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साहिबाबाद सीट पर होगा इस बार कड़ा मुकाबला

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गाजियाबाद। साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह राजनीतिक करवट ले रही है उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी विधानसभा सीट पर इस बार हार और जीत के बीच कड़ा मुकाबला होगा।
2017 के विधानसभा चुनाव में यहां एक तरह से भाजपा प्रत्याशी सुनील शर्मा ने एकतरफा जीत हासिल की थी। इस बार स्थिति में भारी बदलाव आ गया है। एक तरफ उत्तरांचल और पूर्वांचल समाज भाजपा के विरोध मे सच्चिदानंद सिन्हा के रूप में अपना प्रत्याशी उतारने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता मनमोहन झा गामा बगावत कर पार्टी छोड़ चुके हैं और उन्हें असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी पार्टी ए आई एम आई एम का उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
भाजपा प्रत्याशी सुनील शर्मा के लिए यहां सबसे बड़ा खतरा सच्चिदानंद होंगे। इस सीट पर पूर्वांचल और उत्तरांचल समाज के लोगों की संख्या लाखों में है जो परंपरागत ढंग से भाजपा का समर्थन करते रहे हैं। यह समाज यदि भाजपा के खिलाफ चला गया तो यह सुनील शर्मा के लिए खतरे की घंटी साबित होगा।
इसके अलावा बसपा प्रत्याशी अजीत सिंह पाल अति पिछड़ी जाति से आते हैं और उनका प्रयास होगा कि वह अति पिछड़ी जातियों को गोलबंद कर चुनाव लड़े। अति पिछड़ी जाति भी भाजपा को वोट देती रही है इस समाज में यदि अति पिछड़ी जातियों की वह शक्ति है तो यह भी भाजपा के लिए ही खतरे की घंटी बनेगी। अभी चुनाव की शुरुआत है, जैसे-जैसे चुनावी बुखार आगे बढ़ेगा वैसे ही नई नई बातें सामने आएंगी और यह भी तय होगा कि किस दल का प्रत्याशी आगे है और कौन क्षेत्र में मजबूत है।

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