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सुंसार का दर्दः सड़क नहीं, इसलिए शादी नहीं… ये है आगरा के एक गांव की कहानी।

7 किमी पैदल रैतीला रास्ता, समय पर ना पहुँचने पर कई दफा प्रसूताओं की जान पड़ जाती है सांसत में। सुंसार गाँव का उजड़ गया संसार।

बाह। फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है मगर ये दाबे झूठे हैं ये आंकड़ा किताबी है किसी कवि की यह पंक्तियां सुंसार के विकास के तमाम दावों की पोल खोल देती है। आगरा के यमुना पटटी के गांव सुंसार के हालात बेहद खराब ही।एक हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव में जाने के लिए सड़क तक नहीं हैं। मुश्किल भरा रेतीला रास्ता लोगों की नीयत बन गया है।जिससे लड़का लड़कियों की शादी भी अब ग्रामीणो के लिए चुनौती बनने लगी है। जिससे गांव के लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। वारिश के दिनो में गांव टापू बन जाता है। नेताओ और अधिकारियो के द्वारा तमाम आश्वासन मिले हैं लेकिन सालो के बाद भी हालात नही बदल सके हैं। इस गांव के ग्रामीण बताते हैं गांव के लोगों को खेतों की पगडंडियों और बीहड़ी रास्ते से आने-जाने की नियति बन गई है। रैत भरे रास्ते से मरीज को गांव ऐंबूलेस ना पहुंचने 7 किमी पैदल रास्ते से अस्पताल ले जाते हैं। समय पर ना पहुँचने पर कई दफा प्रसूताओं की जान सांसत पड़ जाती है। यह गांव वर्तमान और पिछली सभी सरकारों की पोल खोलता नजर आता है।

सड़क ना होने से टूट जाते है रिश्ते

बाह। गांव लोगों ने बताया कि इस गांव के सड़क मार्ग से नहीं जुड़ने के कारण युवक-युवतियों की शादी में दिक्कत आती है। आज भी कई ऐसे युवक-युवतियां हैं जिनकी शादी सड़क के अभाव के कारण नहीं हो सकी। गांव के मुकेश और भूरा का रिश्ता टूट गया था । गांव के लोग कहते हैं।कोई भी लड़की पक्ष इस गांव के लड़के से शादी करना नहीं चाहता । रिश्ते को आये लोग कहते हैं कि जिस गांव में सड़क और अस्पताल न हो वहां अपनी बेटी की शादी कैसे करें। बेटा हो या बेटी, उनकी शादी अच्छे परिवार में नहीं हो पाती है। गांव मे सड़क ना होना उन्हे गांव पलायन कराने पर मजबूर कर रहा है।

 

सांसत पड जाती हैं प्रसूताओं की जान

बाह।अगर किसी की तबियत खराब हो जाए, चाहे वो गर्भवती महिलाएं हों, गंभीर पेशेंट हो या बुजुर्ग उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए खाट का सहारा लेना पड़ता है । जिसको चार लोग अपने कंधों पर खेत की पगडंडियों से ले जाते है। सड़क नहीं होने से गांव में न ही एंबुलेंस पहुंच पाती है न ही स्कूल बस । दरवाजे तक 4 पहिया की बात तो दूर दोपहिया वाहन भी बडी मुश्किल से पहुंच पाते हैं।

बरसात दिनों में टापू बन जाता हैं गांव

बाह। वारिश के समय ज्यादा परेशानी वड जाती है। यमुना उफान पर होने से चारों ओर से यह गांव पानी से घिर जाता है । लोग गांव में ही कैद हो जाते हैं ।

 

 

विकास में मिली केबल लाइट

बाह।विकास के नाम पर इस गांव को सिर्फ बिजली सड़क की कमी बहुत खलती है. शुद्ध पेयजल, पानी के लिए नल, शौचालय सुविधाएं आज भी सुंसार गांव को नसीब नहीं हुई हैं. चुनाव आते ही नेता आते हैं वादे करते हैं, जीतने के बाद शक्ल दिखाने भी नहीं आते हैं. न ही सरकारी आला अधिकारी गांव की तरफ पहुंचते हैं ।

 

पानी का नही है कोई साधन, यमुना तक लगानी पड रही दौड।

बाह। सुंसार गांव में पीने के पानी का कोई साधन नही है। कुछ हैण्डपम्प जरूर लगे है। जिनका पानी खारा है। यमुना से पानी भरने के लिए जा रहे विनोद ने बताया कि नदी तक की दौड लगानी पडती है। बीहड के कच्चे और कीचड के रास्ते पर हादसे का डर रहता है। लक्ष्मी ने बताया कि गांव में पानी की टंकी हो तो पेयजल समस्या का निदान हो।

 

छत मिली नही,पेंसन की टेंसन।

बाह। झोंपडी के बाहर चारपाई पर बैठे रघुनाथ और उनके पास जमीन पर बैठी रामकुंवरि ने बताया कि 78 साल की उम्र हो गई। पेंसन मिल नही रही। रहने के लिए घर नही मिला। परिवार के साथ झोंपडी में रहते है। पशु पालन से भरण पोषण होता है। पेंसन और आवास मिल जाये तो चैन की नींद सो सकें।

शौचालय बने कबाड, खुले में शौच।

बाह। संसार गांव में बने शौचालय कबाड सरीखे हो गये है। कुछ में लोगों ने ग्रहस्ती का सामान रख लिया है तो कुछ नहाने धोने में इस्तेमाल करते है। गांव के लोगों ने बताया कि खुले में शौच को जाना मजबूरी है। हालांकि बीहडी रास्ते पर डर रहता है।

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