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ऐसी बीमारी फैल जाए जो मांसाहारियों को हो, जो सत्ता में सारे मंत्री बीमार हो जाएं तो देश को कौन चलाएगा

हाथ जोड़कर विनय हमारी, तजो नशा बनो शाकाहारी

 

 

जब सब की दाढ़ी में आग लगती है तो अपनी-अपनी बुझाते हैं

मनुष्य के गलत कर्मों से नाराज कुदरत द्वारा दी जाने वाली कठोर सजा से समय रहते ही आगाह करने वाले, उससे बचने के उपाय भी बताने वाले, भारत के भविष्य की अनिश्चितता को दूर करने के उपाय बताने वाले इस समय के त्रिकालदर्शी सन्त पूज्य बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 4 मार्च 2091 को लखनऊ में दिए व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित संदेश में बताया कि आगे अच्छा समय आएगा। जवान भाई-बहन एक ही चरपाई पर पड़े रहते है, उनकी भावना अलग रहती और पति-पत्नी की भावना अलग रहती है। ऐसे ही विचार भावनाएं लोगों की बदल जाएंगी। समय परिस्थितियां बदल देती हैं। अभी ऐसी बीमारी चल जाए जो मांसाहारियों को ही हो, कीड़े उन्हीं को पैदा हो, छूत की बीमारी में घर का भी कोई आदमी सेवा नहीं करता है, मुर्दा जलाने नहीं जाते हैं, कहेंगे कहीं हमको भी छूत की बीमारी न हो जाए।

जब सब की दाढ़ी में आग लगती है तो लोग अपनी-अपनी बुझाते हैं

आने वाले भयंकर समय में अकेले पड़े तरसते रहोगे कि नहीं? इसीलिए प्रार्थना करता हूं कि आप सब लोग शाकाहारी हो जाओ। क्या देश की सेवा कर पाओगे जब बीमार पड़ जाओगे। सबसे कहता हूं कि आगे शाकाहारियों की जरूरत सबको पड़ेगी। अभी कोई भी सत्ता में रहे और बीमारी फैली, मांसाहारियों को हो जाए, सब मंत्री बीमार हो जाएं, कौन देश चलाएगा? वह जो अनुभव वाले शाकाहारी लोग जो विपक्ष में बैठते हैं, उनको बुलाना पड़ेगा, उनकी जरूरत पड़ेगी, जरूरत तो सबको है।

गर्व से कहो हम शाकाहारी हैं

शुरू में कुछ पक्ष में कुछ विपक्ष में बैठते थे। जब देश आजाद हुआ था उसमें तो विपक्ष था ही नहीं। ऐसी व्यवस्था तो बनानी पड़ेगी। इसलिए आप जितने भी शाकाहारी लोग हो, शर्माने की जरूरत नहीं है कि धीरे से बोलो कि हम शाकाहारी हैं। आप गर्व के साथ कहो हम शाकाहारी हैं, हम नशे का सेवन नहीं करते हैं, दुकान, दफ्तर, विधानसभा, पार्लियामेंट में बैठते हो वहां पर कहो। जो भी आप उपदेश, प्रवचन, भाषण करो सब जगह थोड़ा बहुत शाकाहार पर जरूर बोलो यथासंभव जहां बोलने लायक है। सुनकर, समझकर के लोग बदलते हैं।

अच्छे के संग से दुष्ट भी सुधर जाते हैं

इतने लोग देखो कैसे बदल गए। देखोगे तो इन्हीं में मिल जाएंगे जो 10-10 क्विंटल मछली खा गए हैं लेकिन समझ मे आ गया, अब बदल गए हैं।
सठ सुधरहिं सतसंगति पाई
जब संगत मिल जाता है जैसे तो पारस मणि पत्थर के साथ से लोहा भी सोना बन जाता है। साधकों का साथ इसलिए कहा गया- साध संग मोहे देव नित, परम गुरु दातार। साधक ने गुरु से क्या मांगा? मुझे साधक का संग दो।

सभी शिवजी से प्रार्थना अंतर में करो कि अभी तांडव रोक दो, लोगों को बता-समझा लेने दो ताकि जान बच जाए

महाराज जी ने भक्तों से कहा आप चाहते हो कि व्यवस्था सही हो जाए, देश में सतयुग का प्रादुर्भाव हो जाए, हिंसा-हत्या बंद हो जाए, सुख-शांति हो जाए, इस नाम पर सब एकजुट हैं। आज शिवरात्रि के दिन आप लोग अंतर में प्रार्थना शिवजी से करो कि तांडव अभी मत करना। लोगों को हमको समझा, बता लेने दो। जो भ्रमित हो गए हैं उनका दिल-दिमाग को सही हो जाने दो, थोड़ा सा मौका और दे दो। शिव जी जब तांडव करते हैं तो विनाश करते हैं। उनके विनाश करने के बहुत हाथ हैं। इसलिए उनसे कह दो कि अपने हाथ को अभी रोक करके रखो। जब प्रेमियों उनसे आप हाथ जोड़ोगे, उनके सारे हाथ रुक जाएंगे क्योंकि भक्त के वश में भगवान हुआ करते हैं और फिर विनाश बच जाएगा, विनाश की लीला बच जाएगी। यह जो समुद्र देवता कह रहे हैं कि धरती माता के ऊपर खून बह रहा है, मैं सफाई करूंगा। जब खून नहीं बहेगा तो वह भी रुक जाएंगे, सफाई नहीं करेगे।

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