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बसपा के कैडर वोट बैंक पर राजनीतिक दलों की नजर

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गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए आ रहे अधिकांश सर्वे प्रदेश में 4 बार सत्तारूढ़ रही बहुजन समाज पार्टी को काफी कमजोर मानकर चल रहे हैं। सर्वे बता रहे हैं कि बहुजन समाज पार्टी का कैडर वोट बैंक भी बिखराव की ओर है जिसे देखते हुए प्रदेश के राजनीतिक दलों का प्रयास है कि बसपा के कैडर वोट बैंक में सेंध लगाकर अपनी और किया जाए।
गौरतलब है कि बाकी राजनीतिक दलों के मुकाबले बसपा ने अपनी चुनावी तैयारियां काफी पहले शुरू कर दी है। बसपा ने चुनावी तैयारियों की शुरुआत ब्राह्मण वोटों को साधने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन के नाम से की थी। बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि बसपा कैडर वोट अविभाजित तौर पर उसके साथ है। हालांकि आजाद समाज पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद ने बसपा के कैडर वोट बैंक जाटव जाति में गहरी सेंध लगाई है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी बसपा को काफी नुकसान पहुंचाएगी।
वर्तमान स्थिति यह है कि समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी भी दलित वोटरों को अपनी और करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। अपने इसी प्रयास के अंतर्गत समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एडवोकेट चंद्रशेखर आजाद के साथ चुनावी गठबंधन के प्रयास में लगे हैं। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी दलित वोटरों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। बसपा का वोट बैंक बिखरता है तो बसपा को इससे भारी नुक़सान होगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव बसपा को कमजोर करने की रणनीति पर ही काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में वे चन्द्र शेखर आजाद के साथ गठबंधन के लिए प्रयास रत हैं।

दूसरी तरफ बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि चुनाव बताएगा कि बसपा का कैडर वोट बैंक आज भी एकजुट है। बसपा के कैडर वोट बैंक में जाटव समाज की संख्या उत्तर प्रदेश में लगभग कुल वोटरों की 15 फ़ीसदी है। जाटव वोटों के साथ उम्मीदवार की जाति की वोट मिलकर प्रदेश में बसपा का वोट प्रतिशत 22से 24 फ़ीसदी हो जाती है जो बसपा की अब तक ताकत रही है। बसपा की इसी ताकत में वर्तमान चुनाव के दौरान कमी होती दिखाई दे रही है जो बसपा को तीसरे नंबर पर पहुंचा रहा है।

इस बार बसपा का वोट प्रतिशत 10 से लेकर 15 फ़ीसदी के बीच आंका जा रहा है जो बसपा के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।

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