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तीसरी लहर के बीच चुनाव

एक तरफ देश में कोरोना की तीसरी लहर का वेग बढ़ता जा रहा है दूसरी तरफ पांच राज्यों के चुनाव घोषित कर दिए गए हैं। पिछले 24 घंटों में कोरोना के नए केसों की संख्या एक बार फिर लोगों को डराने लगी है। जो 24 घंटे में 179723 के सामने आए हैं। दैनिक स्तर पर बढ़ने वाले केस की पॉजिटिविटी रेट परसेंट भी बढ़ रहा है। नए केसों की संख्या तेजी के साथ बढ़ रही है इसलिए माना जा रहा है कि टी सी लहर का पीक प्वाइंट जल्दी आएगा। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम 10 मार्च तक आने हैं इसलिए संभावना व्यक्त की जा रही है कि पीक प्वाइंट 10 मार्च से पहले ही आ सकता है। कोरोना की तीसरी लहर का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी चुनाव होने हैं जो सत्तारूढ़ दल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूसरा पहलू यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत पूरी भारतीय जनता पार्टी पिछले 2 माह से प्रदेश भर में अपने विकास का ढिंढोरा पीट रहे थे।एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने चुनाव प्रचार का काम काफी हद तक निपटा दिया। इसी के साथ चुनाव की घोषणा होते ही यह भी घोषणा हो गई है कि 15 जनवरी तक कोई भी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार नहीं करेगा। एक तरफ सत्तारूढ़ दल अपना चुनाव प्रचार का काम काफी हद तक पूरा कर चुका है वही कोरोना के बहाने विपक्ष के चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी गई है। विपक्ष के चुनाव प्रचार पर रोक लगाना उसके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। सत्तारूढ़ दल को चुनाव आयोग दोनों को ही पता था कि कोरोना की तीसरी लहर आगे बढ़ रही है और लगातार तेज होती जा रही है इसके बाद भी चुनाव घोषित किए गए। यह अलग बात है कि विपक्षी भी चुनाव रोके जाएं यह नहीं चाहता था लेकिन विपक्ष को यह भी पता नहीं था कि चुनाव प्रचार पर ही रोक लगा दी जाएगी। वर्चुअल चुनाव प्रचार की बात की जा रही है जो भारत में अभी दूर की कौड़ी नजर आता है। भारत के कितने प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जो वर्चुअल चुनाव प्रचार में शामिल हो पाएंगे। माना जाए तो भारतीय जनता पार्टी ने एक तरह से विपक्षी दलों पर पहल हासिल कर ली है। इसके बावजूद संकेत मिल रहे हैं कि वर्तमान विधानसभा के मुकाबले भाजपा की सीटों में कमी होगी। भाजपा के लिए सबसे मुफीद है विपक्ष का बिखराव। मुस्लिम और दलित दोनों ही बड़े मतदाता समूह में इस बार बिखराव होता नजर आ रहा है। यह स्थिति जहां विपक्ष के लिए नुकसानदेह साबित होगी वहीं सत्तारूढ़ दल के लिए फायदेमंद रहेगी। अभी सभी राजनीतिक दलों में चुनाव प्रत्याशियों के लिए मंथन चल रहा है जिसके बाद काफी स्थिति उभर कर सामने आएगी । भाजपा, कांग्रेस, सपा रालोद गठबंधन और बसपा की नजरें एक दूसरे के प्रत्याशियों पर लगी है जिन्हें देखते हुए टिकटों में बड़े पैमाने पर फेरबदल हो सकता है।

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