिंग मटेरियल, टॉवल तथा कॉटन मास्क शामिल है। वहीं शकी लक्ष्मी द्वारा संचालित हरिथा स्वयं सहायता समूह ने इक्का कॉटन साड़ी, बेडशीट तथा सूट के कपड़े का स्टॉल लगाया है।
तमिलनाडु के मधुरई से सुकीलाड द्वारा संचालित थूलासी माकालिर कुलु स्वयं सहायता समूह के उत्पाद में कॉटन साड़ी, ज्वेलरी तथा जूट बैग की जमकर खरीदारी की जा रही है। तमिलनाडु के ही चित्रा देवी द्वारा संचालित मदर टेरेसा स्वयं सहायता समूह के उत्पादों में पंचधातु ज्वेलरी, सिल्क कॉटन साड़ी, जूट प्रोडक्ट तथा रेक्सीन बैग आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। साथ ही मधुरई के एक अन्य मीना स्वयं सहायता समूह का संचालन सरिदा करती है,ं इनके उत्पादों में पायल, तांबे के कड़े, रुद्राक्ष, अंगूठी, तुलसी माला तथा क्रिस्टल माला आदि उत्पाद शामिल हैं, जिनकी मांग दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।
आंध्र प्रदेश से कृष्णा जिले की जगनमोहन ने श्री स्वयं सहायता समूह के उत्पादों को मेले में उतारा है। जिन की विशेषता कलमकारी तथा हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग है। इमेज ड्रेस मटेरियल, मलमल कॉटन साड़ी, सूट, मलवार सिल्क साड़ी तथा चेन्नूर सिल्क साड़ी शामिल है। कुरनूल जिले की एसतेरी रानी द्वारा संचालित सितारा स्वयं सहायता समूह नें जूट बैग, स्कूल बैग, चूडि़यां तथा कड़े का स्टॉल लगाया है। गुंटुर कि श्रीषा अपनी 10 सदस्यों के साथ वीर ब्रह्मेंद्रा स्वामी स्वंय सहायता समूह का संचालन करती हैं। इनके उत्पादों में लेदर बैग तथा सॉफ्ट टॉयज लोगों को लुभा रहे हैं। वहीं दयावती द्वारा संचालित सूर्यप्रभा स्वयं सहायता समूह के उत्पादों में हाथ से बनी वुड नक्काशी की मूर्तियां तथा सजावट का अन्य सामान लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के शोध अधिकारी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि देशभर के सभी सहायता समूह की सभी सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। जिसके लिए संस्थान के सहायक निदेशक चिरंजी लाल कटारिया निरंतर प्रयासरत है।

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