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भय और उम्मीद के साथ नव वर्ष का स्वागत

वर्ष 2021 आज हम सभी से विदा ले रहा है जिसके साथ हम पीछे घूम कर देखते हैं तो पाते हैं कि पूरा वर्ष भय और मृत्यु के आघात के बीच में गुजारते हुए भी हम आशाओं के दौर से गुजरते रहे। 12 महीने पूर्व वर्ष 2021 काफी भरोसे के साथ शुरू हुआ था लेकिन मार्च आते-आते हम सभी ने वायरस खेला जिसके साथ भय और मृत्यु का आघात भी हमें सताता रहा। हम सभी का साथ उम्मीद के साथ शुरू हुआ था जब कोरोनावायरस का टीका विकसित होने की खबरें आ रही थी। इसी के बीच वैक्सीन विकसित हुई और देश के करोड़ों लोगों को उसकी दोनों दोस्त लगाई भी जा चुकी हैं। वर्ष खत्म होते-होते एक बार फिर हम सबके सिर पर कोरोनावायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रान का भय सिर पर आकर सवार हो गया है। बड़ा खतरा यह है कि जिन लोगों ने कोरोनावायरस से बचाव के लिए वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली है वह भी नई वेरिएंट्स ओमिक्रान की चपेट में आ रहे हैं। इसके बावजूद हमारे समाज में लापरवाह होने की और बाहर निकलने की मानव होड़ लगी हुई है। बेपरवाह होकर मास्क नीचे कर खुली हवा में ताजगी लेने की मानों चारों तरफ प्रतियोगिता हो रही है।इसी बीच वर्ष 2022 की शुरुआत में ही पांच राज्यों के चुनाव होने हैं जिनमें देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भी शामिल है। चुनावों में फिर चारों तरफ भारी भीड़, चुनावी रैलियां होंगी चीन में कहीं कोई सावधानी नहीं रखी जाएगी। हम सब भूल जाएंगे कि हमने खौफ के साए में वर्ष 2021 गुजारा है। वर्ष 2021 के अप्रैल और मई माह के उन दिनों को हम भूल जाएंगे जब हमने सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम नंगे पैर गुजरते हुए देखा है जो असहाय होकर अपने दूरदराज के घरों को वापस जा रहे थे। उस दौर में मृत्यु का ऐसा भय चारों तरफ पसरा हुआ था कि पूरा साल एक उदास माहौल में गुजर गया। वक्त के साथ हम सब कुछ भूल गए और एक बार फिर 2022 का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। 2022 का स्वागत पाबंदियों के बीच होगा और नाइट कर्फ्यू के बीच होगा यह हमें याद रखना है। शोमैन के नाम से प्रख्यात महान फिल्मकार स्वर्गीय राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर में एक डायलॉग था, शो मस्ट गो आन अर्थात कुछ भी होता रहे लेकिन जिंदगी फिर भी अपनी रफ्तार पर चलती रहती है। वर्ष 2022 के प्रवेश के साथ सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हम इसी रफ्तार से ओमिक्रान को फैलता हुआ देखते रहेंगे। इससे कैसे निपटा एंगे इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। नए साल में हम महामारी के भवर में ही फंसे रहेंगे या भंवर को सामान्य मान कर उसके साथ जीना सीख लेंगे। बेशक हम मनुष्य के पास जीवित रहने के कई कौशल हैं और उसका समय और जीवन कभी नहीं रुकता इसी आशावाद के साथ हमें 2022 का स्वागत करना है।

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