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गठबंधन के बाद साहिबाबाद व लोनी सीट पर फस सकता है पेच,

साहिबाबाद में आप कर सकती है दावा

साहिबाबाद और लोनी विधानसभा सीट पर दावेदारों की कोई कमी नहीं है आधा दर्जन से अधिक दावेदार इन सीटों पर दिखाई दे रहे हैं टिकट की मारामारी सबसे ज्यादा भाजपा और सपा कांग्रेसमें दिखाई दे रही है सपा रालोद का गठबंधन हो जाने के बाद इन दोनों सीटों पर पेचकस सकता है यह अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि यह दोनों सीटें किसको मिलेंगी तरह-तरह के अभी कयास ही लगाए जा रहे हैं लेकिन गठबंधन से जहां पार्टी नेताओं को खुशी हो सकती है वही टिकट की आस लगाए सपा और आप नेताओं को जोर का झटका धीरे से भी लग सकता है आपको बता दें कि आप पार्टी ने साहिबाबाद और लोनी से अपने प्रत्याशी भी घोषित कर दिए हैं साहिबाबाद सीट से छवि यादव को आप पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है इसके साथ ही लोनी विधानसभा सीट पर पार्टी ने अपना प्रत्याशी डॉक्टर सचिन शर्मा को बनाया है दोनों ही प्रत्याशी अपने अपने क्षेत्र में पार्टी का पूरी तरह से प्रचार करने के साथ ही वोटरों को भी एकजुट करने में लगे हैं दिल्ली की तर्ज पर 400 यूनिट घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली देने का सब्जबाग भी आप पार्टी दिखा रही है लेकिन जब से सपा रालोद और आपका यूपी में गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है तभी से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा ए भी तेज हो गई है कि यह सीटें किसकी झोली में जा सकती है जहां तक लोनी का सवाल है तो यहां यह सीट रालोद के खाते में जाने की पूरी पूरी संभावना जताई जा रही है और रालोद सपा और आप के गठबंधन का प्रत्याशी पूर्व विधायक मदन भैया को बनाए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता है यदि ऐसा हुआ तो फिर सपा और आप पार्टी के प्रत्याशियों को सब्र का घूंट पीकर घर बैठना पड़ सकता है ऐसी संभावनाओं ने आप प्रत्याशी और उनके समर्थकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं जहां तक लोनी में आप पार्टी प्रत्याशी सचिन शर्मा का सवाल है तो वह अपने जनसंपर्क में काफी आगे निकल चुके हैं गली गली में उनका प्रचार और लोगों से मिलना देखा जा सकता है गठबंधन के तहत रालोद की सीट जाने से आप पार्टी के नेताओं को झटका लग सकता है अभी तक लोनी से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी की तस्वीर साफ नहीं है राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा जोर पकड़ रही है यदि यह सीट सपा के खाते में जाएगी तो पूर्व विधायक जाकिर अली सपा के प्रत्याशी हो सकते हैं आपको बता दें कि जाकिर अली ने पूर्व में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा समाजवादी पार्टी के टिकट पर वर्तमान सपा जिलाध्यक्ष राशिद मलिक ने चुनाव लड़ा था और वह भी यहां साइकिल नहीं चला पाए यहां से भाजपा से नंदकिशोर विजय होकर विधायक बने इस बार लोनी क्षेत्र ही नहीं प्रदेश में भाजपा को शिकस्त देने की पूरी तैयारी चल रही है भाजपा को किसान विरोधी बताते हुए विपक्ष ने अपना चक्रव्यूह रचा है तीन कृषि कानूनों को लेकर धरने पर बैठे किसानों को भी सपा रालोद और अन्य विपक्षी पार्टियों ने अपना समर्थन दिया हालांकि केंद्र सरकार ने किसानों के विरोध को देखते हुए यह तीनों काले कानून वापस कर दिए लेकिन अभी भी एमएसपी और इस आंदोलन में शहीद हुए किसान किसानों के परिवारों को मुआवजे की मांग को लेकर किसान आंदोलन पर बैठे हैं तीनों काले कानून वापस लिए जाने को जहां किसान अपनी जीत बता रहे हैं वही विपक्षी राजनीतिक दल इसका श्रेय लेने से पीछे नहीं हट रहे हैं अब देखना यह होगा की विपक्षी दलों को किसान आंदोलन का कितना लाभ मिल पाता है लोनी विधानसभा की तरह ही साहिबाबाद विधानसभा सीट पर रालोद सपा आप का गठबंधन से पेच फंस गया है यहां से सपा से टिकट के दावेदारों में समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव वीरेंद्रयादव मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं इसके अलावा पूर्व विधायकअमरपाल शर्मा ने भी सपा का ही दामन थामा हुआ है उन्हें भी पूरा भरोसा है कि इस बार पार्टी उन्हें ही टिकट देगी राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा जोर पकड़ रही है कि सपा के दोनों ही दावेदार मजबूत है किसी को भी कमतर नहीं आका जा सकता लेकिन गठबंधन होने से इस सीट पर आप पार्टी भी अपना दावा ठोक सकती है इस तरह की चर्चाएं क्षेत्र में जोर पकड़ रही है आप पार्टी से जुड़े लोग तर्क देते हैं कि आप पार्टी का जन्म ही साहिबाबाद से हुआ है दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल भी दिल्ली जाने से पहले कौशांबी में ही रहते थे और पूरी पार्टी का कार्यालय भी कौशांबी में ही था यहीं से ही पार्टी का पूरा कार्य देखा जाता था इतना ही नहीं आप पार्टी से लोकसभा चुनाव में भी शाजिया इलमी ने अपना अच्छा प्रदर्शन किया था हालांकि बाद में भाजपा में चली गई इसी कारण आप पार्टी के यहां से दावे को भी मजबूत माना जा रहा है आप पार्टी इस सीट को लेकर पूरा दमखम लगा सकती है आप पार्टी के मजबूत दावे को कुछ लोग इस नजरिए से भी देख रहे हैं कि आप पार्टी प्रत्याशी छवि यादव दुर्गेश यादव की बहन है और दुर्गेश यादव सपा के पूर्व सांसद और सपा मुखिया अखिलेश यादव के चचेरे भाई चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव के जीजा है इसी कारण सपा मुखिया से रिश्तेदारी के चलते और पार्टी से गठबंधन होने के कारण यह सीट आपकी झोली में जाने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है वही सपा के कुछ नेता आप के इस दावे को पूरी तरह से नकार रहे हैं सपा नेताओं का मानना है कि गठबंधन भले ही हो गया हो लेकिन यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में ही रहेगी क्योंकि सपा के दावेदार विरेंद्र यादव क्षेत्र में पिछले 1 साल से जनसंपर्क कर रहे हैं और क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर भी उन्होंने आंदोलन किया है करोना काल में भी उन्होंने लोगों की काफी मदद की विरेंद्र यादव ही नहीं उनके पिता सपा के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य राम दुलार यादवऔर उनके बेटे धीरेंद्र यादव लोक लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के माध्यम से भी गरीब और बेसहारा लोगों की मदद को आगे आ रहे हैं गरीब कन्याओं की शादी के अलावा करोना काल में भी उन्होंने लोगों की भरपूर मदद की इसलिए उनकी दावेदारी को भी कमतर नहीं जा सकता है पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा के समर्थक भी उनके टिकट को लेकर पूरी तरह से आशावान है अमरपाल शर्मा भी समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद क्षेत्र में लगातार लोगों से संपर्क बनाए हुए हैं लोग मानते हैं कि पूर्व विधायक होने का भी लाभ उन्हें मिलेगा उन्होंने अपने कार्यकाल में क्षेत्र में काफी विकास कार्य कराने के साथ ही लोगों की मदद भी की उनके समर्थक मानते हैं कि लोग उन्हें पार्टी से ऊपर उठकर व्यक्तिगत तौर पर भी जिताने का काम करेंगे टिकट किस की झोली में जाएगा यह तो पार्टी आलाकमान को ही तय करना है लेकिन गठबंधन होने के बाद रोजाना नई-नई चर्चाएं जन्म ले रही है टिकट की घोषणा होने के बाद ही इन पर विराम लग पाएगा

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