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लखीमपुर सदर सीट से बसपा प्रत्याशी मोहन बाजपेई एक लोकप्रिय व्यक्तित्व

लखीमपुर खीरी लखीमपुर खीरी में आगामी विधानसभा चुनाव 23 फरवरी को होने हैं सभी प्रत्याशी दमखम के साथ क्षेत्र में तूफानी दौरा कर रहे हैं और जनसंपर्क में अपनी खूबियां गिना रहे हैं लेकिन जनता में भी इस बात की बहुत बड़ी चिंता है लखीमपुर सदर विधानसभा क्षेत्र का रहनुमा एक सामाजिक व्यक्तित्व इंसानियत से भरा हुआ हृदय रखने वाला व्यक्तित्व होना चाहिए या मां बहन बेटियों की गाली देने वाला बहन बेटियों का अपमान करने वाला और गुंडागर्दी के दम पर वोट मांगने वाला नेता हो या परिवार एंड कंपनी की विरासत को संभालने वाला क्षेत्र का रहनुमा हो ।जनता बहुत बड़े असमंजस में है इस तरह की छवि रखने वाले नेताओं में जिस व्यक्तित्व का चुनाव होना चाहिए वह सिर्फ क्षेत्र की जनता की भलाई और क्षेत्र की खुशहाली व आगामी पीढ़ियों के लिए बेहतर सोच और नजरिया वाला होना चाहिए ।इन तमाम पहलुओं पर गौर करने पर बसपा प्रत्याशी मोहन बाजपेई की तस्वीर ही उभर कर सामने आती है। चाहे इंसानियत की सेवा हो या आपातकालीन स्थिति में तन मन धन से अपने और अपने परिवार का जीवन दांव पर लगाना हो, चाहे मां बहन बेटियों के सम्मान का मसला हो ,या क्षेत्र के भविष्य के बारे में सूझ बूझ का मौका हो इन तमाम बातों में मोहन बाजपेई का ही व्यक्तित्व उभर कर सामने आता है। लोगों में इन तमाम बातों पर चर्चाएं हो रही हैं क्षेत्र की जनता ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी और भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान विधायक और प्रत्याशी की कार्यप्रणाली को अच्छी तरह समझ और परख लिया है। जनता का नजरिया इन दोनों प्रत्याशियों से मोहन बाजपेई के हाथों में क्षेत्र की बागडोर सोपना चाहती है लखीमपुर शहर की अगर बात करें तो जब शहर में कुछ नापाक साजिशों के तहत अफरा तफरी का माहौल था, शहर जलने की कगार पर था, संप्रदायिक दंगा ने एक भयंकर रूप लिया हुआ था, एक समुदाय के प्रतिष्ठानों पर तोड़फोड़ किए जा रहे थे ,उस वक्त शहर की गरिमा और शहर की मर्यादा को सर माथे रखते हुए मोहन बाजपेई ने उपद्रवी ताकतों से सीना तान कर मुकाबला किया था और शहर को आगजनी से बचाया था और हिंदू मुस्लिम एकता का संदेश फैलाकर अमन और शांति की तरफ शहर को मोड़ा था ।मोहन बाजपेई इस तरह की सेवाएं लखीमपुर शहर के बच्चे बच्चे की जबान पर हैं और शहर की हर समाज की जनता यह समझ चुकी है चाहे आपातकालीन स्थिति हो, या करोना जैसी महामारी में संकट से जूझ रही इंसानियत हो,चाहे भूख और प्यास से तड़प रहे गरीबों के बच्चे और गरीबों के परिवार हो हर मौके और हर मोड़ पर मोहन बाजपेई ही एक दूसरे का दुख और दर्द बांटते हुए नजर आए । यदि क्षेत्र की बात करें तो गांव गांव और गली गली में चौपालों में सदर विधानसभा सीट से लगभग एक दर्जन प्रत्याशियों में सुर्खियों में चल रहे चार प्रत्याशी मैं सबसे लोकप्रिय और कर्मठ भविष्य की गहरी सोच और पकड़ रखने वाले मोहन बाजपेई का व्यक्तित्व दिखाई पड़ता है ।मोहन बाजपेई की बातों में समाज और इंसानियत का दर्द झलकता है। कुछ बड़े बुजुर्गों का कहना है क्षेत्र की भलाई और क्षेत्रवासियों की खुशहाली इस बार सभी प्रत्याशियों में अगर किसी के हाथों में सुरक्षित है तो वह सिर्फ मोहन बाजपेई के ही हाथों में क्षेत्र में हो रही चर्चाओं से यह स्पष्ट है की जनता मौजूदा विधायक और पूर्व विधायक की कार्यशैली और से पूरी तरह संतुष्ट है। क्षेत्र में हो रही चर्चाओं से ऐसा माना जा रहा है क्षेत्र की भलाई और क्षेत्र की खुशहाली सिर्फ और सिर्फ मोहन बाजपेई के हाथों में ही संभव है इतना ही नहीं क्षेत्र की महिलाओं के हुजूम और उनके मुख से मोहन बाजपेई के लिए आशीर्वाद स्वरुप निकल रहे शब्दों से यह पता चलता है कि महिलाएं भी वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक की कार्यशैली से काफी असंतुष्ट हैं। मोहन बाजपेई कोही सदर विधानसभा 142 से विधायक बनाना चाहते हैं ।क्या वास्तव में इस बार सदर विधानसभा सीट से भाजपा और सपा को पीछे छोड़ कर बसपा प्रत्याशी मोहन बाजपेई आगे निकल जाएंगे यह 10 मार्च को ही पता चल पाएगा।

 

 

ब्यूरो रिपोर्ट डॉक्टर नजर अंसारी

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