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“स्वाधीनता आंदोलन में आर्य समाज का योगदान” पर संगोष्ठी सम्पन्न

स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास आर्य समाज के बिना अधूरा है -डॉ. राकेश कुमार आर्य

 

 

आर्य समाजी होने का अर्थ ही देशभक्त होना है -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाजियाबाद केंद्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में कोरोना काल मे चल रही वेबिनरो की श्रखला में 345 वां वेबिनार सम्पन्न हुआ।

मुख्य वक्ता डॉ. राकेश आर्य (सम्पादक,उगता भारत) ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन में आर्य समाज का योगदान अप्रतिम है उसके बिना अधूरा रहेगा।उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद,स्वामी विरजानंद,स्वामी पूर्णानंद,स्वामी ओमानंद जैसे महान तपस्वी और वैदिक संस्कृति के प्रति निष्ठावान सन्यासियों ने 1857 की क्रांति की भूमिका तैयार की थी।महर्षि दयानंद ने 1857 की क्रांति में बढ़-चढ़कर योगदान दिया था ।उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई,तांत्या टोपे,धन सिंह कोतवाल जैसे अनेकों क्रांतिकारियों को क्रांति के लिए तैयार किया था।उससे पहले स्वामी जी महाराज ने माउंट आबू से लेकर हरिद्वार तक की पैदल यात्रा की थी।जिसमें उन्होंने जन जागरण का अभियान चलाया था।डॉ आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद के ओजस्वी विचारों और बौद्धिक चातुर्य के कारण ही 1873 में चित्तौड़ अंग्रेजों के अधीन होने से बचाई जा सकी थी। 1875 में ऋषि दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की तो अंग्रेज अधिकारी ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना आर्य समाज के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए की।श्री आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद के विचारों का प्रभाव श्यामजी कृष्ण वर्मा जैसे क्रांतिकारी पर पड़ा।ऋषि दयानंद के शिष्य श्यामजी कृष्ण वर्मा के विचारों से प्रेरित होकर सावरकर और उन जैसे अनेकों क्रांतिकारी तैयार हुए।इसी प्रकार दादा भाई नौरोजी,महादेव गोविंद रानाडे और नरम दल व गरम दल के कांग्रेसी नेताओं पर भी किसी ना किसी प्रकार से महर्षि दयानंद के विचारों का प्रभाव पड़ा।डॉक्टर आर्य ने कहा कि आर्य समाज ने अपने तत्कालीन नेता महात्मा हरण स्वामी और महात्मा आने जी जैसे क्रांतिकारी सन्यासियों के नेतृत्व में हैदराबाद के निजाम के विरुद्ध 1938 – 39 में सफल आंदोलन चलाया था।जिसमें वीर सावरकर और हिंदू महासभा ने भी उनका सहयोग किया था। ऋषि दयानंद के परम शिष्य और आर्य समाज के बड़े नेता स्वामी श्रद्धानंद जी महाराज और हिंदू महासभा के पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे नेताओं ने मिलकर आजादी की लड़ाई को ऊंचाई प्रदान की थी।उन्होंने कहा कि आज आर्य समाज को अपने अतीत को समझ कर वर्तमान को संभालने की आवश्यकता है। जिसके चलते ही हम उज्जवल भविष्य की कामना कर सकते हैं।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि उस समय हर आर्य समाजी देश की आजादी के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा था इसलिए आर्य समाज का अर्थ ही देशभक्ति हो गया था।कोर्ट में भी सत्य का इतना प्रभाव था कि आर्य समाजी की गवाही को प्रामाणिक माना जाता था कि यह असत्य नहीं बोलेगा।आज वही तड़फ,जज्बा पैदा करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने भी कहा कि आर्य समाज से प्रेरणा लेकर अनेको नोजवान आजादी की लड़ाई में कूद पड़े़ ।

मुख्य अतिथि आनन्द सिंह आर्य (प्रधान,आर्य केन्द्रीय सभा करनाल) व आर्य समाज हापुड़ के संरक्षक आनन्द प्रकाश आर्य ने भी आर्य समाज के योगदान की चर्चा की।

गायिका प्रवीना ठक्कर,दीप्ति सपरा,रविन्द्र गुप्ता,के के यादव,कुसुम भंडारी,सुमित्रा गुप्ता 90 वर्षीय,कमलेश चांदना,स्वतंत्र कुकरेजा आदि ने देशभक्ति गीत सुनाये ।

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