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संघ पृष्ठभूमि से आए के के शुक्ला कितने दिन रहेंगे बसपा में?

भारतीय जनता पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर रहे और इस समय भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ क्षेत्रीय उपाध्यक्ष पद पर मौजूद संघ पृष्ठभूमि से आए केके शुक्ला बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए हैं। केके शुक्ला बसपा की विचारधारा से प्रभावित होकर शामिल नहीं हुए हैं बल्कि उनका विरोध भाजपा नेतृत्व से अतुल गर्ग को टिकट देने को लेकर रहा है। अतुल गर्ग का टिकट होने के विरोध में ही केके शुक्ला ने भाजपा छोड़ी है। केके शुक्ला का मुख्य उद्देश्य भाजपा के संगठित वोटों और लाइनपार क्षेत्र के अपने वोटरों को एकजुट कर अतुल गर्ग को हराना है। बहुजन समाज पार्टी के खेमे में भी यह बात उठ रही है कि संघ विचारधारा से जुड़े रहे केके शुक्ला आखिर कब तक बहुजन समाज पार्टी में रहेंगे। इससे पूर्व भारतीय जनता पार्टी छोड़कर बलदेव राज शर्मा भी बसपा में शामिल हुए थे। श्री शर्मा भी लंबे समय तक खुद को बसपा में टिकाए रखने में कामयाब नहीं हो पाए और अंततः वे एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी में वापस चले गए। यही बात के के शुक्ला को लेकर भी खड़ी हो रही है कि आखिर किस उद्देश्य को लेकर बसपा नेतृत्व ने उन्हें पार्टी में शामिल किया। बसपा नेतृत्व के ऐसे ही फैसलों के कारण पार्टी के कैडर वोट बैंक में बिखराव होने लगा है। पार्टी का आम कार्यकर्ता भी यह सवाल उठा रहा है कि आखिर ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल क्यों किया जा रहा है जो बसपा में अपने हितों को साधने के लिए ही शामिल हो रहे हैं।
महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि आखिर चुनाव के बाद भी परिणाम चाहे कुछ भी हो केके शुक्ला कितने दिन तक बहुजन समाज पार्टी में खुद को समाहित रख पाएंगे। कहने को तो भारतीय जनता पार्टी खुद को अनुशासित पार्टी बताती है लेकिन बसपा की स्थिति यह है कि वहां बसपा नेतृत्व पार्टी की नीतियों के खिलाफ आवाज सामने आते ही पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। इसके अलावा संघ और भाजपा की जो नीतियां है बसपा का कैडर मतदाता उनका धुर विरोधी है। फिलहाल केके शुक्ला बसपा से चुनावी समर में है, भविष्य बताएगा कि वह इस चुनावी समर में किस करवट बैठते हैं और चुनाव के बाद उनके कदम क्या होंगे?
यहां 2019 के लोकसभा चुनाव का वह घटनाक्रम याद आ रहा है जब कांग्रेस ने गाजियाबाद से चार बार भाजपा के सांसद रहे रमेश चंद तोमर को गौतम बुध नगर से अपना प्रत्याशी घोषित किया था। रमेश चंद तोमर ने गौतम बुद्ध नगर से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भी दाखिल किया और उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भाजपा में शामिल हो गए जब टिकट वापस लेने का आखिरी दिन था।

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