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सामान्य विधानसभा सभा चुनाव संपन्न होते ही नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियां तेज

उस्मानिया खातून चेयर मैन पर्सन

फहीम अहमद नेता

गुफरान अहमद

 

 डा नजर अंसारी
लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश सामान्य विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियां तेज हो रही है गलियों में दुकानों पर चाय की चुस्कियां लेते हुए लोग विधानसभा चुनाव परिणाम पर जहां एक तरफ चर्चा कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कौन बनेगा चेयरमैन को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं देखी जा रही है ।कहीं कहीं पर जातिगत आंकड़ों को लेकर बहस बाजी चल रही है, तो कहीं पर पार्टियों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, तो कहीं पर व्यक्तित्व को लेकर तरह-तरह की बातें होनी शुरू हो गई है, तो कहीं कहीं पर पिछले नगर पंचायत के कार्य कालो को लेकर लोगों में बहस बाजी हो रही है। किस किस प्रत्याशी का कार्यकाल कैसा रहा। बहराल लखीमपुर शहर हो या लखीमपुर के नगर पंचायत क्षेत्र हो हर जगह इसी तरह की चर्चाएं आम होती नजर आ रही हैं। नगर पंचायत क्षेत्र खीरी की बात करें तो कस्बा खीरी में मौजूदा समय में श्रीमती सुधा निषाद जी नगर अध्यक्ष की सीट पर विराजमान है उनका पंचवर्षीय कार्यकाल समाप्त होने की कगार पर है उनके कार्यकाल के विषय में टीका टिप्पणी होना स्वाभाविक ही है लेकिन इसके अलावा पूर्व में रह चुके नगर अध्यक्ष के कार्य कालो की भी चर्चाएं हो रही है। यूं तो माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में भी नगर पंचायत एवं नगर पालिका चुनाव का रंग ऐसा देखा गया ।विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के साथ समर्थन में आगे पीछे दाएं बाएं नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव का रंग साफ तौर पर देखा गया। विधानसभा चुनाव में लोगों ने पूरी तरह से नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव की तैयारियां दर्ज करवाई।अगर नगर पंचायत क्षेत्र खीरी की बात करें तो नगर पंचायत क्षेत्र में लगभग दो दशकों से शहर की 70 हजार जनता की रहनुमाई और उसके भविष्य का फैसला लेने की कुर्सियों पर जो लोग विराजमान होते रहे उनकी कार्यशैली ओं पर जगह-जगह चर्चाएं तेजी से हो रही है। लोगों का कहना है कि वर्तमान नगर अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान सुधा निषाद का कार्यकाल विगत दो दशकों में सभी पूर्व नगर अध्यक्षों की अपेक्षा काफी पुअर देखा गया। इनके पहले का कार्यकाल जो समाजवादी पार्टी के नेता फहीम अहमद का था उनका दौर विकास से परिपूर्ण रहा उनके कार्यकाल में शहर में जमकर सड़कें और गलियों का निर्माण कराया गया। हालांकि लोगों का यह भी कहना है कि हर पंचवर्षीय में सड़के और नालियां का ही निर्माण कराया जाता है उसके अलावा शहर को विकास की गति नहीं मिल पा रहीं है। हर बार उन्ही सड़कों एवं नालियों के निर्माण में पांच वर्ष बीत जाते है। बहरहाल वर्तमान नगर अध्यक्ष कें कार्यकाल की अपेक्षाकृत लोग पूर्व चेयरमैन का कार्यकाल विकास की दृष्टि से बेहतर मान रहे हैं, वहीं अगर फहीम अहमद के पहले चेयर पर्सन उस्मानिया खातून का कार्यकाल प्रशासनिक व्यवस्था और अनुशासन की दृष्टि से बेहतर माना जा रहा है। लोगों का यह कहना है मोहतरमा उस्मानिया खातून का कार्यकाल अनुशासन की दृष्टि से बेहतर रहा उनके दौर में नगर पंचायत क्षेत्र की जनता और क्षेत्र का विकास बेहतर तरीके से हुआ ही उसके अलावा सड़के नालियों के निर्माण के अलावा कई ऐसे भी काम हुए जो अनुशासित एवं निर्णय लेने में सक्षम व्यक्ति ही कर सकता था जैसे पावर हाउस का निर्माण, शहर में नगर पंचायत की जमीन पर होने वाले अवैध कब्जे, अथवा अतिक्रमण का मामला हो।नगर पंचायत प्रशासन पूरी तरह से अनुशासित होकर नियम बद्ध काम करता रहा उनके विषय में प्रमुखता से जो बात आ रही है कि उस्मानिया खातून ने नगर पंचायत क्षेत्र की जनता के और नगर पंचायत क्षेत्र के विकास और भलाई के लिए कभी भी किसी से कोई समझौता नहीं किया उनका कार्यकाल लगभग दो दशकों में सभी नगर अध्यक्षों की अपेक्षा अनुशासन एवं निर्णय लेने में बुद्धिमत्ता के कारण बेहतर माना जा रहा है। कहा यह भी जाता है नगर पंचायत कार्यालय में अपनी समस्याओं को लेकर आने वाले किसी भी नागरिक को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था, तत्काल कृत कार्रवाई से नगर अध्यक्ष को अवगत भी कराया जाता रहा है। उनके बारे में ज्यादातर शहर में जो राय निकल कर आ रही है नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर ऐसे ही शख्स की जरूरत भी है जिसका नियंत्रण नगर पंचायत प्रशासन पर हो और जिसमें दृढ़ता के साथ क्षेत्र और क्षेत्र की भलाई के लिए निर्णय लेने की क्षमता भी हो। हालांकि लोगों में कई बार यह भी बात भी हो रही है कि अगर उनका कार्यकाल जनता और क्षेत्र की भलाई के लिए सराहनीय रहा, सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता और शक्ति के साथ सकारात्मक ऊर्जा का दौर रहा तो फिर चुनाव में उनकी हार की वजह पर भी चर्चाएं हो रही है। लोग खुद ही इस बात का जवाब देते हुए भी नजर आ रहे हैं चुनाव की चुनाव हारने की वजह जो समाज में चर्चा का विषय है उनमें कई बुद्धिजीवी वर्ग के लोग उनकी कुछ आप सी दरार ही मान रहे हैं कस्बे के लोगों ने तो उनके कार्यकाल की सराहना की लेकिन। शायद दरार ने उनको उस कुर्सी तक पहुंचने से महरूम कर दिया, हालांकि इस संबंध में उस्मानिया खातून से भी बात की गई तो उन्होंने बताया चुनाव हारने की वजह आपसी दरार या जनता का कम समर्थन जैसा कोई मसला नहीं रहा। उन्होंने कहा कि शहर के लोगों ने मुझे भरपूर समर्थन दिया, और हमारे अपनोमें भी किसी तरह की दरार नहीं रही, लेकिन वो शहर की सबसे महत्वपूर्ण सीट है उस सीट पर इस बार मुझे पहुंचना शायद कुदरत को मंजूर नहीं था इसीलिए मैं नहीं पहुंच पाई ।मुझे इस बात पर पूरा यकीन और भरोसा है कि शहर के नागरिकों ने मुझे हर बार समर्थन दिया है।
उस्मानिया खातून के पहले का कार्यकाल पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष गुफरान अहमद साहब का था गुफरान अहमद साहब ने लगातार 10 वर्षों तक शहर की महत्वपूर्ण कुर्सी की शोभा बढ़ाई, उनके कार्यकाल में लोगों का कहना है की विकास की दर 0 रही लेकिन 10 वर्ष तक शहर में वातावरण बहुत ही शांत में रहा कुछ लोगों का यह भी कहना है कि गुफरान साहब का कार्यकाल स्वयं उनका नहीं था उनका कार्यकाल किसी की के सहारे चल रहा था। कुछ लोगों का यह भी कहना है ,उनके दौर में विकास के लिए शासन की तरफ से ज्यादा धन का आवंटन भी नहीं होता था। नगर पंचायत को विकास के लिए स्वयं ही धन इत्यादि की व्यवस्था करनी होती थी। उन्होंने अपने प्रयास से शहर की आबोहवा को बेहतर बनाए रखा हालांकि उसके बाद से तीन बार चुनाव हुए एक बार तो उन्होंने स्वयं लड़ा ही नहीं था, और फिर लगातार दोनों चुनाव में वह शिकस्त खाते रहे उसकी वजह शहर में लोग अलग-अलग तरीके से बयान करते हुए नजर आ रहे हैं। समाचार संकलन तक गुफरान अहमद से मुलाकात नहीं हो पाई।
इन दो दशकों में सभी के कार्यकाल में लोगों की जुबान पर उस्मानिया खातून का कार्यकाल अनुशासित, क्रमबद्ध, नियम वध एवं विकास के क्षेत्र में भी अच्छे पायदान पर बताया जा रहा है। आगामी नगर पंचायत चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहे हैं ।2 दर्जन से अधिक इस बार भी कस्बा खीरी की 70 हज़ार जनता के भाग्य का फैसला करने की अपने अपने अंदर बेहतरीन सलाहियत होने का दावा ठोकने वाले हैं।
अब देखना यह है कि आगामी नगर पंचायत चुनाव में खीरी की नगर की जनता इन लोगों के कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए इनमें से ही किसी व्यक्ति का चुनाव करती है ।या फिर कोई ऐसा व्यक्ति जो हर बार सड़क के निर्माण और नाली निर्माण में पंचवर्षीय समाप्त कर देने में लगा देने वाले लोग हो ।या इन कामों के साथ-साथ शहर और शहर वासियों के सम्मान और शहर के भविष्य के बारे में भी बेहतर समझ रखते हो ,ऐसे व्यक्ति का चुनाव करेगी। यह तो आने वाला समय ही बताएगा अगर शहर के कुछ बुद्धिजीवी वर्ग की बात माने तो उनका कहना है आगामी नगर पंचायत चुनाव में दिल्ली की जनता रात बिरादरी के नाम पर अपना रहनुमा चलेगी और ना ही किसी झूठे वादों में फस कर हर बार की तरह इस बार भी धोखा खाएगी। उन लोगों का मानना है कि आगामी चुनाव में ऐसे व्यक्ति का चुनाव करेगी जिसको वर्तमान एवं भविष्य की भी समझ रखने की और उस पर फैसला लेने की सलाहियत होगी।

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