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हेलीकॉप्टर हादसों में गई है देश में कई वीआईपी की जान

हादसों पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल, जांच की प्रक्रिया के बाद सब कुछ चला जाता है ठंडे बस्ते में

सेना में हैलीकाप्टरों के दुर्घटनाग्रस्त होने की कहानी बहुत पुरानी है। पहली दुर्घटना फरवरी 1952 में हुई थी।  जिसमें लखनऊ से दिल्ली जाते समय हैलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें  सेना की पश्चिमी कमान के तत्कालीन प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस एम श्रीगणेश और क्वार्टरमास्टर जनरल, मेजर जनरल के एस थिमैया थे।

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हाल में चीफ ऑफ डिफेंस बिपिन रावत व उनकी पत्नी समेत 14 सैन्य अधिकारियों की एक हेलीकाप्टर दुर्घटना में हुई मौत से कई सवाल खड़े हुए है। भारतीय वायुसेना का यह एमआई-17वी-5 मीडियम लिफ्टर विमान दुनिया के सबसे एडवांस हैलीकाप्टरों में शामिल है। यह हैलीकाप्टर तमिलनाडू के कुन्नूर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। यह हैलकाप्टर एमआई—17 रुस में बना हैलीकाप्टर था। इसे विभिन्न स्थितियों जैसे उष्णकटिबंधीय और समुद्री जलवायु, साथ ही साथ रेगिस्तान में  भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह विमान नाइट विजन, ऑन बोर्ड वेदर रडार, ऑटोपायलट सिस्टम से लैस है। सिर्फ ट्रांसपोर्ट ही नहीं इसका इस्तेमाल हथियारों और सैनिकों को पहुंचाने में भी किया जाता है। भारत ने इसकी तकनीक रूस से खरीदी है।

साल 2008 में भारत और रूस के बीच हुए 1.3 अरब के समझौते में Mi-17V5 हेलीकॉप्टर की आपूर्ति किया जाना तय हुआ था जिसकी डिलिवरी 2011 में शुरु हुई थी। जिसकी सप्लाई 2011 से शुरू हो गई थी और 2018 तक सभी 80 हेलीकॉप्टर भारत पहुंच गए थे। अब इसकी संख्या बढ़ाकर 150 कर दी गई है।  चंडीगढ़ स्थित भारतीय वायुसेना के 3 बेस रिपेयर डिपो में इन हैलीकाप्टर का निर्माण व रखरखाव किया जाता है। रुस से उसके हिस्से लाकर हैलीकाप्टर तैयार किये जाते हैं।

इस तरह के हैलीकाप्टर कई प्रकार की सुविधाओं से लैस होते हैं। इनमें 36 सैनिकों से लेकर बड़े वाहन तक लाने ले जाने की सुविधा है। आपत स्थिति में नदी में उतरते हुए तैर सकते हैं। हर हैलीकाप्टर को तीन लोगों का क्रू मिलकर उड़ाता है। इसे पायलट, को—पायलट व फलाइट इंजीनियर होते हैं। एमआई-17 हैलीकाप्टर की गिनती रूस द्वारा तैयार दुनिया के आधुनिक हैलीकाप्टरों में होती है। इन हैलीकाप्टरों में दो इंजन होते हैं। हैलीकाप्टर को स्लाइड डोर के जरिए चौड़ा किया जा सकता है। यह अपने आप राकेट ले जाकर उनके जरिए प्रहार कर सकता है। इसमें 23 एमएम की बंदूके (तोपे) फिट की जा सकती है। इसकी मारक क्षमता जबरदस्त होती है। इनमें लड़ाई के इस्तेमाल आने वाले आधुनिक उपकरण फिट किए जा सकते हैं जो कि इसकी रक्षा करने में सक्षम साबित होते हैं।

इनका निर्माण करने वाली रूसी कंपनी कजान हेलीकॉप्टर्स का दावा है कि आपात स्थिति में यह हैलीकाप्टर महज एक इंजन की मदद से जमीन पर उतर सकते हैं। यह हैलीकाप्टर 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है व 580 किलोमीटर अधिकतम रेंज है। यह बिना रुके 675 किमी तक की उड़ान भर सकता है। जरुरत पड़ने पर 1180 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकता है। यह 4000 किलो ग्राम तक सामान ले जा सकता है।

इससे पहले इस की दुर्घटना के कोई लंबे चौड़े रिकार्ड भी नहीं रहे हैं। अंतिम हैलीकाप्टर दुर्घटना 18 नवंबर को हुई थी जब पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में तकनीकी गड़बड़ी के कारण एक एम17 वी-5 हैलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उसमें सवार सभी लोग सुरक्षित बचा लिए गए थे। फरवरी 2019 में भारत व पाकिस्तान के बीच हुए डाग फाइट के दौरान एक एमआई-17 वी हैलीकाप्टर ने गलती से अपने ही एक हैलीकाप्टर को मार गिराया था। जिसमें की उसमें सवार छह सैनिक मारे गए। तत्कालीन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने इसे बहुत बड़ी गलती करार देते हुए दोषी वायुसेना कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए थे।

सेना में हैलीकाप्टरों के दुर्घटनाग्रस्त होने की कहानी बहुत पुरानी है। पहली दुर्घटना फरवरी 1952 में हुई थी।  जिसमें लखनऊ से दिल्ली जाते समय हैलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें  सेना की पश्चिमी कमान के तत्कालीन प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस एम श्रीगणेश और क्वार्टरमास्टर जनरल, मेजर जनरल के एस थिमैया थे। उस हैलीकाप्टर में मेजर जनरल एसपीपी थोराट, मेजर जनरल मोहिंदर सिंह चोपड़ा, मेजर जनरल सरदानन्द सिंह और ब्रिगेडियर अजायब सिंह सवार थे। जबकि 22 नवंबर, 1963 को हुए हैलीकाप्टर हादसे में लेफ्टिनेंट जनरल दौलत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह, एयर वाइस मार्शल ई डब्ल्यू पिंटो, मेजर जनरल के एन डी नानावती, ब्रिगेडियर एस आर ओबेरॉय और फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस एस सोढ़ी की मृत्यु हो गई थी। 1993 मे सेना के अधिकारी जमील महमूद का हेलीकॉप्टर भी क्रैश हुआ था। इस हेलीकॉप्टर दुर्घटना में लेफ्टिनेंट जनरल जमील महमूद के अलावा उनकी पत्नी और मिलिटरी स्टाफ को अपनी जान गवानी पड़ी। नवंबर 1997 में सेना के एक चीता हैलीकाप्टर के अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण रक्षा राज्यमंत्री एन. वी. एन. सोमू  और अन्य सेना अधिकारी की मृत्यु हुई थी। ऐसे और भी हादसे हुए है।

नेताओं के लिए भी हैलीकाप्टर की सवारी बहुत मंहगी साबित हुई है। झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा मई 2012 को जब बाल बाल बचे थे जब उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अरुणाचल के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की तवांग का ईटानगर जाते समय हैलीकाप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण 30 अप्रैल 2011 को 4 लोगों सहित निधन हुआ था। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की 3 सितंबर 2009 को चित्तूर जिले में उनका हैलीकाप्टर दुर्घटना ग्रस्त होने के कारण मौत हो गई थी।  22 सितंबर 2004 को मेघालय के मंत्री व दो विधायक सहित 10 लोगों की खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई। तेलुगू देशम पार्टी के लीडर लोकसभा स्पीकर रहे बाला योगी 3 मार्च 2002 को हेलीकॉप्टर से सफर कर रहे थे। खराब मौसम के चलते हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उनकी मृत्यु हो गई। 31 मार्च 2005 को हरियाणा के ऊर्जा मंत्री ओपी जिंदल कृषि मंत्री सुरेन्द्र सिंह के साथ हेलीकॉप्टर से जा रहे थे। हेलीकॉप्टर मे कुछ तकनीकी खराबी के कारण हेलीकॉप्टर यूपी के सहारनपुर मे क्रेश हो गया। इस दुर्घटना मे सभी लोग मारे गए। गुजरात के सीएम बलवंत राय मेहता की भी हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। उस दौरान 1965 मे भारत-पाकिस्तान का युद्ध चल रहा था।

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