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मथुरा से चुनाव लड़ सकते हैं सीएम योगी आदित्यनाथ

अपने कार्यकाल में 19 बार मथुरा का दौरा कर चुके हैं मुख्यमंत्री

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन से होने वाली भरपाई को पूरा करने के लिए भाजपा ने कमर कस ली है। भाजपा ने एक बार फिर हिंदुत्व के एजेंडे को धार देना शुरू कर दिया है। अयोध्या, वाराणसी और मथुरा के मुद्दे को पूरी तरह गरमाया जा रहा है।
अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत के बावजूद हिंदुत्व के एजेंडे की भाजपा की झोली कभी खाली नजर आ रही है। इस झोली को भरने के लिए ही वाराणसी के भगवान शिव के मंदिर के पुनरुद्धार के साथ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का वह बयान इन दिनों काफी चर्चाओं में है जिसमें उन्होंने कहा था कि अब मथुरा की बारी है। इसके साथ यह बात भी याद रखने योग्य है कि अकेले मौर्य ही नहीं भाजपा लगातार मथुरा के पुनरुद्धार की बात करती रही है।
खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने अब तक के अपने 5 वर्ष के कार्यकाल में 19 बार मथुरा में आ चुके हैं। वह जब भी मथुरा आते हैं तो यहां साधु-संतों के साथ ही ठहरते हैं। उन्होंने मथुरा के साधु-संतों के साथ-साथ क्षेत्र की आम जनता के साथ भी सीधा संपर्क स्थापित किया है।
मथुरा को बहुत अधिक महत्व देने के साथ ही यह संकेत मिल रहे हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री अथवा उनके अन्य निकटतम सूत्रों की तरफ से अभी इस तरह के कोई संकेत नहीं दिए गए हैं लेकिन राजनीतिक समीक्षक इसी बात पर गुणा भाग कर रहे हैं कि यदि मुख्यमंत्री सीट से चुनाव लड़ते हैं तो वे पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रभावित करेंगे। इस समय भाजपा के एजेंडे पर पूर्वी उत्तर प्रदेश से अधिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश है जहां वह किसान आंदोलन की भरपाई करने के लिये जी तोड़ प्रयास कर रही है। राजनीति क्षेत्रों में यह भी चर्चा आम है कि अयोध्या भी योगी आदित्यनाथ के एजेंडे में है जहां से वे चुनाव लड़ सकते हैं।
अभी यह सब बातें केवल राजनीतिक कयास हैं लेकिन संकेत ही राजनीति कयासों को सच में बदलते हैं। बार-बार मुख्यमंत्री का मथुरा आना और मथुरा को अपने एजेंडे पर रखना बहुत सारे संकेत दे रहा है।

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