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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी राजनीतिक हलचल के आसार

सपा, रालोद के बाद चन्द्रशेखर आजाद भी हो सकते हैं गठबंधन का हिस्सा

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गाजियाबाद। प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन के बाद नई चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब दलित राजनीति में तेजी के साथ अपना स्थान बना रहे आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर के साथ की सियासी गठबंधन करने के प्रयास में हैं।
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि सपा रालोद के बाद यदि चंद्रशेखर भी इस गठबंधन में शामिल हो जाते हैं तो यह मिलकर किसी भी दल का खेल बिगाड़ सकते हैं। जाट मुस्लिम दलित समीकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह बदल देगा। प्रदेश में अपनी सियासी हालत लगातार मजबूत करते जा रहे चंद्रशेखर आजाद और अखिलेश यादव कि कल मुलाकात होनी थी जो किन्ही कारणों से नहीं हो सकी। माना जा रहा है कि देर सबेर चंद्रशेखर भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। बसपा के लगातार गिरते ग्राफ से खाली होती जा रही जगहको चंद्रशेखर भरते जा रहे हैं। चंद्रशेखर आजाद इन दिनों लखनऊ में है जहां वे कॉमन मिनिमम प्रोग्राम और सीट शेयरिंग पर राजनीतिक दलों से बातचीत कर रहे हैं। जयंत चौधरी के बाद अगर चंद्रशेखर भी अखिलेश यादव से हाथ मिला लेते हैं तो यह गठबंधन काफी मजबूत होकर उभरेगा। पूरे उत्तर प्रदेश में जाट भले ही 4 फ़ीसदी है लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों की संख्या 20 फ़ीसदी के करीब है। वही मुस्लिम आबादी भी 30 फीसदीऔर दलित समुदाय 20 फ़ीसदी के करीब है। किसान आंदोलन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का माहौल बदला है जो बीजेपी के खिलाफ जा रहा है। किसान आंदोलन के बाद जयंत चौधरी का सियासी ग्राफ बढ़ा है तो चंद्रशेखर आजाद भी दलित नेता के तौर पर अपनी जगह बना चुके हैं। हालांकि प्रदेश के 25 फ़ीसदी दलित वोटों में से गैर जादव दलितों को निकाल दिया जाए तो जाटव वोटों की आप आबादी भी लगभग 16 फ़ीसदी है। चंद्रशेखर आजाद के गठबंधन में शामिल होने के बाद भले ही पूरा वोट गठबंधन को न जा पाए लेकिन वह हर सीट पर जाटव वोटों में सेंध लगाने में सफल रहेंगे।

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