Breaking Newsउत्तर प्रदेशराष्ट्रीयहमारा गाजियाबाद

गाजियाबाद सीट पर चौतरफा चुनाव में उलझे सभी समीकरण

विकास, शिक्षा, चिकित्सा बेरोजगारी के मुद्दे गौण, जातीयता हावी

आप अभी तक
गाजियाबाद। गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट पर चौतरफा चुनाव में हार और जीत के सभी समीकरण उलझ कर रह गए हैं। चुनाव में सभी महत्वपूर्ण मुद्दे दूर कहीं पर्दे के पीछे चले गए हैं जबकि जातीयता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
गाजियाबाद विधानसभा सीट पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने वैश्य जाति के अतुल गर्ग पर ही दांव लगाया है जबकि सपा रालोद गठबंधन से अनारक्षित सीट पर एससी जाति से विशाल वर्मा को टिकट दिया गया है। बसपा ने यहां भाजपा से दल बदल कर आए के के शुक्ला को मैदान में उतारा है तो कांग्रेश ने अपने पूर्व सांसद स्वर्गीय सुरेंद्र प्रकाश गोयल के पुत्र सुशांत गोयल पर विश्वास व्यक्त किया है। इस सीट पर ब्राह्मण, वैश्य, दलित, मुस्लिम और पंजाबी मतदाता लगभग बराबर बराबर संख्या में हैं। वैश्य मतदाताओं में अतुल गर्ग और सुशांत गोयल बराबर की लड़ाई लड़ रहे हैं। किसी भी प्रमुख दल का उम्मीदवार मुस्लिम न होने के कारण माना जा रहा है कि मुस्लिम मत सपा रालोद गठबंधन के प्रत्याशी विशाल वर्मा को जाएगा। मुस्लिम मतों में सुरेंद्र प्रकाश गोयल का अच्छा दखल था यह समय बताएगा कि सुरेंद्र प्रकाश गोयल के समर्थक मुस्लिम मतदाता उनके पुत्र को वोट देते हैं या नहीं।
दलित मतदाताओं में विभाजन होना तय है। केके शुक्ला बसपा उम्मीदवार हैं और गठबंधन प्रत्याशी विशाल वर्मा जाटव है ऐसे में माना जा रहा है कि ज्यादा मतदाताओं में विभाजन होगा, विभाजन कितना होगा यह अभी नहीं कहा जा सकता। ब्राह्मण मतदाताओं में के के शुक्ला बड़ी सेंध लगा रहे हैं जो सीधे तौर पर भाजपा प्रत्याशी अतुल गर्ग के लिए खतरे की घंटी होगी। कांग्रेश के सुशांत गोयल अतुल गर्ग के लिए ही खतरा बनेंगे।
यहां दो बड़े फैक्टर चुनाव को प्रभावित करेंगे। हिंदुओं की अति पिछड़ी जातियां पिछले चुनाव से ही भाजपा के साथ हैं। इस सीट पर जो भी प्रत्याशी मैदान में हैं वह सीधे तौर पर अति पिछड़ी जातियों को प्रभावित नहीं करते। चुनाव समीक्षकों का मानना है कि अति पिछड़ी जातियां अधिकांश तौर पर भाजपा के साथ ही जा सकती हैं। दूसरा फैक्टर लाइनपार क्षेत्र है जिसके सम्मान के नाम पर के के शुक्ला मैदान में हैं। केके शुक्ला यदि लाइनपार क्षेत्र को साध लेते हैं तो दलित मतदाताओं के साथ मिलकर वह एक बड़ी ताकत बनकर उभरेंगे।
यह एक ऐसा दृश्य है जो चुनावी समीकरणों को पूरी तरह उलझा रहा है। कोई भी उम्मीदवार विश्वास के साथ यह नहीं कह सकता कि जीत उसकी होगी। पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा प्रत्याशी अतुल गर्ग को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है लेकिन बाकी तीनों दलों के बीच इस तरह मतों का विभाजन है कि यह नहीं कहा जा सकता कि मुकाबले में कौन सा प्रत्याशी मजबूत होकर अतुल घर के सामने खड़ा होगा।पंजाबी मतदाता हर बार अपने लिए टिकट मांगता है लेकिन उसकी यह मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है। पंजाबी मतदाता पूरी तरह मौन है और उसका यह मौन यदि भाजपा के विरोध में फूट गया तो अतुल गर्ग के लिए नुकसानदेह साबित होगा। फिलहाल इस सीट का परिदृश्य इस तरह उलझा है कि किसी तरह की भविष्यवाणी करना खतरे से खाली नहीं होगा।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close