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किसान सम्मान राशि दोगुनी करने समेत 15 सूत्रीय मांगों को लेकर भाकपा ने उपराज्यपाल व राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा

 

गाजियाबाद। किसान सम्मान निधि को बढ़ा कर दोगुना किया जाने, श्रम कानूनों में किये परिवर्तनों को पलटे जाने समेत कुल 15 सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति व यूपी के राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है। भाकपा के जिला सचिव सईद अनवर ने बताया कि केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों और कार्यवाहियों के चलते तमाम तबके परेशान हैं और आर्थिक बरबादी के गर्त में धकेल दिये गये हैं। लोग महंगाई से त्रस्त हैं और पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति व उपराज्यपाल को 15 सूत्रीय मांग भेजा गया है। इस ज्ञापन में लखीमपुर खीरी में 5 किसानों की हत्या की साजिश में शामिल केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टैनी की बर्खास्ती व उन पर उचित कानूनी करने की मांग की गई। इसके अलावा मांग की गई है कि कोरोना की संभावित खतरनाक तीसरी लहर से निपटने को बुनियादी व्यवस्थाएं की जाएं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस को जीएसटी के अंतर्गत लाकर दाम घटाये जाएं तथा राज्य सरकार वैट हटाया जाए। किसानों की फसल के उचित दाम दिलाने को रूस्क्क की गारंटी वाला कानून बनाया जाये। आंदोलनकारी 700 शहीद किसानों के परिवारों को उचित आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाये। किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर दोगुना किया जाये। उसको पाने के लिए ई- केवाईसी कराने की शर्त को रद्द किया जाये। सिंचाई के लिये विद्युत कनेक्शन की भारी भरकम फीस खत्म कर किसानों को मुफ्त विद्युत कनेक्शन दिये जायें। विद्युत बिल 2020 को रद्द किया जाये। श्रम कानूनों में किये गए प्रतिगामी परिवर्तनों को पलटा जाये। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गेहूं, चावल, चीनी, दाल, खाद्य तेल आदि के वितरण की स्थायी व्यवस्था की जाये। बेरोजगारों को रोजगार दिये जायें। रिक्त स्थान भरे जायें और नये रोजगार सृजित किये जायें। भाजपा द्वारा चुनावी लाभ के लिए विभाजन की राजनीति करने और सरकारी तंत्र का इस्तेमान कर रैलियां आदि करने पर रोक लगायी जाये। दलितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले रोके जाएं। कानून व्यवस्था को पटरी पर लाया जाये। अयोध्या के भूमि घोटाले और गरीबों को विस्थापित करने वालों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय की देख रेख में जांच कराके सजा दी जाये। वाहन और ईंधन की खरीद पर लगे टैक्सों के व्यय से बनी सड़कों पर टोल टैक्स और पेनल्टीज बसूलना बन्द किया जाये। सार्वजनिक क्षेत्र का बेचा जाना बन्द किया जाये। बैंकों में उपभोक्ताओं के जमा धन को लुटेरी फाइनेंस कंपनियों और कारपोरेटों को लुटाना बन्द किया जाये।

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