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घरेलु हिंसा के लिए हरदम पुरुष जिम्मेदार नहीं – जूडिशियल कॉउन्सिल

नई दिल्ली :  मानवाधिकारों के संरक्षण तथा उनके हित में लगातार कार्यरत जूडिशियल कॉउन्सिल नें 10 जनवरी को पुरुष अधिकार दिवस पर वर्चुअल संगोष्ठी आयोजित की । संगोष्ठी में विशेष रूचि रखते हुए लोगों नें हिस्सा लिया और अपना उद्बोधन दिया जूडिशियल कॉउन्सिल के डायरेक्टर जनरल श्री राजीव अग्निहोत्री नें कहा बनाइये सख्त से सख्त कानून इन दिनों घरेलु हिंसा अपराध के बढ़ते आंकड़ों में अब सिर्फ पुरुष वर्ग ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि बराबरी से स्त्री भी शामिल हो रही है. सामाजिक रीतियों के नाम पर सिर्फ महिलाओं के साथ ही अन्याय नहीं होता, बल्कि पुरुष भी इससे प्रताड़ित हैं।
पुरुष के हक़ के लिए आवाज़ उढती रही है । समाज को पुरुषों की मुश्किलें बताने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए ही 10 जनवरी को पुरुष अधिकार दिवस के रूप में मनाने की पहल की गयी है कई संगठन काफी समय से प्रयत्न शील हैं लोगों का मानना है कि जब महिला और पुरुष को बराबरी का अधिकार है तो सिर्फ महिला आयोग ही क्यों बना। क्या पुरुष घरेलु हिंसा का शिकार नहीं होते? कुछ लोगों का मानना है वीमेन कमीशन कि तरह मेन कमीशन भी होना चाहिए यह मांग जायज़ है या नहीं यह विषय विचारणीय है ।
स्त्री और पुरुष दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, एक दूसरे के पूरक हैं, सहयोगी हैं, विरोधी नहीं एक मत तो अभी भी सामंत कालीन विचारधारा और छोटी मानसिकता से ग्रसित हैं, जो पुरुष और महिलाओं के लिए अलग अलग माप दंड चाहते हैं । हम इक्कीसवीं सदी में हैं, शिक्षित हो रहे हैं, लोकतान्त्रिक समाज में जी रहे हैं और प्रगति की राह पर अग्रसर हैं। इन दोहरे मापदण्डों के लिए इस आधुनिक समाज में कोई स्थान नहीं है। सब पुरुषों को एक साथ मिलकर इसकी कड़े शब्दों में निंदा करनी चाहिए और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए, भले ही इसके लिए सख्त से सख्त कानून क्यों न बनाने पड़ें।
इसके लिये अपना अन्तरावलोकन करना होगा। और स्त्री हो या पुरुष सब को साथ मिलकर यह निश्चय करना होगा कि हम सब अपने अपने घरों में सभी बच्चों को, चाहे लड़का हो या लड़की , एक जैसे संस्कार देंगे और दोनों को एक नजर से देखें,दोनों के लिए हमारे मन में एक जैसे मापदंड हों।
भौतिक विकास के साथ साथ इंसान में नैतिक मूल्यों का होना भी अत्यंत आवश्यक है ।
श्री अग्निहोत्री नें न्यूज़ वार्ता संवादाता से बातचीत में कहा “ भारत में दहेज की प्रथा 1961 से अवैध है, लेकिन यह फलती-फूलती रही है । यह महिलाओं को घरेलू हिंसा और यहां तक कि मौत की चपेट में ले आती है। दहेज देना और स्वीकार करना सदियों पुरानी दक्षिण एशियाई परंपरा है जहां दुल्हन के माता-पिता दूल्हे के परिवार को नकद, कपड़े और आभूषण उपहार में देते हैं। दहेज से होने वाली मौतों और उनके वैवाहिक घरों में दुल्हनों के उत्पीड़न को रोकने के लिए, भारत ने 1983 में एक सख्त दहेज विरोधी कानून – भारतीय दंड संहिता की धारा 498A – पेश किया। कानून के तहत एक शिकायत आरोपी, अक्सर पति और उसके परिवार के सदस्यों की तत्काल गिरफ्तारी और जेल की अनुमति देती लेकिन कई महिलाओं द्वारा झूठे मामले दर्ज करने के साथ प्रावधान का अक्सर दुरुपयोग किया जाता है। हमारा उद्देश्य पुरुष अधिकार दिवस को मनाने का यह इसके द्वारा समाज में मौजूद लैंगिक पूर्वाग्रह और इसके विनाशकारी परिणामों को उजागर किया जा सके । आज सभी समस्याओं के लिए पुरुषों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है,घरेलु हिंसा के लिए हरदम पुरुष जिम्मेदार नहीं है।”
पूनम शर्मा मेंबर ह्यूमन राइट्स कमिटी नें कहा जुडिशल कॉउंसिल के द्वारा मेंस राइट्स डे अर्थात पुरुष अधिकार दिवस एक बड़ा कदम है और इसकी जितनी सराहना की जाये वह कम है पुरुष अधिकार दिवस को प्रतिवर्ष मनाया जायेगा ।
अधिवक्ता संतोष कुमार पांडे के मुताबिक कुछ महिलाएं इसको पैसा वसूलने का जरिया बना चुकी हैं जो प्रायः देखा जाता है और मैं अदालतों में देखता भी रहता हूँ यह बहुत अफ़सोस जनक है।
विपिन जैन जिन्की शादी 2017 में हुई ने कहा मैं अपनी पत्नी के माध्यम से झूठे आरोपों का शिकार हूं मैंने शादी की या अपराध किया किया ये मुझे अभी तक समझ नहीं आया मेरी पत्नी नें मेरे ऊपर हर तरह के उत्पीड़न का आरोप लगाया मैं आज मुक़दमा झेल रहा हूँ मुझे खुद अपनी बूढ़ी माँ कि देख भाल करनी पड़ती है लोग उस अपराध के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जो मैंने नहीं किया ।
श्री अग्निहोत्री नें अंत में कहा कानून सबके लिए बराबर है और जूडिशियल कॉउन्सिल को अगर कोई लिखित में शिकायत देता है वह सम्बंधित विभाग को शिकायत भेज कर उचित कार्यवाही कि मांग करेगा ।
और शीघ्र मेंस राइट्स कमिटी का गठन करने का आश्वासन दिया ।

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