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जिले में सपा की जीत का सूखा खत्म होगा या नहीं !

मतों का बिखराव एक बार फिर भाजपा को मजबूत करता दिखाई दे रहा है

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गाजियाबाद। वर्ष 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद जनपद में समाजवादी पार्टी कोई भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो सकी थी। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा तो 2017 के चुनाव में भाजपा सभी सीटों पर कब्जा जमाने में सफल रही थी। 2017 के चुनाव में सपा से चुनाव लड़ने वाले उस समय के कद्दावर सपा नेता धर्मेश तोमर भी हापुड़ जनपद की धौलाना सीट से बसपा के उम्मीदवार के सामने हार गए थे। धर्मेश तोमर इस समय भाजपा में है जबकि बसपा से जीतने वाले असलम अली सपा में चले गए हैं।
गौरतलब है कि जिले में समाजवादी पार्टी का नेतृत्व उस समय भी मजबूत नहीं हो सका था जब प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी। उस समय मजबूत जनाधार रखने वाले पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी काफी समय तक जिला अध्यक्ष रहे लेकिन सपा के ही अनेक नेता उनके रास्ते में रोड़ा बने रहे जिस कारण पार्टी कभी भी जिले में मजबूत नहीं हो सकी। श्री मुन्नी से पहले और उनसे बाद में भी सपा का नेतृत्व गाजियाबाद में जनाधार विहीन लोगों के पास रहा है। बड़ा कारण यही है कि गाजियाबाद में कभी भी सपा अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर सकी। इस बार सपा का गठबंधन रालोद के साथ है लेकिन इस बात में संशय है कि रालोद का कितना वोट गठबंधन के रूप में सपा प्रत्याशी की तरफ जा पाएगा। इसका बड़ा कारण यह है कि रालोद का आधार वोट बैंक जाट वर्ग मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से भाजपा की तरफ खिसक गया था। किसान आंदोलन के बाद स्थिति में बदलाव आया है लेकिन सवाल फिर भी यह है कि क्या सपा प्रत्याशी को जयंत चौधरी जाट वोट दिलवा पाएंगे।
जिले में अभी तक सपा और रालोद गठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा नहीं हो सका है। गठबंधन नेताओं के अनुसार लोनी और मोदीनगर से रालोद को जा सकती है जबकि मुरादनगर, गाजियाबाद और साहिबाबाद सीट पर सपा प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे लेकिन यह भी कयास ही हैं। पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मुन्नी पूर्व में भी मुरादनगर सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और वहां उन्हें ब्राह्मण समाज का अच्छा समर्थन मिला था। किसी अन्य दल से कोई मजबूत प्रत्याशी मैदान में नहीं आता है तो मुस्लिम समाज की वोट गठबंधन प्रत्याशी को मिलना तय है। जैसी कि चर्चा है मुरादनगर सीट पर बसपा अपने पूर्व विधायक वहाब चौधरी को चुनाव बढ़ा सकती है तब मुस्लिम वोटों में विभाजन हो सकता है। मुरादनगर में सपा के यादव वोटों में भी इस बार विभाजन की संभावना है क्योंकि इस सीट पर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष विजेंद्र यादव चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
मुरादनगर के अलावा लोनी विधानसभा सीट पर सपा यदि मजबूत उम्मीदवार उतारती है तो वहां उसके लिए अच्छी संभावना बनने की बात राजनीतिक विश्लेषक भी कह रहे हैं। लोनी विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या है। गाजियाबाद सदर मे भी गठबंधन का मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी अच्छी टक्कर दे सकता है।
साहिबाबाद सीट पर पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा इस बार कितनी टक्कर देंगे यह देखना होगा।

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